होर्मुज पर ईरान की दादागिरी खत्म करने की तैयारी में खाड़ी देश, IMEC कॉरिडोर नई उम्मीद; भारत निभा सकता है अहम भूमिका
ईरान युद्ध और होर्मुज बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है. कई देश अब तेल सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रहे हैं. इस बीच भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा एक बड़े विकल्प के रूप में उभर रहा है, जिससे भारत को यूरोप से सीधा जुड़ने का मौका मिल सकता है.
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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग ने दुनिया के कई बड़े देशों के सामने ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है. तेल सप्लाई पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति किसी बड़े झटके से कम नहीं है. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब कई देश मिलकर वैकल्पिक रास्तों की तलाश में जुट गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे संकट से बचने के लिए पाइपलाइन और मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क ही सबसे मजबूत विकल्प बन सकते हैं. इसी बीच भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (India-Middle East-Europe Economic Corridor) को एक बड़े समाधान के रूप में देखा जा रहा है.
खाड़ी देशों की बढ़ी बेचैनी
इस युद्ध का असर खाड़ी देशों पर भी साफ दिख रहा है. लंबे समय से तेल के आयात-निर्यात के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे अहम रास्ता रहा है. लेकिन अब यही रास्ता संकट का केंद्र बन गया है. खाड़ी देशों के नीति-निर्माता अब इस पर निर्भरता कम करने के लिए नए विकल्पों पर तेजी से काम करने की योजना बना रहे हैं. उनका मानना है कि एक ही रास्ते पर निर्भर रहना अब जोखिम भरा साबित हो सकता है.
सऊदी अरब की रणनीति आई काम
इस संकट के बीच सऊदी अरब को अपने पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा मिला है. सऊदी अरब पहले से ही लाल सागर तक पाइपलाइन बिछा चुका है, जिससे वह बिना होर्मुज के भी तेल सप्लाई जारी रखने में सफल रहा. यह दिखाता है कि पहले से की गई रणनीतिक तैयारी ऐसे संकट में कितनी अहम साबित होती है. जहां दूसरे देश परेशान हैं, वहीं सऊदी अरब अपेक्षाकृत स्थिर नजर आ रहा है.
हाइफा रूट बना चर्चा का केंद्र
इस बीच इजरायल के हाइफा पोर्ट को लेकर भी नई चर्चा शुरू हो गई है. यह रूट अरब सागर और भूमध्य सागर को जोड़ने की क्षमता रखता है. अगर इस पर काम होता है तो यूरोप और एशिया के बीच व्यापार का एक नया रास्ता खुल सकता है. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह योजना तुरंत लागू करना आसान नहीं है. इसके लिए पाइपलाइन के साथ-साथ सड़क और रेलवे नेटवर्क का भी विकास जरूरी होगा. इसलिए इसे फिलहाल भविष्य की योजना के रूप में देखा जा रहा है.
बढ़ रहा निवेश
लेबनान की कंस्ट्रक्शन कंपनी CAT ग्रुप के सीईओ क्रिस्टोफर बुश के अनुसार, पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है. कई देशों और कंपनियों ने इस दिशा में शुरुआती कदम भी उठाने शुरू कर दिए हैं. ऐसे में साफ है कि दुनिया अब ऊर्जा सप्लाई के लिए नए और सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रही है.
भारत के लिए बड़ा मौका
इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका भी काफी अहम हो सकती है. I2U2 Group के तहत भारत पहले ही IMEC कॉरिडोर को लेकर चर्चा कर चुका है. यह कॉरिडोर भारत को मध्य पूर्व और यूरोप से सीधे जोड़ सकता है. अगर यह योजना सफल होती है तो भारत न सिर्फ व्यापारिक रूप से मजबूत होगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी स्थिति भी और मजबूत हो जाएगी.
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बताते चलें कि होर्मुज संकट ने दुनिया को एक बड़ा सबक दिया है. अब देश एक ही रास्ते पर निर्भर रहने की बजाय कई विकल्प तैयार करने पर जोर दे रहे हैं. आने वाले समय में यह बदलाव वैश्विक व्यापार और ऊर्जा रणनीति की नई दिशा तय कर सकता है.
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