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बस एक आदेश… और टूट पड़ेंगे 50,000 हजार सैनिक! ईरान के चारों तरफ अमेरिका ने बिछाया मौत का जाल!

Middle East Crisis: अमेरिका ईरान को चारों तरफ से घेरना के लिए अपने 50 हजार सैनिकों को ईरान की धरती पर उतारने की तैयारी कर रहा है.

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30 Mar 2026
( Updated: 30 Mar 2026
05:45 PM )
बस एक आदेश… और टूट पड़ेंगे 50,000 हजार सैनिक! ईरान के चारों तरफ अमेरिका ने बिछाया मौत का जाल!
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मध्य पूर्व में तनाव दिन-ब-दिन विकराल रूप लेता जा रहा है. एक तरफ अमेरिका और इजरायल अब बड़े सैन्य ऑपरेशन की तरफ बढ़ रहे हैं, वहीं ईरान है कि झुकने को तैयार नहीं है. अब खबर ये है कि अमेरिका ईरान को चारों तरफ घेरना के लिए अपने 50 हजार सैनिकों को ईरान की धरती पर उतारने की तैयारी कर रहा है. 

ईरान के चारों तरफ घेरने की तैयारी

'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2,500 नौसैनिकों और 2,500 मरीन की ताजा खेप पहुंचने से ईरान के चारों ओर अमेरिकी घेरा और सख्त हो गया है. वर्तमान स्थिति ऐसी है कि किसी भी समय बड़े सैन्य टकराव की संभावना बनी हुई है. 

अब तक 90 से अधिक ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला

हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले देश पर नियंत्रण पाने के लिए 50,000 सैनिकों की संख्या बहुत कम है. अब तक, अमेरिकी वायुसेना ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप सहित 90 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बना चुकी है.

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स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पर अमेरिका के नियंत्रण की तैयारी

विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा जिस स्ट्रेट ऑफ हार्मुज के रास्ते गुजरता है, वह ईरानी हमलों के कारण बाधित हो गया है. इसलिए, ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन वैश्विक तेल आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए किसी द्वीप या तटीय क्षेत्र पर कब्जा करने की योजना बना सकता है.
 
2,000 पैराट्रूपर्स की मिडिल ईस्ट में गुप्त तैनाती

पेंटागन ने हाल ही में जिन 2,000 पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट में भेजा है, उनकी सही स्थिति को गुप्त रखा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन सैनिकों का इस्तेमाल उत्तरी फारसी खाड़ी में मौजूद ईरान के आर्थिक गढ़, खार्ग द्वीप पर अधिकार करने के लिए किया जा सकता है. मरीन और पैराट्रूपर्स का यह संयुक्त अभियान ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए जमीनी स्तर पर बड़ी कार्रवाई कर सकता है.

तमाम कोशिशों के बावजूद संवाद की कोई संभावना नहीं

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वहीं दूसरी तरफ, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों की मध्यस्थता की कोशिशों के बावजूद, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सीधे संवाद की कोई भी संभावना नहीं दिख रही है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इन सैन्य तैयारियों को एक सामान्य प्रक्रिया बताया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पेंटागन का दायित्व राष्ट्रपति को अधिकतम विकल्प उपलब्ध कराना है, और इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि राष्ट्रपति ने किसी अंतिम सैन्य कार्रवाई का निर्णय ले लिया है.

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