पाकिस्तान में अज्ञात हमलावर ने फिर उड़ाई PAK आर्मी की नींद, हाफिज सईद के करीबी पर धुरंधर स्टाइल में हमला, ICU में भर्ती
लश्कर के फाउंडर अमीर हमजा को पाकिस्तान में गोली मारी गई है. लाहौर में अज्ञात हमलावरों ने उसे कार में निशाना बनाया. लश्कर के फाउंडर और हाफिज के करीबी की हालत नाजुक बताई जा रही है.
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पाकिस्तान में एक बार फिर अज्ञात हमलावरों ने पाक फौज की कठपुतली आतंकियों की नींद उड़ा दी है. जब से धुरंधर फिल्म रिलीज हुई है तब से ही एक के बाद एक आतंकी मारे जा रहे हैं. ये हमलावर चुपचाप आते हैं, अपना काम करते हैं और गायब हो जाते हैं. इसी कड़ी में भारत के दुश्मनों की लिस्ट में शामिल खूंखार आतंकी अमीर हमजा को लाहौर में गोलियों से भून दिया गया. इतना ही नहीं ये घटना एक न्यूज चैनल की बिल्डिंग के बाहर हुई. रिपोर्ट के मुताबिक हमजा फिलहाल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है और उसकी स्थिति फिलहाल गंभीर बनी हुई है.
भारत के खूंखार दुश्मन अमीर हमजा पर दूसरी बार हमला!
आपको बता दें कि अमीर हमजा की भारत को लंबे समय से तलाश थी और वो सुरक्षा एजेंसियां इन्हें पकड़ने के लिए काफी जद्दोजहद कर रहे थे. हमजा को लश्कर के फाउंडिंग सदस्यों में से एक भी माना जाता है. बंदूकधारियों की गोलीबारी में हमजा बुरी तरह जख्मी है, लेकिन उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है. कहा जा रहा है कि ये दूसरी बार है जब उस पर हमला किया गया है. इससे पहले मई 2025 में भी उस पर हमला किया गया था, जिसमें वो बुरी तरह जख्मी हुआ था. हालांकि वो तब बचने में कामयाब रहा था.
कहा जा रहा है कि हमलावरों ने जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया और जिस तरह एक-एक कर भारत के दुश्मनों का सफाया किया जा रहा है उससे पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों में भी हड़कंप मच गया है. इतना ही नहीं, अब चर्चा होने लगी है कि आखिर ये हमलावर हैं कौन और ये ऐसा कर क्यों रहे हैं. आपको बताएं कि ये काम इतनी सफाई से किया गया कि हमजा संभल तक नहीं पाया और अब अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है.
कौन है अमीर हमजा?
पाकिस्तान में जितने भी आतंकी संगठन हैं और आतंकी हैं, उनके तार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. सब की कमान PAK फौज के हाथ में है. जैश, लश्कर, सब एक ही विचारधारे से निकले अलग-अलग तने हैं. जिसमें लश्कर मेन है. इसी का फाउंडर था अमीर हमजा. इसे लश्कर-ए-तोयबा का रणनीतिक दिमाग माना जाता है. इसके अलावा हाफिज सईद के करीबियों से एक हमजा ने कई ऑपरेशन को अंजाम दिए और हाफिज के कहने को इंप्लीमेंट किया. सईद-हमजा ने मिलकर लश्कर की नींव रखी थी.
हाफिज सईद का दायां हाथ था अमीर हमजा!
यानी कि हाफिज सईद अगर पॉलिटिकल और फौज से सांठगांठ का काम देखता था तो अमीर हमजा रणनीतियां बनाता था. इसलिए इसे लश्कर का थिंक टैंक और विचारक माना जाता है. कुल मिलाकर यही वो आदमी था, जिसके जिम्मे नए लोगों की भर्ती से लेकर ब्रेनवॉशिंग का काम भी था.
अमेरिका ने घोषित किया था वैश्विक आतंकी!
ये कितना बड़ा खूंखार था कि उसे अमेरिका ने इसे 'वैश्विक आतंकवादी' घोषित कर दिया था. कहा जाता है कि वो युवाओं की ब्रेनवॉशिंग से लेकर लश्कर के लिए जकात, पैसे इकट्ठा भी करने का काम करता था. रिपोर्ट्स के मुताबिक वो बंदी बनाए गए आतंकियों को छुड़ाने की सौदेबाजी में माहिर था. खबर की मानें तो उसने लश्कर की मैगजीन भी निकाली और जिहाद को बढ़ावा देने वाली किताबें भी लिखीं. 2018 में पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने और लश्कर पर कार्रवाई के दिखावे की कोशिश हुई तो इसने 'जैश-ए-मनकाफा' नाम का एक नया मुखौटा तैयार कर लिया ताकि कश्मीर में दहशतगर्दी जारी रख सके.
एक महीने के अंदर तीसरे आतंकी पर हमला
इससे पहले एक और पाकिस्तानी आतंकी बिलाल सलाफी को ढेर कर दिया गया था. खबर के अनुसार पाकिस्तान के मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय में बीते दिनों धमाका हुआ. इसमें भारत के दुश्मन लश्कर-ए-तैयबा का सीनियर कमांडर बिलाल सलाफी मारा गिराया गया था. इसके साथ ही भारत को नुकसान पहुंचाने में शामिल एक और आतंकी का खात्मा हो गया है. अब पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां हैरान हैं. जानकारी के मुताबिक ये घटना 21 मार्च को घटित हुई थी.
खबर के मुताबिर कि लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय में हुए इस हमले को कुछ अज्ञात लोगों ने अंजाम दिया था, जिसमें सलाफी ढेर हो गया. इस वारदात को जिस तरीके से अंजाम दिया गया, वो और भी चौंकाने वाली है. दरअसल मुरीदके लश्कर-ए-तैयबा का हेडक्वार्टर है और वहां ईद की नमाज चल रही थी. खबर के मुताबिक बिलाल के दोनों तरफ दो लोग नमाज पढ़ रहे थे. नमाज खत्म होते ही उन्होंने ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं. इतना ही नहीं, संभवत: बिलाल पर चाकू से भी वार किया गया और सबके सामने मारा गया. इस दौरान और वहां लोगों की भीड़ लग गई और चीख-पुकार मच गई.
कौन था भारत का दुश्मन बिलाल आरिफ सलाफी?
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बिलाल वही आतंकी था जो पाकिस्तान में नौजवानों को कश्मीर में जिहाद के लिए रिक्रूट किया करता था. इसे लश्कर-ए-तैयबा का सेकंड-इन-कमांड भी समझा जाता था. यह वही व्यक्ति था जिसने हमास वालों को मुरीदके में बुलाया था. इसके हमास और सीधे फिलीस्तीन से संबंध थे. इसने हमास वालों को बुलाकर बाकायदा ट्रेनिंग दिलवाई और यह खुद ट्रेनिंग मास्टर था. इसने पूरे पाकिस्तान में घूम-घूम कर 12 से लेकर 17 साल के बच्चों को इकट्ठा किया और कश्मीर में जिहाद के लिए भेजा.
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