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जंग के बीच ट्रंप की बढ़ी चिंता... ईरान के निशाने पर Google-Microsoft समेत 18 अमेरिकी टेक कंपनियां, जानें पूरा मामला

खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों के बाद IRGC ने 31 मार्च 2026 को अमेरिका की 18 बड़ी कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी. सूची में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और इंटेल जैसी कंपनियां शामिल हैं. IRGC ने कहा कि ईरानी नेताओं पर हमला हुआ तो खाड़ी में अमेरिकी कंपनियों को टारगेट किया जाएगा.

जंग के बीच ट्रंप की बढ़ी चिंता... ईरान के निशाने पर Google-Microsoft समेत 18 अमेरिकी टेक कंपनियां, जानें पूरा मामला
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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग को एक महीने से भी ज्यादा वक़्त गुजर चुका है. इस युद्ध के चलते दुनिया के कई बड़े देश ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है.  ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी देकर दुनिया भर की कॉर्पोरेट दुनिया में हलचल मचा दी है. मंगलवार 31 मार्च 2026 को जारी इस बयान ने साफ कर दिया कि अब यह टकराव सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा.

अमेरिकी कंपनियों को सीधी चेतावनी

IRGC ने साफ कहा है कि अगर किसी भी ईरानी नेता की हत्या होती है, तो उसका जवाब सीधे अमेरिकी कंपनियों पर हमले के रूप में दिया जाएगा. इस सूची में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, मेटा और इंटेल जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं. इसके अलावा टेस्ला, बोइंग और आईबीएम जैसी कंपनियों का नाम भी सामने आया है.

ईरान ने लगाया गंभीर आरोप 

ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं और उनके खिलाफ साइबर हमलों में शामिल हैं. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इस बयान ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में साइबर वॉर और कॉर्पोरेट टारगेटिंग का खतरा बढ़ सकता है. खास बात यह है कि इन कंपनियों के बड़े ऑफिस खाड़ी देशों, खासकर दुबई और अबू धाबी में मौजूद हैं. ऐसे में वहां काम करने वाले हजारों कर्मचारियों और बिजनेस ऑपरेशन्स पर भी खतरा मंडराने लगा है. इससे न सिर्फ कंपनियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है.

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क्यों बढ़ रहा टकराव?

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ हाल ही में हुए एक हमले में है, जिसमें IRGC के ब्रिगेडियर जनरल जमशेद इशाकी की मौत हुई थी. ईरान इसे अमेरिकी-इजरायली कार्रवाई बता रहा है और उसी के जवाब में अब यह सख्त रुख अपनाया गया है.

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बहरहाल, अब यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि टकराव सिर्फ देशों के बीच नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और कॉर्पोरेट दुनिया तक फैलता नजर आ रहा है. आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.

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