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भगवा और गदा वाला ये संगठन कौन? बंगाल चुनाव के बीच अचानक चर्चा में आई ‘अंजनी पुत्र सेना’, जानें किसकी बदलेगा बाजी

पश्चिम बंगाल में रामनवमी शोभायात्रा को लेकर सियासत गरम है. चुनावी माहौल के बीच ‘अंजनी पुत्र सेना’ चर्चा में है, जो हावड़ा में सक्रिय एक संगठन है और 2015 से भव्य शोभायात्राएं निकालता रहा है.

भगवा और गदा वाला ये संगठन कौन? बंगाल चुनाव के बीच अचानक चर्चा में आई ‘अंजनी पुत्र सेना’, जानें किसकी बदलेगा बाजी
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पश्चिम बंगाल में रामनवमी की शोभायात्रा हर साल सुर्खियों में रहती है, लेकिन इस बार मामला और ज्यादा गरमा गया है. वजह है आगामी विधानसभा चुनाव और इसके बीच धार्मिक आयोजनों को लेकर बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी. राज्य सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों और अदालत से मिली अनुमति के बीच अब एक नाम तेजी से चर्चा में है, वह है ‘अंजनी पुत्र सेना’. सवाल उठ रहा है कि आखिर यह संगठन क्या है और क्या इसकी गतिविधियों का चुनावी माहौल पर असर पड़ सकता है.

क्या है ‘अंजनी पुत्र सेना’? 

‘अंजनी पुत्र सेना’ पश्चिम बंगाल के हावड़ा इलाके में सक्रिय एक दक्षिणपंथी संगठन है, जो मुख्य रूप से रामनवमी के मौके पर भव्य शोभायात्रा निकालने के लिए जाना जाता है. जानकारी के मुताबिक, यह संगठन वर्ष 2015 से सक्रिय है. संगठन खुद को हिंदुत्व के प्रचार, मंदिरों के जीर्णोद्धार और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए समाज को एकजुट करने वाला मंच बताता है.

ममता सरकार पर आरोप

संगठन के सचिव सुरेंद्र वर्मा ने राज्य सरकार पर सीधे आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि रामनवमी की शोभायात्रा के लिए हर बार अनुमति लेने में परेशानी होती है और कई बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अपने ही देश में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए इतनी बाधाओं का सामना करना जरूरी है. वर्मा का आरोप है कि बंगाल में हिंदू त्योहारों को निशाना बनाया जाता है. उन्होंने कहा कि अगर कोई वाहन पर ‘जय श्रीराम’ लिख देता है तो उसे नुकसान पहुंचाया जाता है, लेकिन ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं होती. वहीं, शोभायात्रा निकालने पर संगठन के खिलाफ केस दर्ज हो जाते हैं.

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ध्रुवीकरण का आरोप और राजनीति

इन बयानों के बीच राजनीतिक माहौल भी गर्म होता नजर आ रहा है. सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि अगर बंगाल में ध्रुवीकरण होता है तो हिंदू समाज एकजुट होगा और इसका राजनीतिक फायदा कुछ दल उठाने की कोशिश करेंगे. उनके बयान साफ तौर पर भाजपा के रुख से मेल खाते नजर आते हैं. दूसरी ओर, बीजेपी लंबे समय से राज्य सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाती रही है. ऐसे में रामनवमी की शोभायात्रा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रह गई, बल्कि यह चुनावी रणनीति का भी हिस्सा बनती दिख रही है.

अदालत ने दी अनुमति 

इस बार अदालत के निर्देश पर शोभायात्रा के लिए समय और रूट भी तय किए गए हैं. ‘अंजनी पुत्र सेना’ की यात्रा सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक नरसिंह मंदिर से हावड़ा मैदान तक निकलेगी. वहीं, विश्व हिंदू परिषद की रैली दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक बीई कॉलेज गेट-3 से मल्लिक फाटक होते हुए रामकृष्णपुर घाट तक जाएगी.

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बताते चलें कि मौजूदा स्थिति को देखकर यह कहा जा सकता है कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों का असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है. खासकर तब, जब राजनीतिक दल इन मुद्दों को अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं. पश्चिम बंगाल में रामनवमी की शोभायात्रा इस बार सिर्फ आस्था का विषय नहीं रही, बल्कि यह राजनीति और चुनावी समीकरण का अहम हिस्सा बन गई है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे घटनाक्रम का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है.

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