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चुनाव से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं... पार्टी के बड़े नेता का नामांकन रद्द, नहीं लड़ पाएंगे इलेक्शन

असम चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका लगा है. बरपेटा सीट से महानंदा सरकार का नामांकन फॉर्म-ए में गड़बड़ी के कारण जांच के दौरान निरस्त कर दिया गया.

चुनाव से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं... पार्टी के बड़े नेता का नामांकन रद्द, नहीं लड़ पाएंगे इलेक्शन
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Assam Assembly Election 2026: असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पूरी ताकत के साथ पार्टी को मज़बूत करते हुए बीजेपी को मात देने का भरसक प्रयास कर रहे हैं लेकिन उससे ओआहले पार्टी के लिए रोज़ाना कोई ना कोई ऐसी खबर सामने आती है. जो पार्टी आलाकमान की चिंता को बढ़ा देती है. ऐसा ही ताजा मामला सामने आया है कि सूबे की बरपेटा विधानसभा सीट से सामने आया है. यहां पार्टी के उम्मीदवार महानंदा सरकार का नामांकन पत्र जांच के दौरान खारिज कर दिया गया है. इस फैसले ने चुनावी माहौल में हलचल बढ़ा दी है और कांग्रेस की रणनीति पर भी असर पड़ा है.

फॉर्म-ए में गड़बड़ी बनी वजह

चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, महानंदा सरकार का नामांकन ‘फॉर्म-ए’ में पाई गई गड़बड़ियों के कारण अमान्य घोषित किया गया. यह फॉर्म किसी भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के अधिकृत उम्मीदवार होने का अहम दस्तावेज होता है. रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया.

जांच में सामने आई गलतियां 

अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेजों की जांच के दौरान कई विसंगतियां सामने आईं, जिसके बाद चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत नामांकन को रद्द कर दिया गया. एक अधिकारी के अनुसार, पूरी जांच प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट हुआ कि फॉर्म-ए में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया था. सूत्रों की मानें तो यह गड़बड़ी सत्यापन के दौरान सामने आई. इसके बाद नामांकन पर आपत्ति दर्ज की गई और विस्तृत जांच की गई. सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से अपनी दलीलें भी रखी गईं, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने आपत्तियों को सही मानते हुए नामांकन खारिज कर दिया.

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चुनावी समीकरण पर असर

इस फैसले के बाद कांग्रेस बरपेटा सीट पर एक अहम मुकाबले से पहले ही बाहर हो गई है. इससे न सिर्फ पार्टी की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि, कांग्रेस की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. पार्टी के अंदरूनी सूत्र इसे दुर्भाग्यपूर्ण मान रहे हैं और कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. माना जा रहा है कि कांग्रेस इस फैसले को चुनौती देने के लिए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटा सकती है.

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बताते चलें कि बरपेटा सीट को असम की राजनीति में काफी अहम माना जाता है. ऐसे में इस घटनाक्रम के बाद यहां का चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है. अब देखना होगा कि कांग्रेस इस स्थिति से कैसे निपटती है और क्या यह मामला आगे किसी बड़े कानूनी मोड़ तक पहुंचता है.

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