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असम की सियासत में ओवैसी की एंट्री, बदरुद्दीन अजमल से मिलाया हाथ, क्या अब बीजेपी-कांग्रेस के लिए बढ़ेगी चुनौती?

Assam Elections: असम चुनावों में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ (AIUDF) के समर्थन में असदुद्दीन ओवैसी जनसभाएं करेंगे, जिसके बाद प्रदेश की राजनीतिक समीकरण बदलने की अटकलें तेज हो गईं हैं.

असम की सियासत में ओवैसी की एंट्री, बदरुद्दीन अजमल से मिलाया हाथ, क्या अब बीजेपी-कांग्रेस के लिए बढ़ेगी चुनौती?
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आगामी विधानसभा चुनावों से पहले असम में एआईयूडीएफ (AIUDF) प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के लिए असदुद्दीन ओवैसी प्रचार करने वाले हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने शुक्रवार को कहा कि ओवैसी 2 और 3 अप्रैल को असम का दौरा करेंगे, जहां वे विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में कम से कम आठ जनसभाओं को संबोधित करेंगे. इस चुनाव प्रचार अभियान का मुख्य उद्देश्य अजमल के लिए समर्थन जुटाना होगा, जो बिन्नाकंडी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

ओवैसी की एंट्री से अल्पसंख्यक क्षेत्रों में AIUDF की पकड़ होगी मजबूत

ओवैसी की भागीदारी से चुनाव प्रचार को गति मिलने की उम्मीद है, खासकर अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में जहां एआईयूडीएफ का पारंपरिक रूप से प्रभाव रहा है. उनके भाषणों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को निशाना बनाए जाने की संभावना है, जिससे एआईयूडीएफ को एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित किया जा सके.

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अजमल की AIUDF के लिए कड़ी चुनौती

असम की राजनीति में एक प्रमुख हस्ती अजमल बदलते चुनावी परिदृश्य के बीच अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. एआईयूडीएफ अपने मूल समर्थक आधार पर भरोसा करते हुए चुनावों से पहले जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है. 2016 के असम विधानसभा चुनावों में एआईयूडीएफ ने 13 सीटें जीतकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और अल्पसंख्यक मतदाताओं के प्रभुत्व वाले कई निर्वाचन क्षेत्रों में खुद को प्रमुख विपक्षी ताकत के रूप में स्थापित किया था.

2021 चुनाव में AIUDF को मिलीं 16 सीटें

2021 के चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाली "महाजोत" के साथ गठबंधन करके पार्टी की सीटों की संख्या बढ़कर 16 हो गई. हालांकि गठबंधन ने कड़ी टक्कर दी लेकिन अंततः वह असफल रहा क्योंकि भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में वापस आ गया. एआईयूडीएफ के प्रदर्शन से उसकी निरंतर प्रासंगिकता और अपने पारंपरिक मतदाता आधार से परे विस्तार करने में आने वाली चुनौतियों दोनों का पता चलता है. चुनाव के तुरंत बाद कांग्रेस ने एआईयूडीएफ से गठबंधन तोड़ दिया और दोनों पार्टियों ने 2024 के लोकसभा चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़े. एआईयूडीएफ लोकसभा चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल पाई.

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असम में 9 अप्रैल को होगा मतदान

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ओवैसी का अभियान चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है. हालांकि चुनावी परिणाम पर इसका समग्र प्रभाव अभी देखा जाना बाकी है.126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को एक ही चरण में होगा और मतगणना 4 मई को निर्धारित है.

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