Kerala Election: केरल में BJP के साथ गठबंधन पर CM विजयन ने तोड़ी चुप्पी, कहा- छोटी चाल नहीं चलती माकपा
केरल चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है राजनीतिक पारा हाई हो रहा है. कांग्रेस ने माकपा पर BJP के साथ गठबंधन का आरोप लगाया है. जिस पर CM पिनाराई विजयन ने चुप्पी तोड़ी है.
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Kerala Election 2026: आगामी केरल विधानसभा चुनाव के बीच BJP और सीपीआई(एम) के बीच कथित 'गुप्त समझौते' के आरोप ने सियासी माहौल गरमा दिया है. इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है.
पिछले दो दिनों से चल रहे इस विवाद पर शुक्रवार को प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि सीपीआई(एम) कुछ सीटों या वोटों के लिए 'छोटी राजनीतिक चालें' नहीं चलती.
BJP के साथ समझौते से इंकार
पिनाराई विजयन ने कहा, ‘लोग सब कुछ देख रहे हैं और उसी के अनुसार जवाब देंगे. राजनीति केवल गणित नहीं है.’ इस बयान के जरिए उन्होंने भाजपा और सीपीआई(एम) के बीच किसी भी तरह के समझौते की संभावना को नकार दिया.
‘दक्षिणपंथी ताकतों के साथ मिलकर काम कर रही कांग्रेस’
CM विजयन ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर ही BJP और दक्षिणपंथी ताकतों के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने वडकारा और बेपोर जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां वामपंथ विरोधी वोटों को एकजुट करने की कोशिश की गई थी लेकिन जनता ने इसे खारिज कर दिया और वाम दलों को जीत मिली.
मुख्यमंत्री ने 1977 के चुनावों के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े आरोपों को भी 'बेबुनियाद और तोड़-मरोड़कर पेश किया गया' बताया. उन्होंने कहा कि उस समय कन्नूर के राजनीतिक माहौल को जानने वाले लोग जानते हैं कि वे खुद RSS के निशाने पर थे.
पिनाराई विजयन ने कहा, दशकों बाद अब यह माना जा रहा है कि कोई भी झूठ सच की तरह पेश किया जा सकता है. कांग्रेस इसी तरह का प्रचार कर रही है.
CM विजयन ने ऐतिहासिक उदाहरणों का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि ईएमएस नंबूदरीपाद को हराने के प्रयासों और दीनदयाल उपाध्याय से जुड़े अभियानों में कांग्रेस ने कभी-कभी आरएसएस समर्थित ताकतों के साथ अप्रत्यक्ष सहयोग किया था. उन्होंने दोहराया कि वामपंथी दल हमेशा सांप्रदायिकता के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे हैं.
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इसके अलावा, CM विजयन ने BJP नेताओं की ओर से गुरुवायूर जैसे क्षेत्रों में धार्मिक प्रतिनिधित्व को लेकर दिए गए बयानों की आलोचना की. उन्होंने इसे केरल की राजनीति में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश बताया.
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उन्होंने कहा, ‘केरल एक ऐसा राज्य है जहां लोग बिना जाति और धर्म के भेदभाव के साथ रहते हैं और यह देश में सेक्युलरिज्म का मजबूत गढ़ है.’ हालांकि, इन जवाबों के बावजूद 'डील' का आरोप चुनावी माहौल में तेजी से फैल रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा खासकर मुस्लिम मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए उठाया जा रहा है, जो राज्य की आबादी में 25 प्रतिशत से अधिक हैं और 2021 में वामपंथ की जीत में अहम भूमिका निभा चुके हैं. सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रही सीपीआई(एम) के लिए यह विधानसभा चुनाव काफी अहम है.
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