‘भारत चाहे तो लेबनान पर हमले रोक सकता है इजरायल…’ हिज्जबुल्लाह ने मांगी मदद, रिपोर्ट में दावा
ईरान पर जारी हमलों के बीच इजरायली सेना के निशाने पर लेबनान भी है. इजरायली हमलों में लेबनान में दो पत्रकार भी मारे गए हैं. वहीं, हिज्बुल्लाह के लड़ाके भी सेना को कड़ी चुनौती दे रहे हैं.
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Middle East Tension: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच, लेबनान की प्रमुख मिलिशिया (गैर पेशेवर सशस्त्र समूह) और ईरान का करीबी सहयोगी हिज़्बुल्लाह का कहना है कि लेबनान और इजरायल के बीच समझौता संभव है, अगर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और भारत अपनी भूमिका निभाएं और इजरायल पर नवंबर 2024 के युद्धविराम समझौते का पालन करने के लिए दबाव डालें.
लेबनान इस संघर्ष में तब शामिल हुआ जब 2 मार्च को तेहरान समर्थित हिज्बुल्लाह ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बदले में इज़रायल पर रॉकेट दागे. यह हमला अमेरिका-इज़राइल युद्ध की शुरुआत के दौरान हुआ था.
इजरायल के हमलों में लेबनान में कितने लोग मारे गए?
इज़रायल ने इसके जवाब में लेबनान पर व्यापक हवाई हमले किए और अब उसकी सेना दक्षिणी लेबनान के कई कस्बों में आगे बढ़ रही है. लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से कम से कम 1,189 लोग मारे जा चुके हैं.
हिज़्बुल्लाह के अनुसार, लेबनान पर युद्ध ‘ग्रेटर इज़रायल’ स्थापित करने की योजना का हिस्सा है और उसने साफ किया कि जब तक इजरायली कब्जा जारी रहेगा, प्रतिरोध भी जारी रहेगा.’
NDTV से की गई बातचीत लेबनान में हिज़्बुल्लाह के संसदीय दल के प्रमुख इब्राहिम मोस्वी ने कहा कि वे युद्ध में और ज्यादा जानें नहीं गंवाना चाहते, लेकिन जब तक इज़रायल आक्रामकता जारी रखेगा, वे लड़ाई जारी रखेंगे. उन्होंने दावा किया कि इजरायल के बड़े सैन्य अभियान के बावजूद वह अब तक दक्षिण लेबनान पर कब्जा नहीं कर सका है और लड़ाई जारी है.
इब्राहिम मोस्वी ने कहा, ‘अगर अमेरिका, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, यूरोपीय संघ इज़रायल पर दबाव डालें, और उदाहरण के तौर पर भारत यह कहे कि यह मानवता और अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, तो शायद यह युद्ध रुक सकता है. हम केवल रक्षात्मक बल हैं. हमने हमला शुरू नहीं किया. अगर समझौते की सभी शर्तों का पालन किया जाए, तो फिर से बातचीत शुरू हो सकती है.’
2 मार्च से इजरायल ने दक्षिण लेबनान में बड़ा सैन्य अभियान और बेरूत में भारी हवाई हमले शुरू किए थे.
नेतन्याहू ने लेबनान पर सेना को क्या आदेश दिए?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी सेना को दक्षिण लेबनान में कार्रवाई और बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. एक वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने कहा कि वे ‘मौजूदा सुरक्षा बफर ज़ोन का विस्तार’ करना चाहते हैं और हालात को पूरी तरह बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’ इस युद्ध के कारण लेबनान में 12 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं और दक्षिण के कई गांव तबाह हो गए हैं. हिज़्बुल्लाह और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने युद्ध शुरू होने के बाद से संयुक्त अभियानों की घोषणा की है.
इब्राहिम मोस्वी के अनुसार, इज़रायल ने यह युद्ध थोपा है और वह लेबनान की जमीन और संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है. उन्होंने कहा, ‘हमारे देश के कई हिस्से पहले से कब्जे में हैं और अब वे और क्षेत्रों पर कब्जा बढ़ा रहे हैं. लेबनानी लोग इज़रायल की लगातार आक्रामकता के शिकार हैं और प्रतिरोध बल अपने देश की रक्षा के लिए लड़ रहा है.’
इब्राहिम मोस्वी ने यह आरोप भी खारिज किया कि युद्ध हिज़्बुल्लाह ने शुरू किया था. उन्होंने कहा, ‘यह कहना गलत है कि नया युद्ध हमने शुरू किया. नवंबर 2024 के बाद भी इज़राइल का युद्ध कभी नहीं रुका. जबकि हमारी ओर से ही युद्धविराम था.’ उन्होंने दावा किया कि इज़रायल ने युद्धविराम का उल्लंघन किया और 500 से ज्यादा लोगों को मार डाला और 2,000 से ज्यादा को घायल किया.
‘जंग के लिए जिम्मेदार अंतर्राष्ट्रीय समुदाय’
इब्राहिम मोस्वी ने कहा कि उन्होंने कई बार चेतावनी दी थी कि हिज़्बुल्लाह हमेशा धैर्य नहीं रखेगा. उन्होंने कहा, ‘हम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को जिम्मेदार ठहराते हैं जिन्होंने युद्धविराम की गारंटी दी थी. वे इज़रायल पर दबाव क्यों नहीं डालते?’
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान पर हमले के बाद हिज़्बुल्लाह ने इज़रायल पर हमला किया. उन्होंने कहा, ‘जब इज़राइल ने ईरान पर हमला किया, तब हमने जवाब देना उचित समझा. यह केवल एक्शन का रिएक्शन है.
हिज्जबुल्लाह ने डोनाल्ड ट्रंप ने पर क्या आरोप लगाए?
मोस्वी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाते हुए कहा, ट्रंप कहते हैं कि इज़रायल एक छोटा देश है और उसे विस्तार करना चाहिए. इज़रायली नेता भी 'ग्रेटर इज़रायल' की बात करते हैं.
'इजरायल को रियायत दे रही लेबनान सरकार'
इब्राहिम मोस्वी ने यह भी कहा कि लेबनान की सरकार हिज़्बुल्लाह के साथ नहीं है और वह इज़रायल को रियायतें देना चाहती है, लेकिन अधिकांश लेबनानी लोग किसी भी तरह की रियायत के खिलाफ हैं.’ उन्होंने दावा किया कि युद्ध इसलिए हो रहा है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इज़राइल पर दबाव नहीं डाला.
उन्होंने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार युद्धविराम के 15 महीनों में हिज़्बुल्लाह ने कोई हमला नहीं किया. हिज़्बुल्लाह ने स्वेच्छा से लितानी नदी के दक्षिण क्षेत्र से अपने हथियार हटा लिए थे.
मोस्वी ने इज़राइल पर निर्दोष लोगों की हत्या का आरोप लगाया और कहा कि वे युद्ध में और लोगों की मौत नहीं चाहते.
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उन्होंने कहा, ‘हमने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन लोग मारे जा रहे हैं क्योंकि इज़राइल विनाशकारी युद्ध कर रहा है.’ आखिर में हिजबुल्लाह ने कहा कि वह जब तक इजरायल के खिलाफ आक्रामक हमले जारी रखेगा जब तक इजरायल आक्रामक रहेगा.
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