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अमेरिका ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' कुछ समय के लिए रोका, ट्रंप बोले- पाकिस्तान के अनुरोध के बाद लिया फैसला

अमेरिका ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को फिलहाल कुछ समय के लिए रोक दिया है. इस फैसले को लेकर ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान समेत कई देशों ने इसका अनुरोध किया था.

Image Credit: X/@WhiteHouse
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को फिलहाल कुछ समय के लिए रोक दिया गया है. यह अमेरिका के नेतृत्व में चलाया जा रहा वह अभियान है, जिसके तहत होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही कराई जा रही थी. ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में प्रगति और पाकिस्तान समेत कई देशों के अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया है. 

'ईरान के खिलाफ अमेरिका को बड़ी सफलता मिली'

सोशल मीडिया पर जारी बयान में ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में अमेरिका को बड़ी सफलता मिली है. साथ ही ईरान के प्रतिनिधियों के साथ समझौते को लेकर अच्छी प्रगति हुई है. इसी कारण आपसी सहमति से तय किया गया है कि “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को थोड़े समय के लिए रोका जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर हो पाते हैं या नहीं. हालांकि उन्होंने साफ किया कि समुद्री नाकेबंदी पहले की तरह जारी रहेगी.

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यह घोषणा ट्रंप और उनके प्रशासन के वरिष्ठ सदस्यों के व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम में बोलने के कुछ घंटों बाद की गई. यह कार्यक्रम युवाओं की फ़िटनेस और 'प्रेसिडेंशियल फ़िटनेस टेस्ट' को फिर से शुरू करने पर केंद्रित था. इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने ईरान के साथ चल रहे टकराव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी का बार-बार ज़िक्र किया.

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ट्रंप ने किया ईरान की नौसेना को खत्म करने का दावा

इस कार्यक्रम के दौरान, ट्रंप ने दावा किया कि हाल के सैन्य अभियानों में ईरान की नौसैनिक और हवाई क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंचा है. ट्रंप ने कहा, "उनके पास अब कोई नौसेना नहीं बची है, वह पूरी तरह से तबाह हो चुकी है. उनकी वायुसेना का भी यही हाल है." अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा कि इस अभियान ने उस रणनीतिक जलमार्ग पर अमेरिका का नियंत्रण सुनिश्चित कर दिया है.

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'ईरान अब समझौता करना चाहता है'

ट्रंप ने कहा, "मैंने एक बयान दिया था कि अपने जहाज़ टेक्सास भेजो, वहां की दूरी बहुत ज़्यादा नहीं है. अपने जहाज लुइसियाना भेजो. अपने जहाज अलास्का भेजो."ट्रंप ने यह भी कहा कि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देश सुरक्षित समुद्री रास्तों के लिए अमेरिका पर काफी निर्भर हैं. उनके मुताबिक जापान अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत तेल होर्मुज स्ट्रेट से प्राप्त करता है, जबकि दक्षिण कोरिया लगभग 43 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से लाता है. ट्रंप ने दावा किया कि लगातार सैन्य और आर्थिक दबाव के कारण ईरान अब समझौता करना चाहता है. उन्होंने कहा, “ईरान समझौता करना चाहता है. जब आपकी सेना लगभग खत्म हो जाए, तो कोई भी ऐसा ही करेगा.”

जब उनसे पूछा गया कि क्या मौजूदा प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था टिक पाएगी, तो ट्रंप ने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था तेजी से कमजोर हो रही है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहाजों की आवाजाही से जुड़ी कार्रवाई भले कुछ समय के लिए रोकी गई हो, लेकिन समुद्री नाकेबंदी जारी रहेगी.

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यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पिछले कई हफ्तों से खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिका ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमले किए हैं और वॉशिंगटन ने कई बार चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए.

दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल पेट्रोलियम का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है. इसलिए भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े तेल आयातक देशों की नजर भी इस क्षेत्र पर बनी हुई है.

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इनपुट-आईएएनएस

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