Advertisement
Advertisement
ये तो सिर्फ ट्रेलर है! अमेरिका को भारत ने दिखाया असली दम, हज़ारों करोड़ की डिफेंस डील रद्द, अभी कतार में हैं और भी सौदे!
भारत को 2021 में अमेरिका से 6 और विमान खरीदे जाने थे, जिसकी मंजूरी अमेरिका दे चुका था. लागत 21,000 करोड़ होने की वजह से डील को रोका गया था. 2025 में सौदे की लागत 31,500 करोड़ हो गई थी, इसके बावजूद भारत सरकार ने इन विमानों की खरीद करने का फैसला लिया था. लेकिन, फिलहाल डील को स्थगित कर दिया गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ भारत के तेल व्यापार की वजह से भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है.भारत सरकार ने भी अमेरिका के इस रवैए का जवाब देने का मन बना लिया है.
भारत ने दिया अमेरिका को करारा जवाब
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के खिलाफ भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए एक अहम सैन्य डील रद्द कर दी है.डिफेंस वेबसाइट आईडीआरडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने तीन अगस्त को इस सौदे को रोकने का फैसला लिया.
भारत ने करोड़ों की सैन्य डील की रद्द
दरअसल, भारत ने अपनी नौसेना के लिए अमेरिका की बोइंग कंपनी से छह पी-8I पोसेडन विमान खरीदने का सौदा किया था.ये विमान समुद्र में निगरानी के उपयोग में लाए जाने थे.भारतीय नौसेना को इन विमानों की जरूरत है.ये अमेरिकी विमान बेहद आधुनिक और उन्नत हैं.अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक में चीन के बढ़ते प्रभाव पर नजर रखने के लिए अहम हैं.लेकिन, फिलहाल यह डील रोक दी गई है.
भारत ने 2009 में अमेरिका से ख़रीदे थे बोइंग विमान
भारतीय नौसेना के पास पहले से ऐसे 12 विमान हैं.भारत ने 2009 में बोइंग विमान खरीदे थे और इन विमानों को खरीदने वाला अमेरिका का पहला खरीदार बना था.उस वक्त लागत भारतीय रुपए में करीब 19 हजार करोड़ रुपए आई थी. 2016 में भारत ने 4 विमान और खरीदे थे, जिस पर 8,500 करोड़ की लागत आई थी.भारतीय नौसेना ने इस विमान की क्षमता और दक्षता की प्रशंसा की थी.
₹31,500 करोड़ की डील रद्द!
इसके बाद 2021 में 6 और विमान खरीदे जाने थे, जिसकी मंजूरी अमेरिका दे चुका था.लागत 21,000 करोड़ होने की वजह से डील को रोका गया था.2025 में सौदे की लागत 31,500 करोड़ हो गई थी, इसके बावजूद भारत सरकार ने इन विमानों की खरीद करने का फैसला लिया था.लेकिन, फिलहाल डील को स्थगित कर दिया गया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और यूरोपीय संघ पर भारत पर अनैतिक और अतार्किक टैरिफ लगाने का आरोप लगाया था.विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यूरोपीय संघ का व्यापार रूस से भारत की अपेक्षा ज्यादा है.अमेरिका भी मास्को के साथ व्यापार करता है.ऐसे में भारत पर टैरिफ लगाना अनुचित है.
Advertisement
यह भी पढ़ें
Advertisement
Advertisement