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रोशडेल ग्रूमिंग गैंग केस: पाकिस्तान ने UK की जेल से रिहा शाबिर अहमद को अपना नागरिक मानने से किया इनकार, ब्रिटेन में बवाल
कारी अब्दुल रऊफ और आदिल खान के बाद अब शाबिर अहमद…पाकिस्तान ने रोशडेल ग्रूमिंग गैंग और रेपिस्ट को भी अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया है. अब इस पर पूरा ब्रिटेन आगबबूला है और पाकिस्तान पर कार्रवाई पर विचार कर रहा है.
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पाकिस्तान और ब्रिटेन के बीच एक बार फिर ठन गई है. ब्रिटिश सरकार-लोग ग्रूमिंग गैंग के सरगान और सैकड़ों बच्चियों को निशाना बनाने वाले दुष्कर्म की सजा काट रहे आरोपी शाबिर अहमद को डिपोर्ट करने पर अड़ी हुई है, वहीं पाकिस्तान उसे अपना नागरिक मानने से ही इनकार कर रही है. ये ठीक उसी तरह है जैसा पाकिस्तान का इतिहास रहा है. पाकिस्तान ने 1948 में जम्मू और कश्मीर में हमला करने वाले अपने सैनिकों को मुजाहिदीन करार दे दिया. इसके बाद कारगिल में भी हमलावरों को बकरी चराने वाला, लड़ाका करार दिया और जान गंवाने वाले अपने सैनिकों को अपनाने से इनकार करता रहा. इसके बाद 26/11 के मुंबई हमले के जिंदा बचे आरोपी अजमल कसाब को भी लंबे समय तक अपना मानने से इनकार करता रहा. यहां तक कि नवाज शरीफ के स्वीकार करने के बावजूद. अब वह कुछ ऐसा ही ब्रिटेन में नाबालिग बच्चियों को अपना निशाना बनाने वाले ग्रूमिंग गैंग के अपराधियों के साथ भी ऐसा ही कर रहा है.
पाकिस्तान सरकार यूके के रोशडेल में हुए ग्रूमिंग गैंग के सरगना की तरह ही वही दावा दोहरा रही है कि वह अब पाकिस्तानी नागरिक नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान रोशडेल में 'ग्रूमिंग गैंग' के मुख्य आरोपियों में से एक शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार कर रहा है. उसका कहना है कि शाबिर अहमद ने अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट फाड़ दिया था और अब वह पाकिस्तान का नागरिक नहीं है. द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, शबीर अहमद इस हफ्ते 30 नाबालिग लड़कियों से बलात्कार से जुड़े मामलों में 14 साल की सजा काटने के बाद जेल से रिहा हुआ.
पाकिस्तान ने ग्रूमिंग गैंग के सरगना को अपना नागरिक मानने से किया इनकार
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पाकिस्तान के अधिकारी और मंत्री कह रहे हैं कि वह अब पाकिस्तान का नागरिक नहीं है. इसी वजह से उसे उसके देश वापस भेजने में रुकावट आ रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि, "ब्रिटेन सरकार का मानना है कि पाकिस्तान का उसे वापस लेने से इनकार करना, 1971 के इमिग्रेशन एक्ट की उस कानूनी बाधा से भी बड़ी समस्या है, जो कॉमनवेल्थ नागरिक होने के कारण उसे ब्रिटेन से बाहर भेजने में रोक बन रही है."
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रोशडेल ग्रूमिंग गैंग केस को लेकर ब्रिटेन पाक में ठनी
सरकारी सूत्र के हवाले से द टेलीग्राफ ने लिखा, "1971 के इमिग्रेशन एक्ट से जुड़ी समस्या का शायद कोई हल निकल सकता है, लेकिन पाकिस्तान वाला मामला उससे ज्यादा मुश्किल है."
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यूके की जेल से रिहा शाबिर अहमद को वापस नहीं ले रहा पाकिस्तान
शबीर अहमद 1960 के दशक के आखिर में पाकिस्तान छोड़कर ब्रिटेन आया था और उसके पास दोनों देशों की नागरिकता थी. उसे 2012 में 22 साल की सजा सुनाई गई थी और 2016 में उसका ब्रिटिश पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था ताकि जेल से रिहा होने के बाद उसके निर्वासन (डिपोर्टेशन) की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके. उसके पीड़ितों से वादा किया गया था कि उसे देश से निष्कासित किया जाएगा.
क्या है रोशडेल ग्रूमिंग गैंग केस?
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यूके में बच्चों के संगठित यौन शोषण की जांच के लिए निजी तौर पर फंड की गई संसदीय जांच की 219 पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार, कई दशकों तक कम से कम 2,50,000 लड़कियों को सामूहिक दुष्कर्म, तस्करी, टॉर्चर और जबरदस्ती गर्भवती किए जाने का शिकार बनाया गया. इसमें ज्यादातर अपराधी पाकिस्तानी मुस्लिम मूल के थे और इसमें मदद करने वाले संस्थान मुख्य रूप से ब्रिटिश सरकार के थे.
संसदीय जांच में हुआ सामूहिक दुष्कर्म का खुलासा
यह रिपोर्ट 'सामूहिक दुष्कर्म इन्क्वायरी' नाम की एक निजी फंडिंग से कराई गई संसदीय जांच का हिस्सा है. इसकी अध्यक्षता रिफॉर्म यूके के सांसद रूपर्ट लोव ने की, जबकि इसकी संचालन प्रमुख सर्वाइवर और सामाजिक कार्यकर्ता सैमी वुडहाउस थीं. इस जांच के लिए 20,000 से ज्यादा लोगों ने आर्थिक मदद दी. इस जांच को कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं थे, लेकिन इसमें पीड़ितों, व्हिसलब्लोअर्स, नेताओं और विशेषज्ञों की गवाही कई सार्वजनिक सुनवाई के दौरान शामिल की गई. यह जानकारी अमेरिका स्थित दक्षिण एशियाई टीवी नेटवर्क दीया टीवी की एक रिपोर्ट में दी गई.
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शाबिर अहमद को डिपोर्ट करने पर अड़ा ब्रिटेन
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश अधिकारी पाकिस्तान के साथ बातचीत करने के साथ-साथ अहमद को ब्रिटेन से बाहर भेजने के सभी संभावित विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. इसी बीच प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने गृह सचिव (मंत्री) शबाना महमूद से इस मामले को देखने और समीक्षा करने को कहा है, क्योंकि यह बात सामने आई है कि इमिग्रेशन एक्ट 1971 के प्रावधान फिहलाह अहमद को डिपोर्ट करने (देश से बाहर भेजने) से रोकता है.
शाबिर अहमद को क्यों नहीं डिपोर्ट कर सकता पाकिस्तान?
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आपको बता दें कि यह कानून उन कॉमनवेल्थ नागरिकों को सुरक्षा देता है जो 1973 से पहले यूके आए थे और वहां कम से कम पांच साल तक रहे हैं. बीबीसी के अनुसार, सरकार इस कानूनी बाधा को दूर करने के लिए संसद में पेश इमिग्रेशन एंड असाइलम बिल में संशोधन करने पर विचार कर रही है. हालांकि, अगर कानून बदल भी दिया जाए, तब भी अहमद को डिपोर्ट करने के लिए पाकिस्तान की सहमति की ज़रूरत होगी.
ब्रिटिश पीएम के आधिकारिक आवास-ऑफिस डाउनिंग स्ट्रीट के एक प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने इस्लामाबाद के सामने यह मुद्दा उठाया है और विदेशी अपराधी नागरिकों को डिपोर्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही यह भी माना कि यह मामला कानूनी और कूटनीतिक रूप से जटिल है.
शाबिर के जेल से रिहा होते ही ख़ौफ़ में पीड़ित
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इसी बीच पीड़ितों का कहना है कि वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अहमद को सख्त लाइसेंस शर्तों के तहत 24 घंटे कर्मचारियों की निगरानी वाली जगह पर रखा गया है और उस पर GPS इलेक्ट्रॉनिक टैग से नज़र रखी जा रही है. होम ऑफिस के अनुसार, इन शर्तों का कोई भी उल्लंघन होने पर उसे तुरंत जेल वापस भेज दिया जाएगा. कुछ पीड़ितों ने कहा कि वे उसकी रिहाई से "डरे हुए" हैं और अब सुरक्षित महसूस नहीं करते.
पाकिस्तान पहले भी दो अन्य आरोपियों को अपना नागरिक मानने से कर चुका है इनकार!
बता दें कि ऐसे ही डिपोर्टेशन के मामले पहले भी फेल हो चुके हैं. पाकिस्तान इसी तरह के अपराधियों को ठीक इसी तरह की दलील देकर अपना नागरिक मानने से इनकार कर देता रहा है. यह मामला भी रोचडेल ग्रूमिंग गैंग के दो अन्य मुख्य आरोपियों कारी अब्दुल रऊफ और आदिल खान को डिपोर्ट करने की पिछली विफल कोशिशों जैसा ही है.
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पाकिस्तान की आर्थिक सहायता रद्द करने पर विचार कर रहा पाकिस्तान
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दोनों लोगों की ब्रिटिश नागरिकता छीन ली गई थी, लेकिन अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ने के बाद पाकिस्तान ने उन्हें स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया, जिससे यूके की उन्हें डिपोर्ट करने की कोशिशों में बाधा आई. कंज़र्वेटिव शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिलप ने सख्त रुख अपनाने की मांग की और सुझाव दिया कि अगर पाकिस्तान उन दोषी अपराधियों को स्वीकार करने से इनकार करता रहता है जिन्हें यूके बाहर भेजना चाहता है, तो ब्रिटेन को पाकिस्तान को दी जाने वाली विदेशी सहायता में कटौती करने पर विचार करना चाहिए.