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जंग की आहट से कांप रहा पाकिस्तान... PoK में लोगों से दो महीने का राशन जमा करने को कहा, 1000 मदरसे भी किए बंद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों सेनाओं को खुली छूट दिए जाने के बाद से गीदड़भभकी देने वाले पाकिस्तानियों के अब पसीने छूटनें लगे है. भारत की सैन्य कार्रवाई का डर पाक सरकार को इस कदर सता रहा है कि अब अपनी आवाम से राशन के समान जुटाने का संदेश भी देने लगा है.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के ताबड़तोड़ एक्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों सेनाओं को खुली छूट दिए जाने के बाद से गीदड़भभकी देने वाले पाकिस्तानियों के अब पसीने छूटनें लगे है. भारत की सैन्य कार्रवाई का डर पाक सरकार को इस कदर सता रहा है कि अब अपनी आवाम से राशन के समान जुटाने का संदेश भी देने लगा है. जानकारी के मुताबिक PoK प्रशासन ने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर एलओसी के पास रहने वाले लोगों को शुक्रवार को खाने-पीने का सामान जमा करने का निर्देश दिया है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीओके के प्रधानमंत्री चौधरी अनवर उल हक ने शुक्रवार को स्थानीय विधानसभा में कहा, "नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास स्थित 13 निर्वाचन क्षेत्रों में दो महीने के लिए खाद्य आपूर्ति का भंडारण करने के निर्देश जारी किए गए हैं." हक ने कहा कि क्षेत्रीय सरकार ने 13 निर्वाचन क्षेत्रों में 'खाद्य, दवाइयां और अन्य सभी बुनियादी आवश्यकताओं' की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक अरब रुपये ($3.5 मिलियन) का आपातकालीन कोष भी बनाया है. पीओके के प्रधानमंत्री ने बताया कि नियंत्रण रेखा से लगे इलाकों में सड़कों की मरम्मत के लिए सरकारी और निजी मशीनरी भी तैनात की जा रही है.
मदरसे बंद होने पर लोगों ने क्या कहा ?
इस बीच पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 1000 से अधिक मदरसे कम से कम 10 दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं. स्थानीय अधिकारियों ने शुक्रवार को यह घोषणा की. विश्वसनीय सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि भारत की तरफ से हमले के डर की वजह से पीओके में स्थित मदरसों को बंद कर दिया गया. भारत यह दावा करता रहा है कि इन संस्थानों का इस्तेमाल आतंकवादियों के छिपने के ठिकाने के रूप में किया जा रहा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि भारत पाकिस्तान के साथ पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू नहीं करेगा, लेकिन नियंत्रण रेखा (एलओसी) के साथ पीओके क्षेत्रों में कुछ हमले जरूर करेगा.
उरी हमले के बाद भी हुई थी जबरदस्त कार्रवाई
29 सितंबर 2016 को, भारतीय सेना के कमांडो की टीमों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में प्रवेश कर आतंकी ठिकानों में छिपे बैठे आतंकवादियों को खत्म किया था. यह कार्रवाई 18 सितंबर 2016 को जम्मू और कश्मीर के उरी में एक भारतीय सेना की चौकी पर हमला करने के दस दिन बाद हुई थी. हमले में 19 सैनिकों की मौत हो गई थी. ऐसे में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को सेना को हमले का जवाब देने के लिए 'पूर्ण परिचालन स्वतंत्रता' दी.
बता दें आतंकियों ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल - पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में लोगों (ज्यादातर पर्यटक) पर अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं. हमले में 26 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. प्रतिबंधित आतंकवादी समूह 'लश्कर-ए-तैयबा' से जुड़े 'टीआरएफ' ने इस हमले की जिम्मेदारी ली. पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया. नई दिल्ली ने इस्लामबाद के खिलाफ कई सख्त कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं. इनमें 1960 के सिंधु जल समझौते को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने, अटारी इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट को बंद करने, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने, शामिल हैं. भारत के इन फैसलों के बाद पाकिस्तान ने शिमला समझौते को स्थगित करने और भारतीय उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने, भारतीय नागरिकों के वीजा रद्दे करने जैसे कदम उठाए.
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