Advertisement
कभी 'इंडिया आउट' का लगाया था नारा, अब भारत से मांग रहे मदद...PM मोदी ने सुन ली मालदीव की गुहार, किए बड़े ऐलान
खाड़ी संकट के बीच भारत ने पड़ोसी देशों की मदद को लेकर बड़ा ऐलान किया है. इसके तहत कभी चीन के इशारे पर हिंदुस्तान को आंख दिखाने वाले मालदीव के लिए 2026-27 में आवश्यक वस्तुओं के निर्यात को मंजूरी दी गई है. वहीं बांग्लादेश और श्रीलंका को लेकर भी बड़ा ऐलान किया गया है.
Advertisement
खाड़ी जंग के बीच भारत ने अपनी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के तहत बड़ा फैसला लिया है. ऐसे वक्त में जब दुनिया ईंधन और सप्लाई संकट से जूझ रही है, उस वक्त सरकार ने मालदीव के अनुरोध पर भारत ने एक अहम कदम उठाते हुए वर्ष 2026-27 के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात को मंजूरी दे दी है. भारतीय उच्चायोग के अनुसार, विशेष द्विपक्षीय तंत्र के तहत कई जरूरी खाद्य और निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, जिससे मालदीव की जरूरतों और विकास परियोजनाओं को मजबूती मिलेगी.
आपतो बताएं कि सरकार ने इस मदद का ऐलान उस वक्त किया है जब होर्मुज संकट के कारण मालदीव की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है. विमान और पर्यटन सर्विस प्रभावित होने के कारण उसकी रीढ़ टूट गई है. इसी कारण उसके राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से मदद की गुहार लगाई थी. ये वहीं देश है जहां कुछ साल पहले तक चीन के इशारे पर इंडिया आउट के नारे लग रहे थे. फिर भारतीय सेना की देश वापसी हुई और अब यही देश संकट से उबरने के लिए भारत की ओर देख रहा है.
भारत ने बांग्लादेश को भेजी आवश्यक वस्तुओं की खेप
Advertisement
भारतीय उच्चायोग ने बताया कि मालदीव सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने एक विशेष द्विपक्षीय तंत्र के तहत वर्ष 2026-27 के लिए कुछ निश्चित मात्रा में आवश्यक वस्तुओं जिनमें अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दालें, पत्थर की गिट्टी और नदी की रेत शामिल हैं के निर्यात की अनुमति दे दी है. इस तंत्र के अंतर्गत इनमें से प्रत्येक वस्तु का कोटा मालदीव सरकार की ओर से साझा की गई आवश्यकताओं के अनुरूप निर्धारित किया गया है.
Advertisement
मालदीव के निर्माण उद्योग के लिए नदी की रेत और पत्थर की गिट्टी की आपूर्ति अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तुएं हैं. इसके अतिरिक्त, चालू वर्ष के लिए चावल के कोटे में भी 77 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि की गई है. पिछले वर्षों की ही भांति, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान इन वस्तुओं का निर्यात, किसी भी मौजूदा अथवा भविष्य में लागू होने वाले प्रतिबंधों/निषेधों से मुक्त रहेगा. भारत अपनी 'पड़ोसी पहल' नीति के एक अंग के रूप में मालदीव में मानव-केंद्रित विकास को समर्थन देने के प्रति दृढ़तापूर्वक प्रतिबद्ध है.
होर्मुज संकट के कारण बांग्लादेश की निकली चीख
Advertisement
इतना ही नहीं कुछ महीनों पहले तक भारत को आंख दिखाने वाले बांग्लादेश को भी भारत ने जरूरत के वक्त मदद भेजी है. होर्मुज का रास्ता बंद होने से उस पर तगड़ी मार पड़ी है. उसकी इकोनॉमी बुरी तरह प्रभावित हुई. आपको बताएं कि जंग के बाद तेल और गैस सप्लाई बाधित होने की वजह से उसके टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्ट की कमर टूट गई है. यूनिवर्सिटी बंद हैं और देश में व्यापक बिजली कटौती की जा रही है. इसके अलावा उसके पांच में से चार सरकारी उर्वरक कारखानों का संचालन भी ठप है.
बांग्लादेश की भी भारत ने सुनी गुहार, भेजी मदद
इसी कारण जब बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने मदद की गुहार लगाई तो भारत ने 2017 में शुरू हुई भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए हाईस्पीड डीजल की आपूर्ति बढ़ाई. बांग्लादेश को अधिकांश ईंधन असम के नुमालीगढ़ रिफाइनरी से भेजा जा रहा है. आपको बता दें कि भारत ने 10 मार्च को 5,000 टन डीजल भेजा, अगले सप्ताह 10,000 टन और भेजा जाएगा. जबकि 7,000 टन की एक नई खेप भी रवाना की जा रही है. इसके अलावा भारत ने नेपाल, श्रीलंका और भुटान को सप्लाई जारी रखी और डीजल-तेल की अतिरिक्त सप्लाई रवाना की है.
Advertisement
विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
यह भी पढ़ें
इसके अलावा, भारत ने मानवीय सहायता के तहत बुर्किना फासो को 1000 मीट्रिक टन चावल की खेप भेजी है. यह पहल ग्लोबल साउथ के देशों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है. विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में कहा, ''भारत ने मानवीय सहायता के तौर पर बुर्किना फासो को 1000 मीट्रिक टन चावल की एक खेप भेजी है. इसका उद्देश्य कमजोर समुदायों और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की खाद्य सुरक्षा में सहायता करना है. यह कदम 'ग्लोबल साउथ' के देशों के लिए एक भरोसेमंद विकास और मानवीय सहायता और आपदा राहत साझेदार के रूप में भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता.''