7 साल पहले, 7 जगह धमाके, 267 मौतें, 200 से 260 साल तक की सजा…श्रीलंका ईस्टर बम धमाका मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला
श्रीलंका में 7 साल पहले हुए ईस्टर बम धमाका मामले में एक श्रीलंकाई हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है.15 दोषियों को 200 से 260 साल तक की सजा सुनाई गई है. सारे आतंकी इस्लामिक स्टेट के थे और बगदादी के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी.
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श्रीलंका की एक हाईकोर्ट ने 2019 के ईस्टर संडे बम धमाकों के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने 15 लोगों को दोषी ठहराते हुए 200 से 260 साल तक जेल की सजा सुनाई है. इन धमाकों में 267 लोगों की मौत हुई थी और करीब 600 घायल हुए थे. अदालत ने दोषियों की संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया है.
ईस्टर बम धमाका मामले में सुनाई गई बड़ी सजा
श्रीलंका के प्रमुख दैनिक डेली मिरर ने बुधवार को प्रकाशित खबर में बताया कि तीन न्यायाधीशों की हाईकोर्ट पीठ ने मंगलवार को करीब पांच साल तक चले मुकदमे के बाद फैसला सुनाया. सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच अदालत परिसर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे.
ईस्टर संडे ब्लास्ट में 267 लोगों की मौत हुई थी
21 अप्रैल 2019 को ईस्टर के मौके पर श्रीलंका में तीन चर्चों और तीन प्रमुख होटलों को निशाना बनाकर आत्मघाती बम धमाके किए गए थे. इन हमलों में 42 विदेशी नागरिक भी मारे गए थे. हमले इस्लामिक स्टेट से प्रेरित श्रीलंका के दो स्थानीय इस्लामी उग्रवादी संगठनों से जुड़े बताए गए थे.
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किस आरोपी को कितने साल की सजा सुनाई गई?
अदालत ने दोषियों को उनकी भूमिका के आधार पर अलग-अलग सजा सुनाई. पांच लोगों को 200-200 साल, पांच को 220-220 साल, चार को 240-240 साल और एक व्यक्ति को 260 साल की सजा दी गई. अभियोजन पक्ष के अनुसार, सभी सात धमाकों (तीन चर्च, तीन होटल और एक मोटल में हुए विस्फोट) को सजा तय करते समय ध्यान में रखा गया.
25 आरोपियों पर दर्ज हुए 23,270 आरोप
मामले में 2021 में 25 आरोपियों के खिलाफ 23,270 आरोप दर्ज किए गए थे. इनमें हत्या, आतंकवादी साजिश और आग्नेयास्त्रों तथा विस्फोटकों से जुड़े अपराध शामिल थे. सुनवाई का सामना कर रहे 24 आरोपियों में से 15 को दोषी ठहराया गया, जबकि नौ को आरोप साबित नहीं होने पर बरी कर दिया गया. एक अन्य आरोपी की मुकदमा पूरा होने से पहले मौत हो गई थी.
जिन लोगों को दोषी ठहराया गया, उनमें से किसी को भी धमाकों में सीधे शामिल आत्मघाती हमलावर नहीं माना गया है, क्योंकि सभी हमलावर मारे गए थे. अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि हमले सुनियोजित थे और उनका उद्देश्य ईसाई श्रद्धालुओं के साथ ही पर्यटकों को निशाना बनाना था.
इस्लामिक स्टेट के प्रति निष्ठा की आतंकियों ने ली थी शपथ!
मामले में एक वीडियो भी अदालत के सामने रखा गया था, जिसे एक आत्मघाती हमलावर ने हमलों से एक दिन पहले रिकॉर्ड किया था. रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में हमलावरों ने चेहरे ढके हुए थे और उन्होंने तत्कालीन इस्लामिक स्टेट प्रमुख अबू बक्र अल-बगदादी के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी.
ईस्टर धमाकों के बाद श्रीलंका की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे. एक संसदीय समिति ने पाया था कि पुलिस और खुफिया अधिकारियों को हमलों की संभावित चेतावनी पहले मिल चुकी थी, लेकिन उस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई.
श्रीलंका ने अपने किन अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की?
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इसी मामले में जुलाई 2026 में श्रीलंका के एक पूर्व पुलिस प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को विदेशी खुफिया चेतावनियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं करने के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी. हालांकि, श्रीलंका में 1976 के बाद किसी व्यक्ति को फांसी नहीं दी गई है और वहां मौत की सजा आम तौर पर उम्रकैद में बदल जाती है.