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बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा ज़िया की तबीयत बिगड़ी, दिल और फेफड़ों में संक्रमण, ढाका के अस्पताल में भर्ती

खालिदा जिया मई 2025 में लंदन में चार महीने के चिकित्सा उपचार के बाद ढाका लौटी थीं. ढाका एयरपोर्ट पर उस समय बीएनपी महासचिव ने कहा था कि खालिदा जिया की वापसी “देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है.”

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया की तबीयत को “बेहद गंभीर” बताया और उनके जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना करने की अपील की.

पूर्व पीएम खालिदा जिया अस्पताल में भर्ती

ढाका में पत्रकारों से बात करते हुए, बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बताया कि पार्टी प्रमुख की स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “आप सभी जानते हैं कि हमारी नेता बेगम खालिदा जिया बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं. बीती रात डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत बहुत गंभीर है.”

दिल और फेफड़ों में संक्रमण

जानकारी के अनुसार, 23 नवंबर की रात खालिदा जिया को दिल और फेफड़ों में संक्रमण का पता चलने के बाद मेडिकल बोर्ड की सलाह पर ढाका के एक अस्पताल में भर्ती किया गया. वह निमोनिया से भी जूझ रही हैं और अभी अस्पताल के कोरोनरी केयर यूनिट (सीसीयू) में गहन निगरानी में हैं, जहां स्थानीय व विदेशी विशेषज्ञ डॉक्टर उपचार में लगे हुए हैं.

लंदन से लौटने के बाद बिगड़ी तबीयत

खालिदा जिया मई 2025 में लंदन में चार महीने के चिकित्सा उपचार के बाद ढाका लौटी थीं. ढाका एयरपोर्ट पर उस समय बीएनपी महासचिव ने कहा था कि खालिदा जिया की वापसी “देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है.”

इधर, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान के संभावित स्वदेश लौटने को लेकर भी चर्चा तेज है. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रमुख मामलों में बरी होने के बाद अब उनके सामने कानूनी बाधाएं लगभग न के बराबर हैं और वे दिसंबर के पहले सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के तुरंत बाद स्वदेश लौट सकते हैं.

भ्रष्टाचार मामले में सज़ा और रिहाई

गौरतलब है कि खालिदा जिया को 29 अक्टूबर 2018 को जिया चैरिटेबल ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में 7 वर्ष की जेल और 10 लाख टका के जुर्माने की सज़ा सुनाई गई थी. उन्हें पुराने ढाका सेंट्रल जेल में रखा गया था, लेकिन 5 अगस्त को ‘छात्र-नेतृत्व वाले जन आंदोलन’ में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद उनकी रिहाई सुनिश्चित की गई थी. बाद में अदालत ने भी उनकी सज़ाओं को रद्द कर दिया.

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