खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा चुने गए ईरान के सुप्रीम लीडर! जानें किसका है ईरानी इस्लामी शासन में दबदबा
Israel Iran War Live: ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई शनिवार को अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए हमलों में मारे गए. इसने इस्लामी शासन की नींव हिला दी है. सूत्रों के मुताबिक उनके दूसरे बेटे मोजतबा को उनका उत्तराधिकारी चुन लिया गया है.
Follow Us:
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की बीते दिन हुए अमेरिका और इजरायल के साझा हमले में मौत के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है. इसने शियाओं के सबसे बड़े और अगुआ देश ईरान में इस्लामी शासन या खामेनेई रिजीम की नींव हिला दी है. कहा जा रहा कि इसके बाद क्लेर्जी या में धार्मिक शासन के लिए पहले की तरह काम करना मुश्किल होगा. खामेनेई के निधन के बाद अब उनके वारिस की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि कहा जा रहा है कि खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया जाएगा, जिसका चयन संभवत: खामेनेई जीते जी किया गया था. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि उनकी ताजपोशी के बाद ही हो पाएगी.
खामेनेई ने जिस ईरान पर करीब तीन दशकों से अधिक समय तक शासन किया अब उसके लिए अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है. हालांकि IRGC पहले से मौजूद है, जो कि ईरानी सेना से ज्यादा ताकतवर, फ्रंट लाइन फोर्स और खामेनेई के वफादार फौज है, लेकिन सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी में वह कितना कारगर होगा ये देखने वाली बात होगी.
ईरान में सर्वोच्च लीडर का होना अनिवार्य!
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ईरान के संविधान में विलायत-ए-फकीह (इस्लामी न्यायविद का संरक्षण) के सिद्धांत के तहत सर्वोच्च नेता का धर्मगुरु होना अनिवार्य है. इस सिद्धांत के अनुसार, नौवीं शताब्दी में गुम हो चुके शिया मुस्लिम बारहवें इमाम के लौटने तक, सत्ता एक वरिष्ठ धार्मिक विद्वान के पास होनी चाहिए.
खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा को चुना गया सुप्रीम लीडर: सूत्र
खामेनेई और उनके गुरु, मौजूदा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के शासनकाल में सर्वोच्च नेता को राज्य के सभी मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार था, लेकिन इस व्यवस्था को पहले कभी ऐसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा था. खामेनेई का प्रभाव अक्सर उनके करीबी सलाहकारों के माध्यम से ही रहा है, लेकिन शनिवार के हमलों के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि उनके करीबी और वरिष्ठ सलाहकार में से कितने व्यक्ति जीवित बचे हैं.
हसन खुमैनी का नाम भी था चर्चा में!
खामेनेई के उत्तराधिकारी के संभावित उम्मीदवारों की बात करें तो उनके बेटे मोजतबा खामेनेई और इस्लामी गणराज्य के संस्थापक के पोते हसन खुमैनी का नाम कई मामले के जानकार और शिया धर्मगुरुओं द्वारा लिया गया था. इतना ही नहीं खामेनेई की विरासत को संभालने के लिए कई अन्य वरिष्ठ धर्मगुरुओं के नाम भी सामने आ रहे हैं.
रॉयटर्स की मानें तो वर्तमान में किसी भी शख्स के पास खामेनेई के समान अधिकार नहीं हैं. उनके उत्तराधिकारी को IRGC और वरिष्ठ धार्मिक निकायों जैसे शक्तिशाली संस्थानों पर नियंत्रण स्थापित करने में कठिनाई हो सकती है.
कौन थे ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामनेई, GFX के माध्यम से समझिए.#Iran #iranvsisrael #AyatollahKhamenei pic.twitter.com/Ggj6rJKgLP
— NMF NEWS (@nmfnewsofficial) March 1, 2026
क्या ईरान में धार्मिक शासन कायम रहेगा?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान का धार्मिक शासन देश के उन शक्तिशाली संस्थानों पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है जो राजनीतिक व्यवस्था के लगभग हर स्तर को प्रभावित करते हैं. इसमें सबसे टॉप में है ईरानी शासन के विशेषज्ञों की काउंसिल, जो वरिष्ठ अयातुल्लाहों का एक निकाय है और हर आठ साल में निर्वाचित होता है. संवैधानिक रूप से इस सभा को सर्वोच्च नेता की नियुक्ति का दायित्व सौंपा गया है. सैद्धांतिक रूप से उसे प्रश्न पूछने या बर्खास्त करने का अधिकार है, हालांकि खामेनेई के रहते इसने कभी भी इस शक्ति का प्रयोग नहीं किया.
ये भी पढ़ें: ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के हमले में मौत, ईरानी मीडिया ने की पुष्टि, 40 दिन के शोक का ऐलान
खामेनेई के उत्तराधिकार के संबंध में कोई भी निर्णय संभवतः इस्लामी गणराज्य के सबसे वरिष्ठ लोगों द्वारा लिया जाएगा. इसे औपचारिक रूप से सभा द्वारा अनुमोदित किया जाएगा. IRGC के कई शीर्ष नेताओं की हत्या के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रक्रिया में किसका अमल-दखल होगा.
गार्जियन काउंसिल का ईरान में दबदबा!
ईरान की गार्जियन काउंसिल जिसमें आधे सदस्य सर्वोच्च नेता और आधे न्यायपालिका प्रमुख द्वारा नियुक्त किए जाते हैं, संसदीय कानून को वीटो कर सकती है और उम्मीदवारों को चुनाव से अयोग्य घोषित कर सकती है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस अधिकार का अक्सर अली खामेनेई के आलोचकों को दरकिनार करने के लिए इस्तेमाल किया गया जाता था, उसकी भी भूमिका अहम होगी.
ईरान की न्यायपालिका इस्लामी कानून की शिया व्याख्याओं के तहत काम करती है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति सर्वोच्च नेता द्वारा की जाती है. वर्तमान प्रमुख, गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई, 2009 में प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई के कारण पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं.
यह भी पढ़ें
रॉयटर्स ने पूर्व न्यायपालिका प्रमुख सादिक लारीजानी, विशेषज्ञों की सभा के सदस्य मोहसेन अराकी और तेहरान के शुक्रवार की नमाज के अगुवा अहमद खातमी सहित अन्य प्रभावशाली धर्मगुरुओं को भी सत्ता परिवर्तन में संभावित भूमिका निभाने वालों के रूप में पहचाना है.
टिप्पणियाँ 0
कृपया Google से लॉग इन करें टिप्पणी पोस्ट करने के लिए
Google से लॉग इन करें