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ट्रंप के राइट हैंड विटकॉफ, दामद कुशनर की हुई ईरान से बैकडोर बात, वेंस भी तैयार बैठे...सीजफायर पर पर्दे के पीछे ये हो रहा

ईरान के साथ बातचीत की कमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के हाथों में है. वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी आगे की बातचीत के लिए तैयार रहने को कहा गया है.

Bagher Ghalibaf and Donald Trump (File Photo)
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ईरान के साथ एक महीने से भी ज्यादा समय से जंग में उलझा अमेरिका बेसब्री से सीजफायर चाह रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करीब 4 बार बातचीत और युद्धविराम की डेडलाइन दे चुके हैं और उसे बढ़ा चुके हैं. वहीं ईरानी रिजीम किसी भी डील, बैकचैनल टॉक से इनकार कर रहा है, अपनी शर्तें भी रख रहा है. उसका कहना है कि पहले उसकी मांगे मानीं जाए, तब ही वो कोई पहल आगे करेगा या होर्मुज को खोलने के बारे में सोचेगा. इसी को देखते हुए ट्रंप अब अधीर हो चुके हैं. बीते दिन जब उन्होंने 48 घंटे की नई समय सीमा तय की थी तो उनके मुंह से गाली तक निकल गई थी.

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभालेंगे बातचीत की कमान!

इसी बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को ईरान के साथ बातचीत और किसी भी संभावित डील को लेकर स्टैंडबाय यानी कि तैयार रहने को कहा गया है. यानी कि बैक चैनल बातचीत, पर्दे के पीछे की डीलिंग के बाद अगर मामला उच्च स्तरीय या सरकार के स्तर पर मुलाकातों पर पहुंचता है तो इसकी कमान वेंस संभालेंगे. 

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ख़बर के मुताबिक फिलहाल ईरान के साथ बातचीत की कोशिश राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद, इवांका के पति जेरेड कुशनर के नेतृत्व में चल रही है. दोनों ही यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने या किसी नतीजे तक पहुंचाने के लिए मॉस्को यानी की पुतिन से बातचीत कर रहे हैं. विटकॉफ की रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात का वीडियो भी सामने आ चुका है. यानी कि अगर मीडिया रिपोर्ट्स सच निकलती हैं कि विटकॉफ, कुशनर और ईरानी मजलिस के स्पीकर बघेर गलीबाफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीत संभावित डील से सीजफायर तक पहुंचा जा सकता है.

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समझौता नहीं होने पर मचेगी भीषण तबाही!

हालांकि इस बात की संभावनाएं कम हैं कि ईरान ऐसे किसी भी डील के लिए मानेगा जिससे कि लगे कि ईरान झुकता, पीछे हटता या हारता हुआ नजर आए. वहीं अगर ट्रंप की डेडलाइन के अनुसार बातचीत नहीं होती, कोई समझौता नहीं होता है और सीजफायर नहीं पाता है तो संभव है ट्रंप ईरान के पुलों और पावर प्लांट को निशाना बनाएंगे, जिसके बाद ये जंग अगले दौर में पहुंच जाएगी. फिर ईरान भी खाड़ी के देशों के पावर, ऑयल प्लांट्स के अलावा पानी की पाइपलाइन पर हमले करेगा, जिससे कि पूरे मिडिल ईस्ट में पीने वाले पानी के लिए हाहाकार मच सकता है. इससे भारी तबाही की आशंका है.

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कौन कर रहा बैकचैनल बातचीत?

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक फिलहाल बातचीत बैकचैनल और मीडिएटर्स के ज़रिए चल रही है. अगर कुछ समझौते की संभावना दिखती है तो  US के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरानी नेताओं, अधिकारियों से सीधी बात करेंगे और मुलाकातें भी संभव है.

सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि 'वेंस को तैयार रहने के लिए कहा गया है.' POLITICO की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी नेता के दामाद जेरेड कुशनर ईरान के साथ बातचीत में शामिल हैं. अगर इन दोनों के लेवल पर कुछ सेटलमेंट होती है तो आगे वेंस को भी इसमें शामिल किया जा सकता है."

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ईरान ने अमेरिका के सामने 10 प्वाइंट प्रस्ताव पेश किया

इसी बीच ख़बर सामने आ रही है कि ईरान ने अमेरिका के 15 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और कहा है कि वह संघर्ष का स्थायी अंत चाहता है. सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, ईरान ने इसके जवाब में 10 बिंदुओं का एक दस्तावेज़ पेश किया. 

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, ईरान ने अपने पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि वह सिर्फ युद्धविराम (सीजफायर) को स्वीकार नहीं करेगा. इस जवाब में ईरान की कई मांगें रखी गई हैं, जैसे क्षेत्रीय संघर्षों को खत्म करना, होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना, युद्ध से प्रभावित इलाकों का पुनर्निर्माण करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाना.

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आईआरएनए ने बताया कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में दिया गया, जब ईरान के पश्चिमी और मध्य इलाकों में हालात बदले हैं और अमेरिका का एक हेलीकॉप्टर ऑपरेशन सफल नहीं रहा. साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तय की गई समय सीमा को फिर बढ़ा दिया और अपने पुराने रुख में कुछ बदलाव किया. सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने ईरान के 10 बिंदुओं वाले जवाब को “एक अहम कदम” बताया, लेकिन कहा कि यह “पर्याप्त नहीं है.”

अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से भेजा था 15 बिंदुओं का प्रस्ताव

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि सीज़फ़ायर से विरोधियों को सिर्फ़ फिर से संगठित होने और और ज़्यादा अपराध करने का समय मिल जाएगा, और "कोई भी समझदार" व्यक्ति इसे स्वीकार नहीं करेगा. मार्च के आखिर में अमेरिकी मीडिया ने खबर दी थी कि अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 बिंदुओं का प्रस्ताव भेजा था, ताकि युद्ध खत्म किया जा सके. बाद में ईरान ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि यह “ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बनाया गया है और जमीनी हकीकत से जुड़ा नहीं है.”

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ईरान ने शांति के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं. इनमें अमेरिका और इजराइल के हमलों को रोकना, भविष्य में हमले रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाना, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई करना, पश्चिम एशिया में सभी मोर्चों पर लड़ाई बंद करना और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना शामिल है. 

ट्रंप ने ईरान पर हमलों की नई समयसीमा तय की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समझौता करने के लिए अंतिम समयसीमा दी है और चेतावनी दी है कि अगर बातचीत विफल होती है तो व्यापक सैन्य कार्रवाई की जाएगी. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह कदम उठाया गया है, जिसका वैश्विक ऊर्जा और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.  उन्होंने कहा, “उनके पास कल तक का समय है और जोड़ा कि कूटनीति की गुंजाइश तेजी से खत्म हो रही है. इसके अलावा ट्रंप ने ये भी कहा कि बातचीत जारी है लेकिन अनिश्चित बनी हुई है. उन्होंने आगे कहा कि “हमें लगता है कि वे ईमानदारी से बातचीत कर रहे हैं…हमें जल्द ही पता चल जाएगा.”

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हम ईरान को पूरी तरह हिला कर रख देंगे: ट्रंप

इसके साथ ट्रंप ने साफ किया कि सैन्य विकल्प अब भी खुले हैं. “हम उन्हें बुरी तरह हिला सकते हैं,” उन्होंने कहा, संभावित अमेरिकी कार्रवाई के पैमाने को रेखांकित करते हुए. उन्होंने यह भी जोड़ा कि संभावित लक्ष्यों के मामले में “बहुत कम चीजें सीमा से बाहर हैं,” जिससे संकेत मिलता है कि यदि ईरान ने पालन नहीं किया तो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर भी हमला किया जा सकता है.

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राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना अमेरिका की मांगों का एक प्रमुख हिस्सा है. “उस समझौते का एक हिस्सा यह होगा कि हम तेल और अन्य चीजों की मुक्त आवाजाही चाहते हैं.” उन्होंने कहा, और होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे ऊर्जा मार्गों के रणनीतिक महत्व की ओर इशारा किया. ट्रंप ने हालिया अमेरिकी अभियानों के बाद ईरान को कमजोर बताया. उन्होंने कहा, “उनके पास नौसेना नहीं है… उनके पास वायु सेना नहीं है… उनके पास वायु रक्षा प्रणाली नहीं है.” हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि असममित खतरे अब भी मौजूद हैं.

ट्रंप की कैरेट और स्टीक पॉलिसी !

ये टिप्पणियां दबाव और कूटनीति के मिश्रण को दर्शाती हैं, जहां अमेरिका रियायतें हासिल करने की कोशिश कर रहा है, साथ ही हमलों को तेज करने का विकल्प भी खुला रख रहा है. ट्रंप ने कहा कि कई देश इस संकट के समाधान के प्रयासों में लगे हुए हैं. “इस युद्ध से बहुत से लोग प्रभावित हो रहे हैं.” 

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यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव रखती है, खासकर यदि तनाव के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों में बाधा आती है, जो तेल आपूर्ति की एक प्रमुख धुरी है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि सीमित कदम, जैसे समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाना, भी यातायात रोक सकते हैं और व्यापक आर्थिक असर पैदा कर सकते हैं.

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28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमला किया था. इस हमले में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए. इसके जवाब में ईरान ने मध्य पूर्व में इजराइल और अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए.

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