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सीजफायर के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की हुंकार, कहा- अमेरिका को झुका दिया, इस्लामी गणराज्य विजयी रहा

ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद लागू हुए युद्धविराम के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से बयान दिया है. ईरानी सरकारी टेलीविजन पर टेलिकास्ट किए गए एक वीडियो संदेश में खामेनेई ने कहा, “इस्लामी गणराज्य विजयी रहा और बदले में अमेरिका के चेहरे पर तमाचा मारा.” उन्होंने यह बयान युद्धविराम लागू होने के बाद दिया है.

ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद लागू हुए युद्धविराम के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से बयान दिया है. खामेनेई ने दावा किया कि इस टकराव में ईरान ने इजरायल पर जीत दर्ज की है और अमेरिका को भी “करारा जवाब” दिया है. हालांकि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरान पर जीत का दावा किया था. 

ईरानी सरकारी टेलीविजन पर टेलिकास्ट एक वीडियो संदेश में खामेनेई ने कहा, “इस्लामी गणराज्य विजयी रहा और बदले में अमेरिका के चेहरे पर तमाचा मारा.” उन्होंने यह बयान युद्धविराम लागू होने के के बाद दिया है. यह बयान मुख्य रूप से उन मीडिया रिपोर्ट्स के बीच आया है, जिनमें कहा गया था कि ईरान ने सोमवार को कतर स्थित अमेरिका के अल-उदीद एयरबेस पर मिसाइल हमला किया था. हालांकि, इस हमले में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है.

अमेरिका पर खामेनेई का तीखा हमला
युद्धविराम के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस संघर्ष में ईरान की “विजय” का दावा किया, वहीं अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वॉशिंगटन को इस युद्ध से कोई लाभ नहीं हुआ. उन्होंने अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, “अमेरिका ने केवल इसलिए हस्तक्षेप किया क्योंकि उसे लगा कि अगर उसने हस्तक्षेप नहीं किया, तो इजरायल पूरी तरह तबाह हो जाएगा.” उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की मध्यस्थता केवल इजरायल को बचाने की एक रणनीति थी, न कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने की.

13 जून से सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं दिखे थे खामेनेई
खामेनेई 13 जून को इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं. इससे पहले वे करीब दो सप्ताह तक सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह गायब थे, जिससे उनके स्वास्थ्य और गतिविधियों को लेकर अटकलें भी तेज़ थीं. संघर्ष की शुरुआत 13 जून को उस समय हुई थी जब इजरायल ने ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों और शीर्ष सैन्य वैज्ञानिकों व अधिकारियों को निशाना बनाते हुए एक बड़ा सैन्य हमला किया था. इन हमलों को तेहरान ने “युद्ध की घोषणा” माना और इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की श्रृंखला शुरू की. उस दौरान ईरानी सूत्रों के हवाले से खबरें थीं कि खामेनेई सुरक्षा कारणों से एक “गुप्त स्थान” पर थे. हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं की गई थी.

युद्ध के दौरान भी खामेनेई ने दिया था वीडियो संदेश 
यह खामेनेई का युद्धविराम के बाद दूसरा सार्वजनिक संदेश था. इससे पहले 19 जून को उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसे उनके सुरक्षित बंकर से रिकॉर्ड किया गया था. उस समय उनका सार्वजनिक जीवन से दूर रहना सुरक्षा कारणों से माना जा रहा था. गुरुवार को जारी वीडियो संदेश की घोषणा पहले से ही ईरानी सरकारी टेलीविजन और खामेनेई के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कर दी गई थी. इस तरह की पूर्व घोषणा से यह स्पष्ट था कि ईरानी नेतृत्व इस संदेश को एक रणनीतिक और प्रतीकात्मक अवसर के रूप में पेश कर रहा है. अपने संबोधन में खामेनेई ने कहा, “यह एक ऐतिहासिक पल है जिसमें इस्लामी गणराज्य ने अपने दुश्मनों को स्पष्ट संदेश दिया है. हम इजरायल और उसके समर्थकों को दिखा चुके हैं कि ईरान पीछे हटने वाला नहीं है.” उन्होंने जनता को इस “विजय” के लिए धन्यवाद देते हुए ईरान की एकता और ताकत की प्रशंसा की.

तनाव कम, लेकिन बयानबाज़ी जारी
बताते चलें कि युद्धविराम से क्षेत्र में तत्काल संघर्ष भले ही थम गया हो, लेकिन ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से आ रहे इस तरह के बयान यह संकेत दे रहे हैं कि भू-राजनीतिक तनाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. जानकारों की माने तो, खामेनेई के इस बयान का उद्देश्य घरेलू समर्थन मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की भूमिका को कटघरे में खड़ा करना है.

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