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चुनाव खत्म होते ही ₹25 महंगे हो जाएंगे पेट्रोल और डीजल? सरकार ने बताई वायरल हो रही खबर की सच्चाई

Petrol-Diesel Price: देश में पेट्रोल और डीजल के दाम अचानक 25 रुपए से 28 रूपये तक बढ़ा दिए जाएंगे. जाहिर है, इतनी बढ़ी बढ़ोतरी कि बात सुनकर कोई  भी परेशान हो जाएगा.

Image Source: Canva
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Petrol-Diesel Price: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक खबर बहुत तेजी से फ़ैल रही है, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है. कहा जा रहा था कि जैसे ही पश्चिमी बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव खत्म होंगे, वैसे ही देश में पेट्रोल और डीजल के दाम अचानक 25 रुपए से 28 रूपये तक बढ़ा दिए जाएंगे. जाहिर है, इतनी बढ़ी बढ़ोतरी कि बात सुनकर कोई  भी परेशान हो जाएगा. क्योंकि इसका असर सीधे हर घर बजट पर पड़ता है.  लेकिन सच्चाई क्या है ? क्या सच में ऐसा होने वाला है ?

सरकार ने साफ कहा - यह पूरी तरह फेक न्यूज है

इस वायरल खबर पर खुद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सामने आकर पूरी स्थिति साफ कर दी है. मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी को लेकर कोई भी प्रस्ताव फिलहाल सरकार के पास नहीं है. यानि जो बातें सोशल मीडिया पर घूम रही हैं, वे सिर्फ अफवाह हैं, हकीकत नहीं. सरकार का कहना है कि इस तरह की खबरें लोगों में डर और घबराहट फैलाने के लिए जानबूझकर फैलाई जाती हैं, ताकि भ्रम का माहौल बने.

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अफवाह की जड़ क्या है?

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दरअसल, इस खबर की शुरुआत एक कथित रिपोर्ट से हुई, जिसमें कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत $120 प्रति बैरल के पार चली गई है. अब जब वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है, तो यह अंदेशा जरूर बनता है कि भारत में भी कीमतें बढ़ सकती हैं. इसी आधार पर कुछ लोगों ने अंदाजा लगाकर बड़ी बढ़ोतरी की बात फैला दी।लेकिन संभावना  और फैसला इन दोनों में बहुत फर्क होता है. अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है.

सरकार का दावा - 4 साल में नहीं बढ़े दाम

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सरकार ने अपनी सफाई में यह भी बताया कि पिछले चार सालों में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी उतार-चढ़ाव आने के बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखा गया है. सरकार और तेल कंपनियां मिलकर ऐसे कदम उठाती रही हैं ताकि वैश्विक महंगाई का पूरा बोझ सीधे आम लोगों पर न पड़े.

आखिर ऐसी अफवाहें फैलती क्यों हैं?

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चुनाव के समय इस तरह की बातें अक्सर सामने आती हैं. कई लोग यह मान लेते हैं कि चुनाव खत्म होते ही सरकार या कंपनियां नुकसान की भरपाई के लिए कीमतें बढ़ा देंगी. ऊपर से जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो ये अटकलें और तेज हो जाती हैं, लेकिन हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं है. कई बार ये सिर्फ अनुमान होते हैं, जो बाद में अफवाह बन जाते हैं.

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