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फूल, गुब्बारे और मोमबत्तियों से सजाया ट्रेन का केबिन, अब जानिए कितनी हो सकती है सजा और क्या है नियम
Indian Railway Rules: फर्स्ट एसी कोच की बर्थ को बिना अनुमति ऑनलाइन डेकोरेटर बुलाकर हनीमून सुइट की तरह सजाने और मोमबत्ती जलाने का वीडियो वायरल हुआ है. नियमों के उल्लंघन पर रेलवे ने टीटीई को सस्पेंड कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं.
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Indian Railway Rules: भारतीय रेलवे अक्सर किसी न किसी वजह से चर्चा में रहता है, लेकिन इस बार मामला सुरक्षा से जुड़ा है. महाराष्ट्र के बल्हारशाह से मुंबई के दादर के बीच चलने वाली नंदीग्राम एक्सप्रेस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच का एक केबिन किसी लग्जरी होटल के हनीमून रूम की तरह सजा हुआ दिखाई देता है. जैसे ही यह वीडियो रेलवे अधिकारियों तक पहुंचा, पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई और ड्यूटी पर मौजूद टीटीई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.
फूल, गुब्बारे और मोमबत्तियों से सजा दिया पूरा केबिन
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि फर्स्ट एसी के एक पूरे केबिन को रंग-बिरंगे गुब्बारों, ताजे फूलों और खूबसूरत सजावट से पूरी तरह बदल दिया गया था. सीट पर लाल गुलाब की पंखुड़ियों से दिल का आकार बनाया गया था, जिससे ऐसा लग रहा था मानो किसी होटल का हनीमून सुइट तैयार किया गया हो.
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि केबिन के अंदर मोमबत्तियां और दीपक भी जलाए गए थे. चलती ट्रेन में इस तरह आग जलाना बेहद खतरनाक माना जाता है, क्योंकि इससे आग लगने जैसी बड़ी दुर्घटना हो सकती थी.
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नवविवाहित जोड़े ने प्राइवेट डेकोरेटर से करवाई थी सजावट
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रेलवे की शुरुआती जांच में सामने आया कि ट्रेन में सफर कर रहे एक नवविवाहित जोड़े ने अपनी यात्रा को खास बनाने के लिए ऑनलाइन एक निजी डेकोरेशन एजेंसी की सेवा ली थी. डेकोरेटर स्टेशन पर ट्रेन के अंदर पहुंचा और बिना रेलवे की आधिकारिक अनुमति के पूरे केबिन को सजा दिया.
रेलवे का कहना है कि न तो इस सजावट की कोई अनुमति ली गई थी और न ही सुरक्षा नियमों का पालन किया गया. यही वजह है कि इस मामले को गंभीर सुरक्षा चूक माना गया.
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लापरवाही पर TTE हुआ सस्पेंड
वीडियो वायरल होने के बाद रेलवे प्रशासन तुरंत हरकत में आया. जांच में पाया गया कि ड्यूटी पर मौजूद ट्रेन टिकट परीक्षक (TTE) इस अनधिकृत गतिविधि को रोकने में असफल रहे. इसके बाद संबंधित टीटीई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. रेलवे ने पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि बिना अनुमति बाहरी व्यक्ति ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच तक कैसे पहुंचा और इतनी बड़ी सजावट कैसे कर दी गई.
क्या कहते हैं रेलवे के नियम?
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भारतीय रेलवे के नियम काफी स्पष्ट हैं. बिना अनुमति किसी बाहरी व्यक्ति को ट्रेन के कोच में व्यावसायिक काम के लिए प्रवेश देना नियमों का उल्लंघन माना जाता है. इसी तरह ट्रेन के अंदर मोमबत्ती, दीपक या किसी भी तरह की आग जलाना भी पूरी तरह प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है. रेलवे अधिनियम के तहत ऐसी लापरवाही पर जुर्माना, जेल और विभागीय कार्रवाई तक का प्रावधान है.
किन लोगों पर हो सकती है कार्रवाई?
इस तरह के मामले में सिर्फ रेलवे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
यात्री जिन्होंने बिना अनुमति ट्रेन में सजावट करवाई.
डेकोरेटर या एजेंसी, जिसने रेलवे की अनुमति के बिना कोच में प्रवेश कर व्यावसायिक काम किया.
रेलवे कर्मचारी, यदि उन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कराया या लापरवाही बरती.
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क्या हो सकती है सजा?
रेलवे अधिनियम के अनुसार बिना अनुमति ट्रेन में व्यावसायिक गतिविधि करना अपराध है. इसके लिए जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है. अगर कोई व्यक्ति ट्रेन के अंदर मोमबत्ती या अन्य ज्वलनशील वस्तु जलाता है, जिससे आग लगने का खतरा पैदा होता है, तो उसके खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई हो सकती है. ऐसी स्थिति में दोषी को जेल की सजा, जुर्माना और किसी भी नुकसान की भरपाई भी करनी पड़ सकती है. इसके अलावा अगर किसी की हरकत से दूसरे यात्रियों की सुरक्षा या सुविधा प्रभावित होती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
सुरक्षा नियमों से समझौता नहीं
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इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि यादगार पल बनाने की कोशिश में सुरक्षा नियमों की अनदेखी करना भारी पड़ सकता है. ट्रेन में सफर कर रहे सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होती है. ऐसे में बिना अनुमति सजावट कराना या आग जैसी खतरनाक चीजों का इस्तेमाल करना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बड़ी दुर्घटना की वजह भी बन सकता है. रेलवे ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता न हो.