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अब पहाड़ों की ट्रिप पड़ेगी जेब पर भारी, 1 अप्रैल से नए टोल रेट लागू

New Toll Tax: राज्य में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक और कारोबारी वाहन आते हैं. ऐसे में सरकार ने टोल दरों में बदलाव कर राजस्व बढ़ाने का फैसला लिया है. हालांकि, नई दरों से बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को पहले की तुलना में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे.

अब पहाड़ों की ट्रिप पड़ेगी जेब पर भारी, 1 अप्रैल से नए टोल रेट लागू
Image Source: Social Media

Himachal New Toll Tax: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों के लिए टोल टैक्स की नई दरें घोषित कर दी हैं. यह नई टोल पॉलिसी 2026-27 के तहत लाई गई है और 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी. यह नियम खासतौर पर उन वाहनों पर लागू होगा जो दूसरे राज्यों से हिमाचल में एंट्री करते हैं. सरकार का कहना है कि इससे राज्य की आय बढ़ेगी और सड़कों व अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.

राज्य में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक और कारोबारी वाहन आते हैं. ऐसे में सरकार ने टोल दरों में बदलाव कर राजस्व बढ़ाने का फैसला लिया है. हालांकि, नई दरों से बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को पहले की तुलना में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे.

निजी कार, जीप और SUV पर कितना टोल लगेगा?

नई पॉलिसी के मुताबिक अब बाहर के राज्यों से आने वाली कार, जीप, वैन और लाइट मोटर व्हीकल पर 170 रुपये प्रति दिन टोल देना होगा. कुछ श्रेणियों में यह दर 130 रुपये भी बताई जा रही है, लेकिन ज्यादातर रिपोर्ट्स में प्राइवेट कार और SUV के लिए 170 रुपये तय माना जा रहा है.
12+1 सीटिंग (ड्राइवर सहित) तक के प्राइवेट पैसेंजर वाहनों पर भी यही दर लागू होगी. इसका मतलब है कि परिवार के साथ घूमने आने वाले टूरिस्ट्स को अब हर दिन के हिसाब से 170 रुपये अतिरिक्त देने होंगे. पहले यही टोल करीब 70 रुपये था, यानी अब इसमें लगभग ढाई गुना तक बढ़ोतरी हो गई है.

बस और ट्रकों के लिए ज्यादा बढ़ा शुल्क

नई टोल दरों में बस और ट्रकों पर भी बढ़ोतरी की गई है. 12+1 से ज्यादा और 32+1 सीटिंग तक की पैसेंजर गाड़ियों, मिनी बस और लाइट कमर्शियल व्हीकल से अब 200 से 320 रुपये प्रति दिन लिए जाएंगे.

वहीं 32+1 से ज्यादा सीटिंग वाली बड़ी बसों और दो एक्सल तक के ट्रकों पर 250 से 570 रुपये तक टोल लगेगा. कुछ खबरों में कमर्शियल बसों के लिए यह राशि 600 रुपये तक बताई गई है.

तीन एक्सल वाले कमर्शियल वाहनों को अब 600 रुपये रोजाना चुकाने होंगे. इसके अलावा भारी निर्माण मशीनें, अर्थ मूविंग इक्विपमेंट और 4 से 6 एक्सल वाले मल्टी एक्सल वाहनों से 800 रुपये प्रति दिन वसूले जाएंगे. 7 या उससे ज्यादा एक्सल वाले बड़े और ओवरसाइज्ड ट्रकों को 900 रुपये रोजाना टोल देना होगा. साफ है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ आम पर्यटकों पर ही नहीं, बल्कि कंस्ट्रक्शन और ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर भी असर डालेगी.

ट्रैक्टर और ऑटो रिक्शा के लिए अलग नियम

नई पॉलिसी में ट्रैक्टर और ऑटो रिक्शा के लिए भी अलग-अलग दरें तय की गई हैं. अगर कोई गैर-हिमाचली ट्रैक्टर परमिट के साथ राज्य में आता है, तो उसे 100 रुपये प्रति दिन टोल देना होगा. वहीं बाहर के राज्यों के मोटर रिक्शा और स्कूटर रिक्शा से 30 रुपये रोजाना वसूले जाएंगे.
हालांकि टोल बैरियर के आसपास रहने वाले स्थानीय हिमाचली वाहनों के लिए रियायत दी गई है. ऐसे वाहनों से 100 रुपये प्रति दिन टोल लिया जाएगा, जो कि बाहरी वाहनों की तुलना में कम माना जा रहा है.

सरकार का क्या है तर्क?

सरकार का कहना है कि नई दरों से राज्य के राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी होगी. इस अतिरिक्त आय का इस्तेमाल सड़कों की मरम्मत, नई सड़कें बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने में किया जाएगा. चूंकि हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है, यहां सड़कों के रखरखाव पर काफी खर्च आता है. ऐसे में सरकार मानती है कि टोल बढ़ाना जरूरी कदम है.

हालांकि, टूरिज्म और ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों का मानना है कि बढ़ी हुई दरों से यात्रियों और व्यापार पर असर पड़ सकता है. अब देखना होगा कि नई टोल पॉलिसी लागू होने के बाद इसका राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर क्या प्रभाव पड़ता है.

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