Kedarnath Temple Yatra 2026: केदारनाथ धाम में नई व्यवस्था लागू, नकद भुगतान पर पूरी तरह रोक

Kedarnath Temple Yatra 2026: हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस यात्रा में बड़ी संख्या में लोग गौरीकुंड से ऊपर तक जाने के लिए घोड़े-खच्चरों का सहारा लेते हैं. इसी को देखते हुए प्रशासन ने इस बार साफ कह दिया है कि बिना बीमा, बिना फिटनेस जांच और बिना पंजीकरण कोई भी घोड़ा-खच्चर यात्रा मार्ग पर नहीं चल सकेगा.

Kedarnath Temple Yatra 2026: केदारनाथ धाम में नई व्यवस्था लागू, नकद भुगतान पर पूरी तरह रोक
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Kedarnath Temple 2026: आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले Kedarnath Temple की यात्रा जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे तैयारियां भी तेज और सख्त होती जा रही हैं. हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस यात्रा में बड़ी संख्या में लोग गौरीकुंड से ऊपर तक जाने के लिए घोड़े-खच्चरों का सहारा लेते हैं. इसी को देखते हुए प्रशासन ने इस बार साफ कह दिया है कि बिना बीमा, बिना फिटनेस जांच और बिना पंजीकरण कोई भी घोड़ा-खच्चर यात्रा मार्ग पर नहीं चल सकेगा.

26 फरवरी से शुरू होगा विशेष महाअभियान

पशुपालन विभाग 26 फरवरी से एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है. यात्रा शुरू होने से करीब डेढ़ महीने पहले ही सभी घोड़े-खच्चरों की पूरी जांच की जाएगी. इसमें उनका हेल्थ चेकअप, बीमा और रजिस्ट्रेशन शामिल होगा.

होली तक तीन से चार विशेष कैंप लगाए जाएंगे. उसके बाद छुट्टियों के बाद फिर से अभियान चलाया जाएगा. पशुपालकों को ज्यादा परेशानी न हो, इसलिए रोज़ दो कैंप अलग-अलग जगहों पर लगाए जाएंगे. इन कैंपों में एक ही स्थान पर सारी प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी, ताकि लोगों को बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें. प्रशासन का लक्ष्य है कि यात्रा शुरू होने से पहले 100 प्रतिशत घोड़े-खच्चरों का सत्यापन और बीमा पूरा कर लिया जाए.

ऑनलाइन होगा बीमा भुगतान

इस बार एक बड़ा बदलाव यह है कि बीमा प्रीमियम का भुगतान सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से ही होगा. कैंपों में नकद लेन-देन पूरी तरह बंद रहेगा.
प्रशासन का मानना है कि ऑनलाइन भुगतान से पारदर्शिता बढ़ेगी और गड़बड़ी की संभावना कम होगी. साफ शब्दों में कहा गया है कि अगर किसी पशु के पास वैध दस्तावेज और ऑनलाइन भुगतान की रसीद नहीं होगी, तो उसे यात्रा मार्ग पर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी.

क्यों जरूरी है फिटनेस और बीमा?

गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक का रास्ता काफी कठिन और चढ़ाई वाला है. हजारों श्रद्धालु इस पूरे मार्ग में घोड़े-खच्चरों पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में अगर पशु बीमार या कमजोर हुआ तो हादसे का खतरा बढ़ सकता है.पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव गोयल ने बताया कि सभी पशुओं का स्वस्थ और सक्षम होना बेहद जरूरी है. बीमा होने से किसी भी दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक नुकसान से भी बचाव होगा. उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि वे समय पर कैंप में पहुंचकर सभी औपचारिकताएं पूरी करें.

‘सुरक्षा सर्वोपरि’ का संदेश

चारधाम यात्रा को लेकर इस बार प्रशासन पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है. सुरक्षा, पारदर्शिता और अनुशासन पर खास ध्यान दिया जा रहा है. घोड़े-खच्चरों का यह महाअभियान साफ दिखाता है कि 2026 की केदारनाथ यात्रा को ‘सुरक्षा सर्वोपरि’ के मंत्र के साथ आयोजित किया जाएगा. इस बार यात्रा में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होगी. श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पशुओं की सेहत दोनों को बराबर महत्व दिया जा रहा है, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो सके.

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