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हाईवे पर सफर हुआ सस्ता! टोल वसूली का नियम बदला, अब जेब पर पड़ेगा कम बोझ

NHAI: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों में संशोधन किया है, जिसके बाद ऐसे हाईवे पर टोल की गणना पहले के मुकाबले अधिक संतुलित और व्यावहारिक तरीके से होगी

Image source: Canva( Representative Image)
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NHAI: अगर आप अक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग या एक्सप्रेसवे पर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए किसी राहत से कम नहीं है. लंबे समय से वाहन चालकों की यह शिकायत रही कि जिन रास्तों में बड़े-बड़े पुल, लंबी सुरंगें, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड बने हैं, वहां टोल टैक्स जरूरत से ज्यादा वसूला जाता है. अब सरकार ने इस समस्या को समझते हुए नियमों में बड़ा बदलाव किया है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों में संशोधन किया है, जिसके बाद ऐसे हाईवे पर टोल की गणना पहले के मुकाबले अधिक संतुलित और व्यावहारिक तरीके से होगी.. इसके साथ ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को नए नियमों के अनुसार टोल दरों की समीक्षा और संशोधन शुरू करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं. इसका सीधा फायदा उन करोड़ों लोग को मिलेगा जो रोजाना या नियमित रूप से हाईवे पर यात्रा करते है...

आखिर पुराने नियम में दिक्कत क्या थी?

अब तक लागू नियम के अनुसार यदि किसी हाईवे पर लंबा पुल, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड होती थी, तो उसकी वास्तविक लंबाई से 10 गुना दूरी के आधार पर टोल की गणना की जाती थी. यानी अगर किसी सड़क पर 5 किलोमीटर लंबी सुरंग बनी है, तो टोल तय करते समय उसे 50 किलोमीटर सड़क के बराबर माना जाता था. यही वजह थी कि पहाड़ी इलाकों, बड़े शहरों के एलिवेटेड कॉरिडोर और लंबे एक्सप्रेसवे पर लोगों को काफी अधिक टोल देना पड़ता था. कई बार वाहन चालकों को लगता था कि वे जितनी दूरी तय कर रहे हैं, उसके मुकाबले कहीं ज्यादा टोल चुका रहे हैं. सरकार ने इसी असंतुलन को दूर करने के लिए नया फॉर्मूला लागू किया है.

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नया टोल फॉर्मूला क्या है? 

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सरकार ने अब टोल की गणना के लिए दो अलग-अलग तरीके तय किए हैं और सबसे अच्छी बात यह है कि इनमें से जो दूरी कम होगी, उसी के आधार पर टोल वसूला जाएगा. पहले तरीके में हाईवे पर बने सभी विशेष ढांचों जसे ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड की कुल लंबाई को 10 से गुणा किया जाएगा और फिर उसमें सामान्य सड़क की लंबाई जोड़ दी जाएगी.

दूसरे तरीके में पूरे हाईवे सेक्शन की कुल लंबाई को 5 से गुणा किया जाएगा

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इसके बाद दोनों गणनाओं की तुलना होगी और जो आंकड़ा कम निकलेगा, उसी दूरी के हिसाब से टोल तय किया जाएगा. यानी अब हर स्थिति में लोगों को कम दूरी वाले फॉर्मूले का लाभ मिलेगा. इसके अलावा सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि 60 मीटर या उससे कम लंबाई वाले पुल या फ्लाईओवर को विशेष संरचना नहीं माना जाएगा, इसलिए उन पर अलग से अतिरिक्त गणना लागू नहीं होगी.

आम लोगों को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

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इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो रोजाना या अक्सर लंबे पुलों, सुरंगों और एलिवेटेड हाईवे वाले मार्गों से सफर करते हैं.अब टोल की गणना पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और तर्कसंगत होगी. इससे अनावश्यक अतिरिक्त टोल का बोझ कम होगा और यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला खर्च भी घटेगा. खासतौर पर पहाड़ी राज्यों, बड़े शहरों और आधुनिक एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए यह फैसला राहत देने वाला साबित हो सकता है. सरकार का उद्देश्य भी यही है कि हाईवे का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तो मिले, लेकिन उसकी कीमत आम लोगों पर जरूरत से ज्यादा बोझ बनकर न पड़े..

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