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Yogi Cabinet: 'एक जनपद-एक व्यंजन' योजना लागू, नई ट्रांसफर पॉलिसी को भी मंजूरी

CM Yogi: फैसलों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने, किसानों को राहत, युवाओं के कौशल विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर रहा. इनमें एक महत्वपूर्ण निर्णय ‘एक जनपद-एक व्यंजन (ओडीओसी)’ योजना का रहा, जिसे प्रदेश की नई पहचान के रूप में विकसित करने की तैयारी है.

Image Source: CM Yogi
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सोमवार को कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. फैसलों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने, किसानों को राहत, युवाओं के कौशल विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर रहा. इनमें एक महत्वपूर्ण निर्णय ‘एक जनपद-एक व्यंजन (ओडीओसी)’ योजना का रहा, जिसे प्रदेश की नई पहचान के रूप में विकसित करने की तैयारी है. इसके साथ ही कैबिनेट ने सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए नई ट्रांसफर पॉलिसी को भी मंजूरी दे दी है.

‘एक जनपद एक व्यंजन’- हर जिले का स्वाद बनेगा ब्रांड

एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि सरकार ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ की तर्ज पर ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना को मंजूरी दी है. इसके तहत हर जिले के पारंपरिक व्यंजन को चिह्नित कर उसकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा. योजना में गुणवत्ता सुधार, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और निर्यात अवसर विकसित करने पर विशेष फोकस रहेगा. खाद्य कारोबार से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को 25% तक की सब्सिडी (अधिकतम ₹20 लाख) दी जाएगी. इसके लिए ₹150 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है. आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा व जौनपुर की इमरती जैसे व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है..

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ट्रांसफर पॉलिसी 2026-27- 31 मई तक होंगे स्थानांतरण

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कैबिनेट बैठक में अधिकारियों/कर्मचारियों की नई स्थानांतरण नीति 2026-27 को मंजूरी दी गई है. इसके तहत, सभी ट्रांसफर 31 मई 2026 तक किए जाएंगे। नीति के तहत समूह ‘क’ व ‘ख’ के ऐसे अधिकारी, जिन्होंने किसी जनपद में 3 वर्ष या मंडल में 7 वर्ष पूरे कर लिए हैं, उनका स्थानांतरण अनिवार्य होगा, जबकि विभागाध्यक्ष/मंडलीय कार्यालय में तैनाती की अवधि इसमें शामिल नहीं होगी. मंडलीय कार्यालय में तैनाती की अधिकतम अवधि 3 वर्ष होगी. समूह ‘क’ व ‘ख’ के स्थानांतरण संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20% और समूह ‘ग’ व ‘घ’ के कार्मिकों के स्थानांतरण संवर्गवार कार्यरत कुल कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10% की सीमा तक किए जा सकेंगे. समूह ‘ख’ व ‘ग’ के ट्रांसफर यथासंभव मेरिट आधारित ऑनलाइन प्रणाली से होंगे तथा समूह ‘ग’ में पटल/क्षेत्र परिवर्तन के नियमों का कड़ाई से पालन होगा. दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को सुविधा अनुसार तैनाती, आकांक्षी जनपदों में प्राथमिकता पोस्टिंग और स्थानांतरण सत्र के बाद समूह ‘क’ व ‘ख’ के ट्रांसफर हेतु मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री की स्वीकृति अनिवार्य जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं.

पीडब्ल्यूडी में सख्ती - गुणवत्ता से समझौता नहीं

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लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कार्यों की गुणवत्ता सुधारने और अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर रोक लगाने के लिए कैबिनेट ने निविदा निस्तारण की नई प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है.  इसके तहत ₹5 करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लिए एसबीडी और ₹5 करोड़ से कम के कार्यों के लिए टी-1 व टी-2 प्रणाली लागू होगी. कम दर पर टेंडर लेने वाले निविदादाताओं से अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी अनिवार्य की गई है. 15% से अधिक कम दर वाले ठेकेदारों के चयन से पहले उनके निर्माणाधीन और पूर्ण कार्यों की गुणवत्ता की जांच होगी, जबकि 15% से कम दर पर बोली लगाने वाले ऐसे ठेकेदार जिनका प्रदेश में कोई कार्य नहीं चल रहा या पिछले दो वर्षों में कोई कार्य पूरा नहीं किया है, उनसे भी अतिरिक्त सिक्योरिटी ली जाएगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित होगा.

किसानों को राहत: हाईटेंशन लाइनों पर बढ़ा मुआवजा

कैबिनेट ने बिजली की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. टावर के नीचे आने वाली जमीन पर अब 200% मुआवजा मिलेगा, जबकि लाइन के नीचे आने वाली जमीन पर 30% मुआवजा दिया जाएगा. इससे किसानों को कुल मिलाकर 21% से 33% तक अधिक लाभ मिलेगा.

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टेक्सटाइल पार्क से औद्योगिक विकास को रफ्तार

संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के तहत प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्कों का विकास किया जाना है. इसके लिए बंद पड़ी कताई मिलों की जमीन का उपयोग किया जाएगा. कैबिनेट ने 4 कताई मिलों की 251.8 एकड़ भूमि का हस्तकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग के पक्ष में निशुल्क हस्तांतरण की मंजूरी दी. इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.

लखनऊ में 546 करोड़ की सड़क परियोजना

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राजधानी लखनऊ में आउटर रिंग रोड के रैथा अंडरपास से पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क तक 6 लेन के निर्माण तथा आईआईएम से रैथा अंडरपास मार्ग का 2 लेन में चौड़ाकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए ₹546.51 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी गई है. इससे टेक्सटाइल पार्क की कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ ही औद्योगिक विकास एवं परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी.

अन्य अहम फैसले

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कैबिनेट ने 35 करोड़ पौधरोपण अभियान (₹147 करोड़ बजट), प्रत्येक जिले में वन ट्रिलियन डॉलर सीएम फेलोशिप कार्यक्रम के तहत एक ओटीडी फेलो (आर्थिक विकास) एवं एक ओटीडी फेलो (डेटा विश्लेषण) की तैनाती,  नए निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 का प्रवर्तन, फिरोजाबाद में निजी अमरदीप विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी और हाईकोर्ट रिसर्च एसोसिएट का कार्यकाल 2 से बढ़ाकर अधिकतम 3 वर्ष करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए हैं.

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