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केंद्रीय बजट से UP की छात्राओं को मिली बड़ी सौगात, सभी 75 जिलों में खुलेंगे गर्ल्स हॉस्टल

UP: उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और यहां कुल 75 जिले हैं. ऐसे में हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल बनने से हजारों छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए अपने जिले या आसपास पढ़ाई करने का सुरक्षित और सस्ता विकल्प मिलेगा, जिससे उनका आगे पढ़ने का रास्ता और आसान हो जाएगा.

Image Source: Social Media
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UP Girls Hostels: उत्तर प्रदेश की छात्राओं के लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट में एक बहुत ही राहत देने वाली घोषणा की है. इस फैसले के तहत देश के हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल बनाया जाएगा. ये हॉस्टल खास तौर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित यानी एसटीईएम संस्थानों से जुड़े होंगे. उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और यहां कुल 75 जिले हैं. ऐसे में हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल बनने से हजारों छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए अपने जिले या आसपास पढ़ाई करने का सुरक्षित और सस्ता विकल्प मिलेगा, जिससे उनका आगे पढ़ने का रास्ता और आसान हो जाएगा.

उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी और बढ़ेगी

वर्तमान में प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 54.76 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या छात्राओं की है, करीब 29.80 लाख छात्राएं कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रही हैं. सरकार का मानना है कि गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा मिलने से यह संख्या आने वाले समय में और बढ़ेगी. अक्सर देखा गया है कि दूर शहरों में रहने और सुरक्षा की चिंता के कारण कई बेटियां आगे की पढ़ाई नहीं कर पातीं. अब जिले स्तर पर हॉस्टल बनने से माता-पिता निश्चिंत होकर बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए भेज सकेंगे.

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केंद्र सरकार देगी 40 से 80 प्रतिशत तक आर्थिक मदद

केंद्र सरकार राज्यों को गर्ल्स हॉस्टल बनाने के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण यानी वीजीएफ योजना और पूंजीगत सहायता के माध्यम से आर्थिक सहयोग देगी. इसके तहत हॉस्टल निर्माण की कुल लागत का 40 से 80 प्रतिशत तक खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी. इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ कम पड़ेगा और हॉस्टल निर्माण का काम तेजी से पूरा किया जा सकेगा. खासकर एसटीईएम संस्थानों में पढ़ने और शोध करने वाली छात्राओं को अब रहने की सुविधा न मिलने की समस्या से राहत मिलेगी.

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रिसर्च और साइंस में बेटियों को मिलेगा नया अवसर

अब तक हॉस्टल की सुविधा न होने के कारण कई छात्राओं को साइंस, टेक्नोलॉजी और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने में दिक्कत आती थी. हॉस्टल बनने से छात्राएं न सिर्फ पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे पाएंगी, बल्कि रिसर्च और तकनीकी शिक्षा में भी अपना भविष्य बेहतर ढंग से बना सकेंगी. पढ़ाई के साथ सुरक्षित रहने की सुविधा मिलने से छात्राओं का रुझान एसटीईएम विषयों की ओर तेजी से बढ़ेगा और देश को भविष्य में ज्यादा महिला वैज्ञानिक और इंजीनियर मिल सकेंगी.

माता-पिता की चिंता होगी कम, छात्राओं को सीधा लाभ

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उत्तर प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मौलीन्दु मिश्रा का कहना है कि अभी बड़ी संख्या में माता-पिता बेटियों को बड़े शहरों में महंगे निजी गर्ल्स हॉस्टलों में रखकर पढ़ाने से बचते हैं. इसकी वजह खर्च और सुरक्षा दोनों होती है. अब हर जिले में सरकारी गर्ल्स हॉस्टल बनने से छात्राओं को सीधा फायदा मिलेगा. विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की मेरिट सूची में पहले से ही छात्राओं का दबदबा रहता है. हॉस्टल की सुविधा मिलने से मेधावी छात्राएं अपने जिले और आसपास के अच्छे उच्च शिक्षण संस्थानों में आसानी से दाखिला ले सकेंगी, जिससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और शिक्षा का स्तर और बेहतर होगा.

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