Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

टिहरी का अनोखा शक्तिधाम: जहां मूर्ति नहीं, श्री यंत्र की होती है पूजा, जानिए मां चंद्रबदनी मंदिर की खास मान्यता

माता सती को समर्पित चंद्रबदनी मंदिर कुंजापुरी और सुरकंडा मंदिर के बाद टिहरी का तीसरा शक्ति पीठ है. मंदिर के गर्भ गृह में माता की मूर्ति के स्थान पर एक श्री यंत्र है, जिसे कपड़े के छत्र के नीचे रखा गया है. मं

Image Credit: Facebook/Pushkar Singh Dhami
Loading Ad...

उत्तराखंड की वादियों में देवियां वास करती हैं, जिनमें हर एक का अपना अलग महत्व और मान्यता है. ऐसी ही एक पवित्र और मनोकामना पूर्ति देवी हैं, मां चंद्रबनदनी. इस मंदिर में मूर्ति की जगह श्री यंत्र की पूजा की जाती है.

मूर्ति की जगह होती है श्री यंत्र की पूजा

टिहरी जिले में समुद्र तल से लगभग 2277 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम है.

Loading Ad...

राधाष्टमी पर बन रहा खास संयोग... 19 सितंबर को ऐसे करें राधा रानी की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Loading Ad...

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी साझा किया मंदिर का वीडियो

मंदिर को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का खास वीडियो पोस्ट कर लिखा, "जनपद टिहरी गढ़वाल में मां चंद्रबदनी मंदिर है, जो शक्ति पूजा का एक बड़ा केंद्र है. यहां आस्था, प्रकृति और दिव्यता का अनोखा संगम देखने को मिलता है. चारों ओर फैली हिमालय की शानदार पहाड़ियां इस जगह को एक अलग ही दुनिया जैसा एहसास देती हैं. यहां हर पल आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है. आप भी टिहरी गढ़वाल आने पर इस पवित्र मंदिर में जरूर माथा टेकें."

Loading Ad...

हिमालय की चोटियों का दिखता है अद्भुत नजारा

यहां से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों और घने जंगलों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है, जो हर भक्त के मन को मोह लेता है.

Loading Ad...

सती के धड़ से जुड़ी है पौराणिक मान्यता

माता सती को समर्पित चंद्रबदनी मंदिर कुंजापुरी और सुरकंडा मंदिर के बाद टिहरी का तीसरा शक्ति पीठ है. मंदिर के गर्भ गृह में माता की मूर्ति के स्थान पर एक श्री यंत्र है, जिसे कपड़े के छत्र के नीचे रखा गया है. मंदिर के पुजारी और सभी श्रद्धालु इस यंत्र की उपासना एवं पूजा कर माता का आशीर्वाद लेते हैं. इस यंत्र के अतिरिक्त मंदिर में अन्य देवी देवताओ क मूर्ति भी स्थापित की गई है.

सोने का मुकुट, चेन से लेकर मोदक तक... लालबागचा राजा को क्यों चढ़ाते हैं ये चीजें?

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

ऊंचाई पर स्थित होने के चलते मंदिर से नजदीकी क्षेत्रों का बेहद ही विहंगम नजारा दिखाई पड़ता है. दूर केदारनाथ और बद्रीनाथ पर्वत की डर्फ से ढकी चोंटिया बेहद ही उम्दा और आकर्षक दिखाई पड़ती है. टिहरी के जामनीखाल गांव में स्थित यह मंदिर श्रीनगर से 52 किमी और टिहरी से लगभग 57 किमी की दूरी पर है. मंदिर तक पहुंचने का रास्ता एक किमी के ट्रेक से गुजरता है. पुराणों के अनुसार जब माता सती का धड़ इस थान पर गिरा था उस दौरान माता के कुछ त्रिशूल और मुर्तिया भी गिरी थी, जिसके चलते यहाँ आज भी त्रिशूल और माता की मुर्तिया मंदिर के आस पास देखी जाती है.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...