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बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर CM शुवेंदु एक्शन शुरू, मालदा में शुरू हो गया होल्डिंग सेंटर, 30 दिन के अंदर होंगे डिपोर्ट

बंगाल में शुवेंदु सरकार ने घुसपैठियों की धरपकड़ शुरू कर दी है. इसी कड़ी में राज्यभर में होल्डिंग सेंटर स्थापित किए जाने लगे हैं और उनमें बांग्लादेशियों की भर्ती भी हो रही है. इन्हें 30 दिन के अंदर डिपोर्ट कर दिया जाएगा.

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26 May 2026
( Updated: 26 May 2026
10:58 AM )
बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर CM शुवेंदु एक्शन शुरू, मालदा में शुरू हो गया होल्डिंग सेंटर, 30 दिन के अंदर होंगे डिपोर्ट
Image Source: IANS/ Screengrab (X)
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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार आने के बाद घुसपैठियों की धरपकड़ शुरू हो गई है. सीएम शुवेंदु ने पार्टी के वादे और संकल्प पत्र को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है. चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह, पीएम मोदी सहित पूरी पार्टी ने वादा किया था कि उनकी सरकार आने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर किया जाएगा और इस संबंध में कार्रवाई शुरू भी कर दी गई है.

मालदा में घुसपैठियों के लिए होल्डिंग सेंटर शुरू

इसी सिलसिले में पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में राज्य का पहला होल्डिंग सेंटर शुरू ऑपरेशनल यानी कि शुरू कर दिया गया है. आपको बता दें कि ये होल्डिंग सेंटर इंग्लिश बाजार के चंदन पार्क में बनाया गया है. इसमें अवैध तरीके से भारत में रह रहे बांग्लादेशियों को रखा जाएगा. इतना ही नहीं रविवार को तीन महिलाओं और छह बच्चों सहित कुल 9 लोगों को इस सेंटर में रखा गया था. आपको बता दें कि अवैध तरीके से रह रहे, घुसे, पकड़े गए विदेशी नागरिकों को पकड़कर रखने के लिए बनाए गए एक खास जगह और निर्धारित केंद्र को होल्डिंग सेंटर कहा जाता है.

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ना सिर्फ मालदा बल्कि इंग्लिश बाजार शहर के चंदन पार्क इलाके में स्थापित यह होल्डिंग ना सिर्फ जिले का बल्कि राज्य का पहला सेंटर है जहां बांग्लादेशी घुसपैठियों को रखा जाएगा. इससे पहले ममता सरकार में घुसपैठ रोकने और बढ़ावा देने की नीति को लेकर काफी आरोप-प्रत्यारोप होता था. आपको बता दें कि ये सभी लोग मालदा जिले के गजोल पुलिस स्टेशन के पांडुआ इलाके से पकड़े गए थे. पकड़े जाने के बाद इन्हें इसी नए होल्डिंग सेंटर में भेज दिया गया.

कैसा है सुरक्षा का इंतजाम?

अवैध तरीके से रह रहे विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट करने तक रखने के लिए बनाए गए होल्डिंग सेंटर में सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. चप्पा-चप्पा पर निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है. पूरे परिसर पर मजबूत सुरक्षा पहरा है. चारों तरफ सुरक्षा के लिहाज से CCTV कैमरे लगाए गए हैं. पुलिस किसी भी हलचल पर पैनी नजर रख रही है. सेंटर को चलाने और सुरक्षित रखने के लिए एक टीम की तैनाती की गई है. इस टीम में 12 पुलिसकर्मी, 3 सिविल डिफेंस के वॉलंटियर, 3 आम नागरिक वॉलंटियर हैं. इतना ही नहीं इन लोगों के खान-पान की भी व्यवस्था की गई है, जिसके लिए एक रसोइया भी है जो वहां रह रहे लोगों के लिए खाना बनाएगा.

3D नीति के तहत काम कर रही शुवेंदु सरकार

आपको बता दें कि इस पूरी कवायद को शुवेंदु सरकार की उस नई डिटेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट यानी कि 3D नीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत अवैध घुसपैठियों से वॉर लेवल पर निपटा जाएगा और उन्हें वापस भेजने तक एक नियत जगह पर रखा जाएगा.

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खबर के मुताबिक यह कदम राज्य गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग की ओर से जारी उस निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसके तहत सभी जिला प्रशासन को ‘पकड़े गए विदेशियों’ और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे विदेशी कैदियों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाने का निर्देश जारी किया गया था.

सीएम शुवेंदु ने दिया था घुसपैठियों पर बड़ा बयान!

कुछ दिनों पहले सीएम शुवेंदु अधिकारी का बड़ा बयान दिया था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते, उन्हें घुसपैठिया माना जाएगा और राज्य पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर BSF को सौंपेगी. 

BSF के हाथ में डिपोर्टेशन पावर!

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सरकार घुसपैठ के मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है. अब सीमा सुरक्षा बल यानी कि BSF, बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स BBG के साथ मिलकर कर डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी करेगी. इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध विदेशी नागरिकों को ज्यादा से ज्यादा 30 दिनों तक ऐसे सेंटर में रखा जाएगा है, जहां उनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच की जाएगी. इतना ही नहीं पुलिस को भी नए कानून के तहत विशेष अधिकार दिया गया है.

पुलिस के पास बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार!

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नई इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर पाएगी. इसके अलावा बायोमेट्रिक डेटा संग्रह, रिकॉर्ड अपलोड और केंद्रीय डेटाबेस से सत्यापन की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी. हालांकि केंद्र सरकार ने एक अलग आदेश में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों को राहत दी हुई है, बशर्ते वे 31 दिसंबर 2024 से पहले भारत आए हों.

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