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छात्र आंदोलन का समर्थन पड़ा भारी... पटना में लालू के बड़े लाल तेजप्रताप यादव गिरफ्तार, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए जेल
NEET आंदोलन की गूंज बिहार तक पहुंची. छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन करना लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव को भारी पैड गया. शनिवार की देर शाम तेजप्रताप यादव गिरफ्तार हुए और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
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नीट पेपर लीक मामले को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भले ही राजधानी दिल्ली में आंदोलन शांत हो गया हो, लेकिन इसकी गूंज बिहार तक पहुंच गई. पटना में छात्रों के समर्थन में हुए प्रदर्शन ने अचानक राजनीतिक रंग ले लिया और इसका सबसे बड़ा असर जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के प्रमुख तेजप्रताप यादव पर पड़ा. शनिवार देर रात पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया. इस कार्रवाई के बाद बिहार की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है.
तेजप्रताप यादव पर कौन-कौन सी धाराएं लगीं?
पटना पुलिस के अनुसार तेजप्रताप यादव पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 और धारा 307 जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. धारा 307 हत्या की कोशिश से जुड़ी मानी जाती है, जबकि मामला गांधी मैदान थाने में दर्ज हुआ है. तेजप्रताप के वकील जगन्नाथ सिंह का कहना है कि उन्हें सिर्फ गिरफ्तारी मेमो दिया गया है. अब तक एफआईआर की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है. ऐसे में बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं.
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बिहार बंद के दौरान कैसे बिगड़े हालात?
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शनिवार को छात्र संगठनों ने NEET पेपर लीक, छात्रों पर लाठीचार्ज और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर बिहार बंद का आह्वान किया था. इस बंद को राष्ट्रीय जनता दल, वीआईपी, वाम दलों और महागठबंधन के अन्य सहयोगी दलों का भी समर्थन मिला. सुबह से ही पटना समेत कई जिलों में छात्र सड़कों पर उतरने लगे. दोपहर होते-होते प्रदर्शन ने बड़ा रूप ले लिया. जेपी गंगा पथ की ओर से करीब दो हजार छात्र-छात्राएं गांधी मैदान के पास पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी. जब पुलिस ने रामगुलाम चौक पर उन्हें आगे बढ़ने से रोका तो दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और हालात संभालने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े.
प्रदर्शन हिंसक क्यों हो गया?
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पुलिस कार्रवाई के बाद कुछ प्रदर्शनकारी उग्र हो गए. कई स्थानों पर पुलिस पर ईंट-पत्थर फेंके गए. एक गश्ती वाहन को पलट दिया गया और सड़क किनारे खड़ी कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई. एक्जीबिशन रोड, फ्रेजर रोड और गांधी मैदान के आसपास लंबे समय तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा. सुरक्षा के मद्देनजर कई दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए और यातायात भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ. झड़प के दौरान कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए. पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी.
क्यों हुई तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी?
पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान तेजप्रताप यादव पर छात्रों को उकसाने का आरोप लगाया गया है. पहले उन्हें दोपहर में हिरासत में लिया गया था, लेकिन हालात सामान्य होने पर छोड़ दिया गया. बाद में शाम को जब वह सिटी सेंटर मॉल की ओर गए तो पुलिस ने दोबारा उन्हें पकड़ लिया. पहले दीघा थाने और फिर नौबतपुर थाने ले जाया गया. देर रात औपचारिक गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया गया.
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पटना में पूरे दिन हाई अलर्ट
बिहार बंद को देखते हुए पुलिस मुख्यालय पहले से अलर्ट पर था. डाकबंगला चौराहा, गांधी मैदान, जेपी गोलंबर, फ्रेजर रोड और आसपास के इलाकों को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था. अलग-अलग रास्तों से आने वाले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई. कई जगह पुलिस और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पटना से कुल 209 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया. राजद विधायक गौतम कृष्णा समेत करीब 60 लोगों को हिरासत में लिया गया. पुलिस ने 209 नामजद और करीब 2200 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है.
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बहरहाल, तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति को नई दिशा दे दी है. एक तरफ विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कार्रवाई बता रहा है, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया. आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और पुलिस जांच इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी. फिलहाल इतना तय है कि NEET पेपर लीक से शुरू हुआ आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि बिहार की राजनीति में भी बड़ा विवाद बन चुका है.