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पुणे में छात्रों ने किया खूंखार नक्सली हिडमा के गाने पर डांस, गुणगान करने पर मचा बवाल, अब हुआ एक्शन

नवंबर 2025 में खूंखार नक्सली कमांडर माडवी हिडमा मारा गया था. वह बस्तर के जंगलों में लाल आतंक का खौफनाक चेहरा था.

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18 Apr 2026
( Updated: 18 Apr 2026
12:05 PM )
पुणे में छात्रों ने किया खूंखार नक्सली हिडमा के गाने पर डांस, गुणगान करने पर मचा बवाल, अब हुआ एक्शन
Representative Image By Canva
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महाराष्ट्र इन दिनों काफी चर्चा में है, अब यहां पुणे मे दो छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है, क्योंकि ये छात्र मारे गए नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के गाने पर डांस कर रहे थे.

निर्दोष लोगों की हत्या करने वाले, बस्तर के जंगलों को दहलाने वाले, सैन्य बलों को निशाना बनाने वाला खूंखार नक्सली माडवी हिडमा मारा गया, लेकिन मानों उसका भूत लोगों में सवार हो गया. पुणे के दो छात्रों ने हिडमा की प्रशंसा या महिमामंडन करने वाले गाने पर डांस किया. जिसके बाद उन पर एक्शन हो गया. 

क्या और कहां का है पूरा मामला? 

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जानकारी के मुताबिक, यह घटना पुणे के विश्रांतवाड़ी इलाके की है. जहां 11 अप्रैल को डॉ बाबासाहेब अंबेडकर सरकारी हॉस्टल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ था. इसी कार्यक्रम में दो छात्रों ने 'ओ रे बंदूक वाले' गाने पर डांस किया था.

पुलिस के मुताबिक, यह गाना कथित तौर पर मारे गए नक्सली कमांडर माडवी हिडमा की तारीफ करता है. सोशल मीडिया पर इस डांस का वीडियो वायरल होने के बाद बवाल मच गया. कई संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई. इसके बाद पुलिस ने वीडियो की पुष्टि की. फिर दोनों छात्रों के खिलाफ विश्रांतवाड़ी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 197(1) (दुश्मनी बढ़ाना), 353 (सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयान) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है. फिलहाल पुलिस अब इस मामले में आगे की जांच कर रही है. 

इन दोनों छात्रों की उम्र 22 और 23 साल बताई जा रही है. छात्र महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के रहने वाले हैं. दोनों पुणे के एक नामी कॉलेज से पढ़ाई कर रहे हैं और सरकारी हॉस्टल में रहते हैं. 

हॉस्टल प्रशासन ने क्या कहा? 

पूरे मामले पर प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा, छात्रों ने अनजाने में यह गाना चुना, क्योंकि उन्हें धुन अच्छी लगी. हालांकि पुलिस ने छात्रों के इस कदम को देश की एकता और संप्रभुता के खिलाफ खतरा माना है. 

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कौन था माडवी हिडमा? 

हिडमा का असली नाम संतोष था. साल 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा में उसका जन्म हुआ था. वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की सबसे घातक हमलावर यूनिट पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन नंबर 1 का प्रमुख था. इस संगठन का वह इकलौता आदिवासी नेता माना जाता था. धीरे-धीरे उसने नक्सलवाद में खुदको इस तरह से लिप्त कर दिया कि लाल आतंक का आका कहलाने लगा और टॉप कमांडर का दर्जा हासिल कर लिया. 

यह भी पढ़ें- माडवी हिड़मा: 76 जवानों का हत्यारा, कांग्रेस के काफिले को खून से रंगा… सबसे खूंखार नक्सली की क्रूर कहानियां

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हिडमा प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी का बड़ा नेता था. उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम था. उसने पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई बड़े हमले किए थे. नवंबर 2025 में आंध्र प्रदेश में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में वह मारा गया था. 

पॉल्यूशन के विरोध में प्रदर्शन, लहराए गए हिडमा के पोस्टर 

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पुणे का मामला ऐसा पहला नहीं है जब माडवी हिडमा का महिमामंडन किया गया है. इससे पहले दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था, लेकिन ये प्रदर्शन उस वक्त विवादों में आ गया. जब कुछ छात्र हाथ में हिडमा के पोस्टर लेकर पहुंचे. उन्होंने हिडमा को जल, जंगल, जमीन का नेता बताया. 

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