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UP के लोगों के लिए गुड न्यूज! 18 शहरों में चलेंगी 1725 इलेक्ट्रिक बसें, तीन नए शहरों के विकास को भी मिली मंजूरी

UP: इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरों में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाना, यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है. सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रदूषण में कमी आएगी और लोगों को सुरक्षित व आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा.

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04 Jun 2026
( Updated: 04 Jun 2026
04:40 PM )
UP के लोगों के लिए गुड न्यूज! 18 शहरों में चलेंगी 1725 इलेक्ट्रिक बसें, तीन नए शहरों के विकास को भी मिली मंजूरी
Image Source: UP Information Department
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CM Yogi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की शहरी परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाला बड़ा फैसला लिया गया. राज्य सरकार ने 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल के तहत 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना को मंजूरी दे दी है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरों में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाना, यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है. सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रदूषण में कमी आएगी और लोगों को सुरक्षित व आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा.

किन शहरों को मिलेगा लाभ

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा (जेवर सहित) में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1725 एयर कंडीशंड ई-बसें चलाई जाएंगी. इन शहरों में बढ़ती आबादी और यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बसों का संचालन किया जाएगा, जिससे लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.

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निजी कंपनियां संभालेंगी संचालन और रखरखाव

जीसीसी मॉडल के तहत बसों की खरीद, चार्जिंग स्टेशन और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण, ड्राइवरों और तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति, बसों का संचालन तथा रखरखाव पूरी तरह निजी ऑपरेटरों की जिम्मेदारी होगी. राज्य सरकार निर्धारित मानकों के आधार पर इन कंपनियों को संचालन एवं अनुरक्षण शुल्क का भुगतान करेगी. बसों के संचालन के लिए किए जाने वाले अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 वर्ष तय की गई है. इससे सरकार को बेहतर सेवाएं मिलने के साथ-साथ परिचालन संबंधी जिम्मेदारियों से भी राहत मिलेगी.

बसों पर मिलेगा सरकारी अनुदान

योजना को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार निजी ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगी. इसके तहत प्रत्येक 12 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस पर 35 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा. सरकार का उद्देश्य है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़े और बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन आसान हो सके.

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डिपो के लिए मुफ्त मिलेगी जमीन

परियोजना के सुचारू संचालन के लिए बस डिपो और चार्जिंग सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा. इसके लिए संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा आवश्यक भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी. वहीं बसों का किराया और अन्य उपयोगकर्ता शुल्क राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएंगे ताकि यात्रियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और सेवाएं सभी वर्गों के लिए सुलभ बनी रहें.

सार्वजनिक परिवहन को मिलेगी नई मजबूती

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सरकार का मानना है कि इस परियोजना से प्रदेश के शहरों में सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा. इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण कम होगा, ईंधन पर निर्भरता घटेगी और यात्रियों को समयबद्ध, सुरक्षित तथा आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा. इसके अलावा निजी निवेश के जरिए सरकारी वित्तीय भार भी कम होगा और उत्तर प्रदेश में आधुनिक शहरी परिवहन प्रणाली को नई मजबूती मिलेगी. वर्तमान में प्रदेश के 15 नगर निगम क्षेत्रों में नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है, और नई योजना के लागू होने के बाद यह संख्या काफी बढ़ जाएगी.

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