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PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सपा की जीत, लाल बिहारी यादव ने शिक्षक MLC सीट पर मारी बाजी; स्नातक सीट पर मतगणना जारी

वाराणसी में शिक्षक एमएलसी सीट पर सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की. पहली वरीयता में उन्हें 10,958 वोट मिले, जबकि बीजेपी के प्रमोद कुमार मिश्रा को 6,060 और बीजेपी के बागी चेत नारायण सिंह को 3,111 वोट मिले. दूसरी वरीयता की गिनती के बाद लाल बिहारी यादव विजयी घोषित हुए.

Image Source: Screenrgab
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 UP MLC Result 2026: उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के नतीजों के लिए वोटों की गिनती लगातार जारी है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सत्ताधारी बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज कर अपनी सीट बरकरार रखी है. उन्होंने बीजेपी के प्रत्याशी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को पीछे छोड़ दिया. इस नतीजे के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. वहीं, वाराणसी की स्नातक एमएलसी सीट पर भी सपा और बीजेपी के बीच मुकाबले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

लाल बिहारी यादव ने कितने वोटों से दर्ज की जीत?

शिक्षक एमएलसी सीट की मतगणना में लाल बिहारी यादव ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी. पहली वरीयता के वोटों की गिनती में उन्हें 10,958 मत मिले, जबकि बीजेपी के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 6,060 वोट प्राप्त हुए. इस चरण में सपा प्रत्याशी ने 4,898 वोटों की बढ़त बना ली थी. हालांकि, पहली वरीयता में लाल बिहारी यादव को जीत के लिए जरूरी 11,472 वोट नहीं मिले थे. ऐसे में दूसरी वरीयता के मतों की गिनती की गई. इसके बाद उन्हें विजेता घोषित किया गया. अंतिम नतीजों को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में जीत के अंतर के आंकड़े अलग-अलग हैं, इसलिए सटीक अंतर की पुष्टि आधिकारिक परिणाम से करना जरूरी है. 

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बीजेपी के लिए क्यों अहम है यह नतीजा?

वाराणसी शिक्षक सीट पर बीजेपी की हार के पीछे उम्मीदवारों के बीच वोटों का बंटवारा भी चर्चा में है. बीजेपी के आधिकारिक प्रत्याशी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा के अलावा अन्य उम्मीदवारों को भी पर्याप्त वोट मिले. इससे मुकाबले का गणित प्रभावित हुआ. पहली वरीयता की गिनती में सपा प्रत्याशी को 10,958 वोट मिले, जबकि बीजेपी प्रत्याशी 6,060 वोटों पर सिमट गए. अन्य उम्मीदवारों के वोट भी चुनावी तस्वीर का अहम हिस्सा रहे. हालांकि, केवल वोटों के बंटवारे को हार का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा. इसके लिए शिक्षकों की प्राथमिकताओं, उम्मीदवारों के समर्थन और चुनावी परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है.

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दूसरी वरीयता के वोटों से कैसे तय होती है जीत?

विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया आम चुनाव से अलग होती है. इसमें मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवारों को पहली, दूसरी और आगे की वरीयता देते हैं. सबसे पहले पहली वरीयता के मतों की गिनती होती है. यदि कोई प्रत्याशी निर्धारित जीत का कोटा हासिल नहीं करता, तो नियमों के अनुसार आगे की वरीयताओं के मतों की गणना की जाती है. इसी प्रक्रिया के जरिए अंतिम विजेता तय होता है. वाराणसी शिक्षक सीट पर भी दूसरी वरीयता की गिनती के बाद नतीजा घोषित हुआ.

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लाल बिहारी यादव ने शिक्षकों के समर्थन को बताया जीत की वजह

जीत के बाद लाल बिहारी यादव ने इसे पार्टी नेतृत्व और शिक्षकों के समर्थन से जुड़ी सफलता बताया. उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं और सरकार की नीतियों को लेकर अपनी बात रखी. उनके अनुसार, शिक्षकों की नाराजगी ने चुनाव में अहम भूमिका निभाई. 

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बताते चलें कि अब इस नतीजे को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है. हालांकि, शिक्षक एमएलसी चुनाव का परिणाम अपने आप में विधानसभा चुनाव के नतीजों का संकेत नहीं माना जा सकता. यह चुनाव शिक्षकों के मुद्दों और उनके प्रतिनिधित्व से जुड़ा था. वाराणसी की शिक्षक सीट पर सपा की जीत ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है. अब निगाहें स्नातक एमएलसी सीट के अंतिम परिणाम और दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों पर हैं.

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