शिवराज सिंह चौहान का राहुल गांधी पर हमला, बोले- राम का विरोध करने वाले अब शिव की बारात की बात कर रहे
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे कथित नेतृत्व संघर्षों को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने उत्तर प्रदेश में पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद, पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष बदलने और अन्य राज्यों में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान का उल्लेख किया.
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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार चुनावों में हार का सामना करने के बाद अपनी विफलताओं का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ रही है. कांग्रेस की हार का कारण चुनाव आयोग नहीं बल्कि पार्टी का वैचारिक रूप से कमजोर और दिशाहीन नेतृत्व है. शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग पूरे जीवन राम का विरोध करते थे अब शिव की बारात की बात कर रहे है. जब प्रदेश में इनकी सरकार थी तो ये लोग कपड़े की तरह मुख्यमंत्री भी बदल देते थे.
शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती रही है. अब स्थिति ऐसी हो गई है कि चुनाव में हार मिलने पर संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराना पार्टी की आदत बन गई है. लगातार चुनाव हारने के बाद कांग्रेस विरोध-प्रदर्शन और आंदोलनों के जरिए अपनी हताशा जाहिर करती है.
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केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए असम, त्रिपुरा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश का जिक्र किया. उन्होंने सवाल उठाया कि इन राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहा और पार्टी को लगातार चुनावी चुनौतियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है.
चौहान ने कहा कि एक के बाद एक चुनाव हारना और फिर सड़कों पर उतरकर विरोध करना कांग्रेस की नियति बन गई है. पार्टी को अपनी हार के कारणों की समीक्षा करनी चाहिए, न कि इसके लिए चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को दोष देना चाहिए.
कांग्रेस की रणनीति पर भाजपा का हमला
उन्होंने कहा, "कांग्रेस की हार का कारण चुनाव आयोग नहीं है. कांग्रेस की हार का कारण स्वयं कांग्रेस का विचारशून्य नेतृत्व है. पार्टी का नेतृत्व देश, यहां के लोगों और उनकी परंपराओं को समझने में विफल रहा है."
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे कथित नेतृत्व संघर्षों को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने उत्तर प्रदेश में पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद, पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष बदलने और अन्य राज्यों में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान का उल्लेख किया.
सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर मतभेद
कर्नाटक की राजनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर मतभेद चर्चा में रहते हैं. कांग्रेस कई राज्यों में आंतरिक विवादों से जूझ रही है और इसका असर पार्टी के राजनीतिक प्रदर्शन पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मौजूदा स्थिति के लिए पार्टी का नेतृत्व जिम्मेदार है. नेतृत्व की कमजोरी और आंतरिक कलह के कारण कांग्रेस जनता का विश्वास खोती जा रही है.
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केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी अपनी चुनावी हार के कारणों को समझने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगा रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक कमजोरियों और नेतृत्व की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए. चौहान ने कहा, "नाच न जाने, आंगन टेढ़ा." इस कहावत के जरिए उन्होंने कांग्रेस पर अपनी विफलताओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया.
“कई राज्यों में लंबे समय से सत्ता से बाहर है कांग्रेस”
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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि काफी समय से देशभर के प्रमुख राज्यों से कांग्रेस का सफाया हो गया है. वे तमिलनाडु में लगभग 59 वर्षों से, पश्चिम बंगाल में 49 वर्षों से, सिक्किम में 42 वर्षों से, उत्तर प्रदेश में 37 वर्षों से और बिहार में 36 वर्षों से सत्ता से बाहर हैं. तीन या चार राज्यों को छोड़कर, कांग्रेस हर दूसरे राज्य में एक कनिष्ठ भागीदार बनकर रह गई है. तमिलनाडु में वे द्रमुक की बैसाखी पर जीवित रहे और यहां तक कि अब वह समर्थन देकर सरकार में हैं, बिहार में वे राजद के माध्यम से बचे रहे, यूपी में वे सपा और बसपा के बीच झूलते रहे. कांग्रेस अब केवल सत्ता पर कब्जा करने के लिए संवैधानिक संस्थानों पर हमला कर रही है.