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'शरजील इमाम, उमर खालिद मेरे आदर्श नहीं...', आनंद दुबे ने छोड़ा उद्धव ठाकरे का साथ, शिवसेना (UBT) से दिया इस्तीफा

शिवसेना (यूबीटी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. उन्होंने इस्तीफे के बाद पार्टी की कार्यशैली और कुछ मुद्दों पर उसके रुख को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की.

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12 Oct 2026
( Updated: 12 Oct 2026
07:07 PM )
'शरजील इमाम, उमर खालिद मेरे आदर्श नहीं...', आनंद दुबे ने छोड़ा उद्धव ठाकरे का साथ, शिवसेना (UBT) से दिया इस्तीफा
Image Source: IANS
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उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मीडिया में काफी चर्चित नेता के तौर पर जाने-जाने वाले आनंद दुबे पार्टी छोड़ दी है. उन्होंने साफ कहा कि मैंने बहुत ही दुखी मन से इस्तीफा दिया है. उन्होंने आगे कहा कि पिछले कई वर्षों से पार्टी के लिए तन,मन और धन लगा दिया, मैंने अपने आप को खपा दिया, मैंने हर वो काम किया जो पार्टी ने मुझे कहा, लेकिन मैं पिछले कुछ महीनों से पार्टी की लाइन नहीं बोल पा रहा हूं, मेरा नेता कभी शरजील इमाम या उमर खालिद या ध्रुव राठी नहीं हो सकता है.

आनंद दुबे ने भी उद्धव ठाकरे का छोड़ा साथ

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आनंद दुबे ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और विचारों में असहमति हो सकती है, लेकिन जब देश की बात आती है तो राष्ट्र सर्वोपरि होना चाहिए. उन्होंने कहा, "देश सबसे पहले आता है. पार्टी बाद में आती है और व्यक्ति उससे भी बाद में. पहलगाम आतंकी हमले के बाद मैं अपने सहयोगी गुलाबचंद मोरे के साथ वहां गया था. मैंने फारूक अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर भरोसा दिलाया था कि हमारी पार्टी उनके साथ खड़ी है."

शरजील इमाम, उमर खालिद या ध्रुव राठी मेरे आदर्श नहीं

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दुबे ने कहा कि वह भले ही कोई बड़े पद पर नहीं रहे हों, लेकिन उनमें बालासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित एक शिवसैनिक की भावना हमेशा रही है. देश पर संकट आने पर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए. उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके आदर्श शरजील इमाम, उमर खालिद या ध्रुव राठी नहीं हैं, बल्कि वे उन लोगों को अपना नायक मानते हैं, जिन्होंने देश और समाज के लिए साहसिक कार्य किए हैं.

आनंद दुबे ने कहा, "राजनीति कीजिए, सरकार की आलोचना कीजिए, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन कीजिए, लेकिन देश के खिलाफ खड़े मत होइए."

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भारी मन से छोड़ी पार्टी

उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पार्टी छोड़ना उनके लिए बेहद पीड़ादायक फैसला है. पार्टी हमारे लिए मां और घर की तरह होती है. जब कोई व्यक्ति अपना घर छोड़ता है तो दुख होना स्वाभाविक है. मुझे भी बहुत दुख है, लेकिन जहां विचार और दिल नहीं मिलते, वहां आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है.

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दुबे ने कहा कि उन्होंने 2024 विधानसभा चुनाव और मुंबई महानगरपालिका की राजनीति में पार्टी के लिए पूरी ताकत से काम किया, बावजूद इसके उन्हें अपेक्षित सम्मान और सहयोग नहीं मिला. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के लिए ईमानदारी से काम करने के बाद भी जब उन्होंने इस्तीफे की बात कही तो पार्टी की तरफ से किसी ने मेरा दुख भी नहीं पूछा.

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