ज्ञानेश कुमार पर उठ रहे सवालों के बीच बृजभूषण सिंह ने याद दिलाई केपीएस गिल की नियुक्ति, राहुल गांधी को घेरा
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन पर ब्रजभूषण सिंह ने बड़ा निशाना साधा है. उन्होंने बैलेट पेपर व्यवस्था की मांग का विरोध करते हुए 2014 से पहले का इतिहास याद दिलाया.
Follow Us:
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर निशाना साधा. अपने आवास पर मीडिया से बात करते हुए ब्रजभूषण ने कहा, विरोध किस बात को लेकर हो रहा है, ये समझना जरूरी है.
उन्होंने कहा, इस देश में पहले भी प्रोटेस्ट हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे, लेकिन सवाल ये है कि प्रोटेस्ट किस मुद्दे पर हो रहा है. BJP नेता ने कहा, राहुल गांधी जनता की समस्या को लेकर प्रोटेस्ट नहीं कर रहे हैं.
कांग्रेस पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप
ब्रजभूषण सिंह ने इसे जनता का मुद्दा न ही बताते हुए कांग्रेस का व्यक्तिगत मुद्दा करार दिया. उन्होंने कहा, राहुल गांधी महंगाई, किसान, बेरोजगारी की कोई बात नहीं कर रहे. वे सिर्फ चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा,
‘कांग्रेस की आदत बन गई है कि जब चुनाव जीत जाते हैं, तो चुनाव आयोग अच्छा लगता है और जब हार जाते हैं, तो चुनाव आयोग खराब हो जाता है. यही दोहरा चरित्र देश की जनता देख रही है.’‘कांग्रेस की आदत बन गई है कि जब चुनाव जीत जाते हैं, तो चुनाव आयोग अच्छा लगता है और जब हार जाते हैं, तो चुनाव आयोग खराब हो जाता है. यही दोहरा चरित्र देश की जनता देख रही है.’
BJP के पूर्व सांसद ने कांग्रेस को अमित शाह का नाम प्रदर्शन में लाने पर भी कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा, गृहमंत्री अमित शाह का नाम इसमें नहीं होना चाहिए. वह इस देश के गृहमंत्री हैं, वो चुनाव लड़कर, चुनाव जीतकर आए हैं. जो कैबिनेट बनी है, उसमें उन्हें गृहमंत्री का दर्जा प्राप्त है. वो आपकी दया पर नहीं हैं.
केपीएस गिल और नवीन चावला का मुद्दा उठाया
ब्रजभूषण सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर सवाल उठाने वालों को केपी एस गिल का जिक्र कर जवाब भी दिया. उन्होंने कहा,
‘केपीएस गिल की नियुक्ति किस कानून के तहत की थी, नवीन चावला की नियुक्ति किस आधार पर की थी. 2023 से पहले, तो देश में चुनाव आयुक्त नियुक्त करने की कोई प्रक्रिया ही नहीं थी.’
उन्होंने कहा ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई थी. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर संसद में उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया चली. ब्रजभूषण सिंह ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार कांग्रेस और विपक्ष को सूट नहीं करते तो इसकी जिम्मेदारी दूसरों की नहीं है.
बैलेट पेपर पर चुनाव की मांग का विरोध
ब्रजभूषण सिंह ने बैलेट पेपर व्यवस्था को फिर से लागू करने की विपक्ष की मांग का भी विरोध किया. उन्होंने कहा, 2014 के बाद से चाहे देश का चुनाव हो या प्रदेश का चुनाव, भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है. विपक्ष के पास अब छिपने का कोई रास्ता नहीं बचा है, इसलिए वह लगातार देश की चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने का काम कर रहा है. विपक्ष फिर से बैलेट पेपर वाली पुरानी व्यवस्था की वापसी चाहता है, लेकिन यह संभव नहीं है.
पूर्व सांसद ने बैलेट पेपर के दौर की अराजकता को याद दिलाते हुए कहा कि बिहार और बंगाल में किस तरह से चुनाव होते थे, यह किसी से छिपा नहीं है. कितने लोगों के मर्डर होते थे, कितने लोगों के सिर फटते थे और कितने बड़े पैमाने पर बूथ कैप्चरिंग होती थी, यह सभी जानते हैं.
उन्होंने कहा कि इस मामले में वह खुद भुक्तभोगी हैं. गोंडा में वह खुद इसका शिकार हो चुके हैं. BJP नेता ने कहा, साल 1991 में जब उन्होंने पहला चुनाव लड़ा था, तो उनके सैकड़ों कार्यकर्ता घायल हो गए थे. बूथों पर कार्यकर्ताओं को पीटा गया था और पोलिंग एजेंट तक नहीं मिलते थे.
यह भी पढ़ें- SIR पर संग्राम... ECI के खिलाफ विपक्ष की लड़ाई तेज, राहुल गांधी के नाम सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल
यह भी पढ़ें
बृजभूषण ने कहा कि उस समय चुनाव की तैयारी युद्ध की तरह होती थी. जैसे कोई युद्ध होने वाला हो, वैसे तैयारी की जाती थी कि 20 आदमी उस पोलिंग बूथ पर लगाओ, 30 आदमी उस पोलिंग पर लगाओ, 50 आदमी उस पोलिंग पर लगाओ, विपक्ष वही बैलेट सिस्टम चाहता है, जिससे जो दबंग है, वही वोट डाल ले, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं है.