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सुनियोजित साजिश थी संभल हिंसा, सपा सांसद बर्क की रही बड़ी भूमिका, न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में संभल हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. आयोग ने इसे सुनियोजित साजिश का परिणाम करार दिया, जिसमें सपा सांसद बर्क की बड़ी भूमिका रही. इतना ही नहीं बर्क के अलावा कई और लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

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06 Aug 2026
( Updated: 06 Aug 2026
11:16 AM )
सुनियोजित साजिश थी संभल हिंसा, सपा सांसद बर्क की रही बड़ी भूमिका, न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Image Source: IANS
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संभल की जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद में 24 नवंबर 2024 को सर्वे के दौरान हुई हिंसा सुनियोजित साजिश का परिणाम थी. घटना के बाद गठित किए गए तीन-सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है. पूरे मामले की गहन छानबीन और तमाम साक्ष्यों के आधार पर तैयार की गई इस रिपोर्ट के मुताबिक हिंसा किसी अचानक उपजे विवाद का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके पीछे पहले से रची गई साजिश और उकसावे की भूमिका थी.

आयोग ने हिंसा के दौरान पुलिस-प्रशासन पर पथराव, गोलीबारी, हथियार और दंगा नियंत्रण सामग्री लूटे जाने, वाहनों व संपत्ति को आग के हवाले किए जाने का भी उल्लेख किया है. रिपोर्ट में लोगों को उकसाने एवं भड़काने में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क समेत कई लोगों का नाम शामिल है. आयोग ने हिंसा व आगजनी की इस घटना पर तत्परता से काबू पाने के लिए जिला प्रशासन की प्रशंसा की है. 

सर्वे से पहले ही तैयार हो गई थी हिंसा की जमीन

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 24 नवंबर 2024 की हिंसा पूर्व नियोजित थी. रिपोर्ट में हिंसा के लिए प्रमुख रूप से सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, संभल विधायक पुत्र सोहेल इकबाल, इंतजामिया कमेटी जामा मस्जिद संभल के सदर जफर अली, एडवोकेट कासिम जमाल, इंतजामिया कमेटी के सचिव मशहूद अली फारूकी एडवोकेट, इंतजामिया कमेटी के उपसदर लहदन खान और इंतजामिया समिति के अन्य सदस्यों के बीच रची गई साजिश व उकसावे को हिंसा का परिणाम बताया गया है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन लोगों में 19 नवंबर 2024 को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) द्वारा पारित जामा मस्जिद सर्वे आदेश को लेकर नाराजगी थी. ये लोग मस्जिद की गतिविधियों में किसी तरह के हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं थे.

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वीडियो के जरिए फैलाया गया भ्रम, फिर भड़काई गई हिंसा

न्यायिक जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, कुछ असामाजिक तत्वों ने वीडियो के माध्यम से भ्रामक संदेश फैलाकर लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि सर्वे के बहाने जामा मस्जिद को हड़पने का प्रयास किया जा रहा है. इसके बाद 24 नवंबर को सर्वे के दौरान माहौल बिगड़ा और हिंसक घटनाएं हुईं. रिपोर्ट में मस्जिद में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों के बाद नारेबाजी, पथराव, आगजनी और गोलीबारी का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है.

पुलिस पर पथराव, गोलीबारी और वाहनों में आगजनी

आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भीड़ ने सुनियोजित तरीके से पुलिस पर पथराव और गोलीबारी की. इसके साथ ही हथियार और दंगा नियंत्रण सामग्री लूटने, वाहनों व संपत्ति को आग के हवाले करने की घटनाएं भी हुईं. इस दौरान 28 पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी घायल हुए. वहीं घटना में चार लोगों की मौत का भी रिपोर्ट में जिक्र है. आयोग के अनुसार, 24 नवंबर की हिंसा में हुई चारों मौतों को मुस्लिम पक्ष की ओर से सुनियोजित गोलीबारी का परिणाम बताया गया है. मृतकों के परिजनों की ओर से भी पुलिस फायरिंग से मौत का दावा नहीं किया गया. एफएसएल और सीन री-क्रिएशन रिपोर्ट में भी यही तथ्य सामने आए हैं.

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बर्क और सोहेल इकबाल के राजनीतिक वर्चस्व में उग्र हुई हिंसा

आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक जिया-उर-रहमान बर्क, सोहेल इकबाल, जफर अली, कासिम जमाल और मशहूद अली फारूकी आदि ने मुकदमा संख्या 182/2024 के तथ्यों को छिपाकर ऐसा भ्रामक प्रचार किया कि हिंदू मस्जिद को ढहाना चाहते हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि बर्क और सोहेल इकबाल राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने व सरकार-पुलिस को बदनाम करने के लिए लोगों को उकसाना चाहते थे. दोनों के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी थी. जिले में मुस्लिमों के तुर्क और पठान गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी हिंसक माहौल का कारण बनी. जांच में सामने आया कि घटनास्थल से 12-बोर के कारतूस मिले थे. हिंसा में स्थानीय व बाहरी उपद्रवी भी शामिल थे.

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तीन सदस्यीय आयोग ने की जांच

हिंसा की जांच के लिए शासन के 28 नवंबर 2024 के पत्र के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया था. आयोग का गठन 24 नवंबर की हिंसक घटना के कारणों और उससे जुड़े पहलुओं की जांच के लिए किया गया था.

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रिपोर्ट में हिंसा की पृष्ठभूमि से लेकर भीड़ के व्यवहार, पुलिस पर हमले, आगजनी, गोलीबारी और मौतों से जुड़े पहलुओं को सामने रखा गया है. आयोग के निष्कर्षों ने 24 नवंबर की घटना को अचानक हुई हिंसा के बजाय पूर्व नियोजित साजिश और सुनियोजित उकसावे की कार्रवाई से जोड़ते हुए पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

ये भी पढ़ें: संभल हिंसा पर न्यायिक आयोग का बड़ा दावा! सपा सांसद बर्क के बयान से भड़की हिंसा, रिपोर्ट में आबादी पर भी बड़ा खुलासा

प्रशासन की भूमिका की सराहना

हिंसा के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के घायल होने के बावजूद जिला प्रशासन और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्परता से कार्रवाई की. इस प्रभावी कार्रवाई के लिए जांच आयोग ने जिला प्रशासन की भूमिका की प्रशंसा की है.

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