2 साल बाद फिर खुलेगी RG कर रेप केस की फाइल, विधायक मां की गुहार पर CM सुवेंदु ने लिया बड़ा फैसला
कोलकाता के आरजी मेडिकल कॉलेज रेप केस करीब दो साल बाद फिर सुर्खियों में है. पश्चिम बंगाल सरकार ने पीड़िता की मां की मांग पर मामले की नए सिरे से जांच का ऐलान किया है.
Follow Us:
RG Kar Case: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में महिला ट्रेनी डॉक्टर के रेप और हत्या का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. 9 अगस्त 2024 की उस भयावह घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था. डॉक्टरों के प्रदर्शन से लेकर सड़कों पर हुए विरोध तक, इस मामले ने देशभर में सुरक्षा और न्याय को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया था. लेकिन अब करीब दो साल बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले में नए सिरे से जांच का ऐलान किया है.
मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह फैसला पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ के अनुरोध के बाद लिया गया है. उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की दोबारा जांच की मांग की थी. इसके बाद मुख्य सचिव और विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद विशेष आयोग अधिनियम, 1952 के तहत नई जांच शुरू करने की घोषणा की गई.
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
सुवेंदु अधिकारी ने मामले की शुरुआती जांच में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह सफल नहीं रही. इसी के साथ उन्होंने पीड़िता के अंतिम संस्कार से जुड़े कथित मामलों की अलग जांच कराने का भी आदेश दिया है. सीएम अधिकारी ने दावा किया कि पीड़िता के अंतिम संस्कार में नियमों की अनदेखी की गई. उनके अनुसार, नतागढ़ कदमतला श्मशान घाट पर शव को अंतिम संस्कार की कतार में आगे कर दिया गया और प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी की गई. उन्होंने अंतिम संस्कार शुल्क और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े कथित सवाल भी उठाए हैं. इन आरोपों की अब अलग से जांच होगी. मुख्यमंत्री ने बैरकपुर के पुलिस आयुक्त को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश भी दिया है. हालांकि, अंतिम संस्कार से जुड़े आरोपों की जांच आरजी कर मामले की मौजूदा CBI जांच से अलग होगी.
क्या हुआ था 9 अगस्त 2024 को?
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 9 अगस्त 2024 की सुबह एक पोस्ट-ग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर का शव सेमिनार हॉल में मिला था. शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम में उसके साथ यौन हिंसा और हत्या की बात सामने आई. घटना के बाद देशभर में गुस्सा फैल गया और डॉक्टरों ने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया. कोलकाता पुलिस ने 10 अगस्त को नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया था. इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर जांच CBI को सौंप दी गई. जनवरी 2025 में विशेष अदालत ने संजय रॉय को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. हालांकि पीड़िता के परिवार ने मौत की सजा की मांग की थी. मामले में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष पर भी गंभीर आरोप लगे थे. CBI ने उन्हें सितंबर 2024 में गिरफ्तार किया था.
अब फिर जांच क्यों अहम हो गई?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ मुख्य आरोपी की सजा तक सीमित नहीं रहा. पीड़िता के माता-पिता लगातार यह आशंका जताते रहे कि घटना में एक से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं और पूरे मामले को दबाने की कोशिश हुई हो सकती है. इसी दिशा में मई 2026 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI की तीन सदस्यीय SIT गठित की. टीम को घटना की रात से लेकर अगले दिन पीड़िता के अंतिम संस्कार तक की घटनाओं की जांच करने का निर्देश दिया गया. SIT का नेतृत्व CBI के ईस्टर्न जोन के ज्वाइंट डायरेक्टर को सौंपा गया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लिया था और डॉक्टरों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया था. दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने स्वतः संज्ञान वाले मामले को आगे की निगरानी के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट को भेज दिया था.
यह भी पढ़ें
बहरहाल, अब नई जांच की घोषणा ने इस पुराने मामले में फिर हलचल पैदा कर दी है. लोगों की नजर इस बात पर है कि नई जांच से कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और क्या उन सवालों के जवाब मिल पाते हैं, जो इस घटना के बाद से अब तक अनसुलझे हैं. करीब दो साल बाद भी इस मामले से जुड़ी हर नई कार्रवाई सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पीड़िता के परिवार और पूरे समाज की न्याय की उम्मीद से जुड़ी हुई है.