महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी संग्राम,CM देवेंद्र फडणवीस का विपक्ष पर तीखा हमला
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित न होने पर विपक्षी दलों पर तीखा निशाना साधा है. उन्होंने इस घटना को सुधारवादी राजनीति के लिए “काला दिन” करार दिया और कहा कि यह देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात है.
Follow Us:
महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित नहीं होने पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को विपक्षी दलों पर निशाना साधा है. मुख्यमंत्री ने हालिया संसदीय नतीजों को सुधारवादी राजनीति के लिए "काला दिन" बताया और 131वें संशोधन विधेयक को दो-तिहाई बहुमत न मिलने पर निराशा व्यक्त की.
महिला आरक्षण बिल पारित न होने पर फडणवीस ने विपक्ष को घेरा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रेसवार्ता कर कहा कि आज मैं एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर बोल रहा हूं. जैसा कि आप जानते हैं, 17 अप्रैल को हमारे राष्ट्र की राजनीतिक और सामाजिक यात्रा में एक ऐतिहासिक दिन माना जा रहा था. एक ऐसा दिन जिसे हम भारतीय इतिहास में एक निर्णायक मोड़ कह सकते हैं क्योंकि महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी मिलनी थी. हमें उम्मीद थी कि सभी दल इस आंदोलन का समर्थन करेंगे.
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, यूबीटी (शिवसेना), शरद पवार की एनसीपी और समाजवादी पार्टी सहित कई दलों ने महिला विरोधी मानसिकता का प्रदर्शन करते हुए विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने से रोक दिया. ऐसा करके उन्होंने 70 करोड़ महिलाओं के साथ विश्वासघात किया और इस विधेयक के माध्यम से 'गर्भाशय वध' किया.
राज्यव्यापी अभियान और मेगा रैली की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कहा, "इस तरह विधेयक को रद्द करने के बाद उन्होंने जो जश्न मनाया, वह वास्तव में भारत के महान समाज सुधारकों के आदर्शों पर तांडव था. मुझे गहरा दुख है कि जिस वर्ष हम महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती मना रहे हैं, उसी वर्ष इन पार्टियों ने उनके सिद्धांतों को त्याग दिया है. ये सभी पार्टियां, जो केवल अपने भाषणों में फुले का नाम लेती हैं, अब पूरी तरह बेनकाब हो गई हैं."
उन्होंने राज्यव्यापी व्यापक जनसंपर्क अभियान की घोषणा की. उन्होंने कहा, "हम इस विधेयक के समर्थन में महाराष्ट्र भर की एक करोड़ महिलाओं के हस्ताक्षर एकत्र करेंगे. इसके साथ ही, हम तालुका स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएंगे. भारतीय पार्टी ने इसके लिए एक सम्मेलन आयोजित किया है, जिसमें हम अपने सहयोगियों को आमंत्रित करेंगे. इन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से, हमारा उद्देश्य कांग्रेस, शरद पवार और यूबीटी (शिव सेना) के इस मुद्दे पर रुख को उजागर करना है. हम जनमत का ऐसा व्यापक जन आंदोलन उत्पन्न करेंगे कि वे महिला आरक्षण विधेयक को पारित करने के लिए विवश हो जाएंगे. जब तक महिलाओं को उनका हक नहीं मिल जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे."
उन्होंने घोषणा की कि महायुति गठबंधन विधेयक की हार के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराने के लिए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और 30 अप्रैल को मुंबई में एक "मेगा रैली" का आयोजन करेगा. उनके साथ महाराष्ट्र विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरहे और राज्य की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अदिति तटकरे भी मौजूद थीं.
यह भी पढ़ें
कृपया Google से लॉग इन करें टिप्पणी पोस्ट करने के लिए
Google से लॉग इन करें