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बंगाल में मिटा 'पाकिस्तानी इतिहास', गोपाल मुखर्जी के नाम से जानी जाएगी कोलकाता की सुहरावर्दी एवेन्यू सड़क

बंगाल में पाकिस्तानी पहचान वाली सुहरावर्दी सड़क का नाम बदल दिया गया है. सीएम सुवेंदु ने बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने इसको लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐलान किया है.

Suvendu Adhikari/ Image: IANS
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बंगाल सीएम सुवेंदु अधिकारी ने हिंदुओं के खिलाफ डायरेक्ट एक्शन डे का ऐलान करने वाले, देश के विभाजन के जिम्मेदार और पाकिस्तान के पूर्व पीएम के नाम पर बनी एक सड़क का नाम ही बदल दिया है. आपको बता दें कि कोलकाता की एक प्रमुख और ऐतिहासिक सड़क की पहचान अब हमेशा के लिए बदलने जा रही है. कोलकाता नगर निगम (KMC) द्वारा एक बेहद अहम और प्रतीकात्मक निर्णय लेते हुए पार्क सर्कस इलाके में स्थित 'सुहरावर्दी एवेन्यू' का नाम बदलकर अब 'गोपाल मुखर्जी रोड' कर दिया गया है.

बदला गया सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम

केएमसी द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक नोट के अनुसार, भविष्य में अब इस सड़क को इसी नए नाम से पहचाना जाएगा. दशकों पुरानी इस सड़क के नामकरण का यह बदलाव केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह बंगाल के उस रक्तरंजित इतिहास के पन्नों को पलटने जैसा है, जिसकी टीस आज भी कई लोगों के दिलों में चुभती है.

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सीएम सुवेंदु ने सुधारी ऐतिहासिक भूल

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नगर निगम के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है. उन्होंने इस कदम को 'ऐतिहासिक भूल को सुधारने वाला' एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम करार दिया है. शनिवार को 'पश्चिम बंग दिवस' के विशेष अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए सीएम अधिकारी ने लिखा कि केएमसी का यह ऐतिहासिक निर्णय पूरी तरह से न्यायपूर्ण और समय की मांग के अनुरूप है.

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीएम अधकारी ने कहा कि पश्चिम बंग दिवस के अवसर पर कोलकाता नगर निगम द्वारा लिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय न्यायपूर्ण और समयोचित है. उन्होंने कहा कि दशकों तक शहर की एक महत्वपूर्ण सड़क का नाम ऐसे व्यक्ति के नाम पर रहा, जिस पर सत्ता का दुरुपयोग कर राजनीतिक लाभ के लिए निर्दोष नागरिकों के नरसंहार को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं.

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अधकारी ने कहा कि अब इस सड़क का नाम गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने से उन हजारों निर्दोष लोगों की रक्षा करने वाले एक साहसी व्यक्ति को सम्मान मिलेगा, जिन्होंने संकट की घड़ी में लोगों की जान बचाने के लिए अग्रणी भूमिका निभाई थी. उनके अनुसार, यह फैसला ऐतिहासिक न्याय की पुनर्स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को अब अपने वास्तविक नायकों को याद करने, इतिहास की गलतियों को सुधारने और समाज के सच्चे रक्षकों को सम्मान देने का समय आ गया है.

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कौन था हुसैन शहीद सोहरावर्दी?

हुसैन शहीद सोहरावर्दी और उनके नाम पर सड़क का नाम रखने का विवादास्पद इतिहास है. सोहरावर्दी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने भारत के विभाजन के लिए  वर्ष 1946 में डायरेक्ट एक्शन डे का ऐलान किया था, जिसमें हजारों हिंदुओं-आम नागरिकों की हत्या कर दी गई थी. सुहरावर्दी आजादी से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के एक बेहद कद्दावर और प्रमुख बंगाली मुस्लिम राजनेता थे. 1947 में जब भारत का दुखद विभाजन हुआ, तो वे पाकिस्तान चले गए और आगे चलकर 1956 से 1957 के बीच पाकिस्तान के पांचवें प्रधानमंत्री भी बने. लेकिन भारतीय इतिहास और विशेषकर बंगाल के पन्नों में सुहरावर्दी का नाम बेहद नकारात्मक, काले और विवादास्पद अक्षरों में दर्ज है.

पाकिस्तान ने निर्माता के नाम पर कैसे बनी बंगाल की सड़क?

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16 अगस्त 1946 में मोहम्मद अली जिन्ना ने अलग 'पाकिस्तान' राष्ट्र की कट्टर मांग को लेकर 'डायरेक्ट एक्शन डे' (सीधी कार्रवाई दिवस) की घोषणा की थी. उस नाजुक वक्त में बंगाल में मुस्लिम लीग की ही सरकार थी और सत्ता की पूरी कमान सुहरावर्दी के हाथों में थी. उन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी मशीनरी का घोर दुरुपयोग किया और 16 अगस्त को पूरे बंगाल में सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया. आलोचकों और तमाम इतिहासकारों का स्पष्ट रूप से यह मानना है कि इसके पीछे सुहरावर्दी का मुख्य और छिपा हुआ मकसद मुस्लिम लीग के कट्टर समर्थकों को भारी और अनियंत्रित संख्या में सड़कों पर इकट्ठा होने का खुला मौका देना था. आरोप तो यहां तक हैं कि उन्होंने जानबूझकर पुलिस और पूरे प्रशासन को मूकदर्शक बनाकर रख दिया, जिससे हिंसक भीड़ को कत्लेआम की पूरी खुली छूट मिल गई. उसी के नाम पर आजाद बंगाल में एक सड़क का नाम होना उन लोगों के लिए नाइंसाफी थी, जिन्होंने डायरेक्ट एक्शन डे के दिन सोहरावर्दी के कारण जान गंवाई थी.

हुसैन शहीद सोहरावर्दी पर एक नजर!

बंगाल के प्रधानमंत्री (1946–1947): बंटवारे के उथल-पुथल भरे दौर में उन्होंने बंगाल में मुस्लिम लीग सरकार का नेतृत्व किया. उनका कार्यकाल 1946 के 'ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स' (जिसमें "डायरेक्ट एक्शन डे" के आह्वान में उनकी विवादास्पद भूमिका थी) और 1943 के बंगाल अकाल के लिए याद किया जाता है. 

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अवामी लीग के संस्थापक: 1950 में, उन्होंने मुस्लिम लीग से अलग होकर अवामी लीग (शुरुआत में अवामी मुस्लिम लीग) की स्थापना की, ताकि पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के लोकतांत्रिक और आर्थिक अधिकारों की वकालत की जा सके. 

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री (1956–1957): उन्होंने देश के पांचवें प्रधानमंत्री के रूप में काम किया. अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने अर्थव्यवस्था को स्थिर करने, अमेरिका के साथ संबंध सुधारने और पाकिस्तान का पहला संविधान तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया.

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