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केदारनाथ धाम में ‘ऑपरेशन कालनेमि’ तेज, बिना सत्यापन रह रहे 15 लोगों का चालान
ऑपरेशन कालनेमी राज्य सरकार द्वारा जुलाई 2025 में शुरू किया गया एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान है, जिसका उद्देश्य हिंदू साधुओं का रूप धारण करके धोखाधड़ी करने, अवैध गतिविधियों में लिप्त होने और श्रद्धालुओं का शोषण करने वाले व्यक्तियों की पहचान करना और उन्हें गिरफ्तार करना है.
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उत्तराखंड प्रशासन ने ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत केदारनाथ धाम में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है. इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. इस अभियान के तहत, ‘संत’ बनकर श्रद्धालुओं को ठगने और उनका शोषण करने वालों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जा रहा है.
पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई
इस अभियान के दौरान कुल 15 ऐसे धोखेबाजों को चालान जारी किए गए हैं. अप्रैल में श्रद्धालुओं के लिए खोले गए केदारनाथ धाम में प्रतिदिन हजारों तीर्थयात्री भगवान शिव के दर्शन करने आ रहे हैं, जिससे वहां भारी भीड़ उमड़ रही है.
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मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य प्रशासन और पुलिस ‘ऑपरेशन कालनेमी’ के तहत निरंतर सतर्कता बरत रहे हैं.
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जुलाई 2025 में शुरू हुआ था अभियान
ऑपरेशन कालनेमी राज्य सरकार द्वारा जुलाई 2025 में शुरू किया गया एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान है, जिसका उद्देश्य हिंदू साधुओं का रूप धारण करके धोखाधड़ी करने, अवैध गतिविधियों में लिप्त होने और श्रद्धालुओं का शोषण करने वाले व्यक्तियों की पहचान करना और उन्हें गिरफ्तार करना है.
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इस अभियान के तहत, बिना उचित पुलिस सत्यापन या वैध पहचान दस्तावेजों के वहां रह रहे फर्जी बाबाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
आगे भी जारी रहेंगे औचक निरीक्षण
केदारनाथ पुलिस चौकी द्वारा यात्रा मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में एक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया. धाम क्षेत्र में रह रहे साधुओं के पहचान पत्र और पुलिस सत्यापन दस्तावेजों की जांच की गई.
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निरीक्षण में पता चला कि कई व्यक्ति बिना पुलिस सत्यापन के केदारनाथ में रह रहे थे, जबकि कुछ के पास वैध आधार कार्ड नहीं था.
बिना सत्यापन रह रहे 15 लोगों का चालान
सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का पता चलने पर पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की. अभियान के दौरान कुल 15 लोगों को चालान जारी किए गए.
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सुरक्षा उपाय के तौर पर वैध पहचान पत्र न होने पर व्यक्तियों को केदारनाथ धाम से गौरीकुंड वापस भेज दिया गया.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रा की पवित्रता और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी इस तरह के अचानक निरीक्षण जारी रहेंगे.
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उन्होंने कहा कि चार धाम यात्रा के दौरान उचित सत्यापन और पहचान पत्र के बिना किसी भी व्यक्ति को धाम परिसर में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी.