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Amit Shah की मौजूदगी में बड़ा जल समझौता, योगी समेत 6 CM ने किशाऊ प्रोजेक्ट पर किए हस्ताक्षर; पानी, बिजली और सिंचाई को मिलेगी नई ताकत

Kishau Dam Project MoU: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए.

Image Source: Amit Shah/ Twitter
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Kishau Dam Project MoU: किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर लंबे समय से चली आ रही अड़चन अब दूर होती नजर आ रही है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए. ..इस मौके पर केंद्र और संबंधित राज्यों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. छह राज्यों का एक साथ इस समझौते पर सहमत होना इसलिए अहम मान जा रहा है, क्योंकि किशाऊ परियोजना काफी समय से राज्यों के बीच सहमति और दूसरे मुद्दों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थी...

पानी, बिजली और सिंचाई के लिए अहम है परियोजना

किशाऊ परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनाया जाएगा. इसमें करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा किया जा सकेगा. परियोजना से लगभग 97 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होने की उम्मीद है, जबकि करीब 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत भी पैदा की जा सकेगी. यानी इस परियोजना का असर सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पानी, खेती और बिजली के लिहाज से कई राज्यों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है.

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केंद्र सरकार ने किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है. इसके तहत परियोजना का करीब 90 प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत राशि 1994 में हुए समझौते के अनुसार संबंधित राज्य मिलकर वहन करेंगे. उत्तराखंड की ओर से कुछ आर्थिक और दूसरी चिंताएं रखी गई थीं, जिन्हें लेकर केंद्र ने सहयोग का भरोसा दिया है.

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यमुना के लिए भी महत्वपूर्ण है किशाऊ परियोजना

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किशाऊ परियोजना का एक बड़ा पहलू यमुना नदी से भी जुड़ा है. अमित शाह ने कहा कि यमुना के पानी के पुराने बंटवारे में नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया था. उनका कहना है कि किशाऊ परियोजना के जरिए मिलने वाला पानी यमुना और दिल्ली, दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है. इससे नदी में पानी का प्रवाह बनाए रखने और पर्यावरण से जुड़े प्रयासों को भी मदद मिलने की उम्मीद है.

यमुना की सफाई को लेकर भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार का कहना है कि यमुना की स्थिति में सुधार का असर आगे गंगा पर भी पड़ेगा, क्योंकि यमुना प्रयागराज में गंगा से मिलती है. ऐसे में नदी में पर्याप्त पानी और उसकी सफाई दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है.

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कई साल पुरानी सहमति अब समझौते तक पहुंची

किशाऊ परियोजना की कहानी नई नहीं है. 12 मई 1994 को हुए समझौते में यमुना बेसिन की अलग-अलग भंडारण परियोजनाओं के लिए अलग समझौते करने की व्यवस्था तय की गई थी. इसके बाद लखवार और रेणुकाजी जैसी परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनने के बाद किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता भी खुला. अब छह राज्यों के बीच औपचारिक समझौता होने के बाद परियोजना को आगे के चरणों में ले जाने की तैयारी है.

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अमित शाह ने इस मौके पर कहा कि राज्यों के बीच सहमति से यह दिखता है कि पानी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी मिलकर रास्ता निकाला जा सकता है. अब उम्मीद यही है कि सभी संबंधित राज्य आगे भी आपसी तालमेल बनाए रखें और परियोजना को समय पर पूरा करने की दिशा में काम करें. इससे भविष्य में लोगों को पेयजल, सिंचाई और बिजली से जुड़े फायदे मिल सकते हैं और यमुना के जल प्रवाह को भी मजबूती मिल सकती है.

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