योगी सरकार का बड़ा प्लान... UP को खिलौना निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी, नई Toy Policy को मिली मंजूरी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ की कैबिनेट ने सोमवार को यूपी में खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दी, निवेश और रोजगार बढ़ाने के साथ कारीगरों व स्थानीय उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा.
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दे दी गई. इस नीति का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना, नए उद्योगों को प्रोत्साहित करना और ट्वॉय क्लस्टर्स में रोजगार के अवसर बढ़ाना है. नीति के माध्यम से प्रदेश में खिलौना निर्माण, विपणन और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा दिया जाएगा.
खिलौना उद्योग में यूपी की मजबूत पहचान
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशेष रूप से खिलौना विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. राज्य भारतीय पर्व-त्योहारों से संबंधित वस्तुओं (HS 9505) के निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत योगदान करता है. वाराणसी, झांसी और चित्रकूट अपने जीआई टैग प्राप्त लैकवेयर तथा हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों के लिए प्रसिद्ध हैं. यह क्षेत्र कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम है. खिलौना विनिर्माण एवं विपणन को विकास के प्रमुख क्षेत्र के रूप में बढ़ावा देकर कुशल, अर्धकुशल और अकुशल मानव संसाधन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा. इससे ट्वॉय क्लस्टरों में रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ेंगे.
नए उद्योगों और मौजूदा इकाइयों को मिलेगा समर्थन
नीति के तहत खिलौना विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी. मौजूदा उद्योगों के विस्तार, विविधीकरण और तकनीकी उन्नयन के लिए भूमि एवं अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा. नए उद्यमों की स्थापना में सहायता देने के साथ एमएसएमई और बड़े उद्योगों को भी समर्थन दिया जाएगा. पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल क्षेत्रों में खिलौना उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे. इससे इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने में मदद मिलेगी.
एमएसएमई और बड़े उद्योगों के लिए अलग व्यवस्था
उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 के अंतर्गत एमएसएमई वर्गीकरण के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी की इकाइयों के साथ वृहद और उससे उच्च श्रेणी की खिलौना विनिर्माण इकाइयों तथा खिलौना क्लस्टर उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जाएगा. एमएसएमई श्रेणी की पात्र इकाइयों को उत्तर प्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन नीति-2022 और उसके निष्प्रभावी होने की स्थिति में लागू उत्तरवर्ती नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन मिलेंगे. वहीं, बड़े और उससे उच्च श्रेणी के तहत स्थापित नई इकाइयों तथा विस्तार एवं विविधीकरण करने वाली इकाइयों को प्रस्तावित नीति के प्रावधानों के अनुसार प्रोत्साहन दिए जाएंगे. इनका क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से किया जाएगा.
निवेश और रोजगार को मिलेगा बल
नीति के तहत पात्र खिलौना विनिर्माण इकाइयों को निर्धारित प्रोत्साहन वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद प्रदान किए जाएंगे. प्रस्ताव में फ्रंट एंड सब्सिडी के प्रावधान भी शामिल हैं. इससे प्रदेश में खिलौना उद्योग की स्थापना और विस्तार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है. नीति का क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (एमएसएमई) द्वारा किया जाएगा. बड़े और उससे उच्च श्रेणी के उद्योगों से संबंधित प्रोत्साहनों का क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से होगा.
पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी नीति
उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 प्रख्यापन की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक अथवा सरकार द्वारा नई नीति के प्रख्यापन तक लागू रहेगी. इस नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली परियोजनाएं राज्य सरकार की किसी अन्य नीति के तहत प्रोत्साहनों की पात्र नहीं होंगी. हालांकि, भारत सरकार की योजनाओं एवं नीतियों के तहत उपलब्ध प्रोत्साहन इसके अतिरिक्त प्राप्त किए जा सकेंगे.
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नीति से होने वाले प्रमुख लाभ
- प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद.
- पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में उद्योग स्थापना को प्रोत्साहन.
- खिलौना क्लस्टरों में अतिरिक्त रोजगार के अवसर.
- कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक अवसर.
- एमएसएमई एवं बड़े उद्योगों के विस्तार और तकनीकी उन्नयन को समर्थन.
- खिलौना निर्माण एवं विपणन के क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा.
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बताते चलें कि उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 से राज्य में खिलौना उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है. नीति के जरिए निवेश, रोजगार, कौशल विकास और स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है, जिससे यूपी को खिलौना निर्माण के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम आगे बढ़ेगा.