आरजीकर पीड़िता की मां का बड़ा दावा: घटना वाली जगह पर मिली ममता बनर्जी के भतीजे की मोबाइल लोकेशन, CBI से क्या मांग की?
रत्ना देबनाथ ने CBI जांच का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले की कड़ियां अब तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय निकायों से जुड़ रही हैं.
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बंगाल में सत्ता परिवर्तन होते ही झकझोर देने वाले आरजीकर केस के पन्ने फिर खुल गए. डॉक्टर से रेप और हत्या के इस मामले में हुए नए खुलासे ने सियासी भूचाल ला दिया है. दावा किया गया कि घटना वाले दिन ममता बनर्जी के भतीजे आवेश बनर्जी की लोकेशन घटनास्थल के पास मिली थी.
आरजीकर पीड़िता अभया (बदला हुआ नाम) की मां और BJP विधायक रत्ना देबनाथ ने चौंकाने वाला बयान दिया है. जिसमें उन्होंने इस कांड में तत्कालीन TMC सरकार के खास लोगों और ममता बनर्जी के परिवार के लोगों के शामिल होने की बात कही.
आरजीकर पीड़िता की मां ने किसका नाम लिया?
रत्ना देबनाथ ने सीबीआई कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले की कड़ियां अब तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय निकायों से जुड़ रही हैं. इस मामले में CBI नेता ने TMC
नेता निर्मल घोष को तलब किया था. रत्ना देबनाथ ने ममता बनर्जी के भतीजे आवेश बनर्जी का जिक्र करते हुए संलिप्तता का दावा किया.
रत्ना देबनाथ ने दावा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भाई समीर बनर्जी के बेटे आवेश बनर्जी (Abesh Banerjee) के मोबाइल टावर की लोकेशन घटनास्थल के आस-पास मिली है. घटना वाले दिन आवेश बनर्जी की मौजूदगी आरजीकर कॉलेज के पास दर्ज की गई थी. रत्ना देबनाथ ने आरोप लगाया कि तकनीकी जांच और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, घटना के समय आवेश बनर्जी की मोबाइल टावर लोकेशन भी उसी आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आसपास पाई गई थी.
उन्होंने CBI से आवेश बनर्जी को भी तलब किए जाने की मांग की है, ताकि इस मामले में उनसे गहनता से पूछताछ की जा सके. उन्होंने कहा कि यह साफ होना चाहिए आवेश उस दिन आरजीकर के पास क्या कर रहे थे.
रत्ना देबनाथ ने यह दावा ऐसे समय पर किया है जब ममता बनर्जी पहले से ही पार्टी में टूट का सामना कर रही हैं. ये उनके लिए सबसे मुश्किल भरा माना जा रहा है. ऐसे में आरजीकर केस में भतीजे का नाम कथित तौर पर सामने आने से वह सीधे तौर पर BJP के निशाने पर आ गई हैं.
क्या है आरजीकर केस?
9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के सेमिनार हॉल में एक 31 वर्षीय महिला ट्रेनी डॉक्टर से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या का मामला सामने आया था. इस घटना से पूरे देश को झकझोर दिया, डॉक्टरों ने दिल्ली में प्रदर्शन करते हुए आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है.
इस मामले में हॉस्पिटल के स्टाफ संजय रॉय को मुख्य आरोपी बनाया गया था. 18 जनवरी 2025 को कोर्ट ने उसे बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया. 20 जनवरी 2025 को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई, साथ ही पीड़ित परिवार को 17 लाख मुआवजा देने को भी कहा गया.
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परिवार का आरोप है कि इस केस में केवल संजय रॉय आरोपी नहीं था उसके साथ कई बड़े नाम भी शामिल हैं जिन्हें बचाया जा रहा है. इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने सबूत मिटाए जाने और कवर-अप के आरोपों की जांच के आदेश दिए थे. सीबीआई की तीन सदस्यीय SIT गठित की गई, जो घटना की रात से लेकर शव दाह तक के हर तथ्य की गहनता से जांच में जुटी हुई है.