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केजरीवाल का केंद्र पर निशाना, कहा- देश की आर्थिक स्थिति का सच देशवासियों के सामने रखे मोदी सरकार

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देशहित में सभी देशवासी हर कुर्बानी देने के तैयार हैं, लेकिन पता तो चले कि आज देश की अर्थव्यवस्था कहां खड़ी है?

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12 May 2026
( Updated: 12 May 2026
05:40 PM )
केजरीवाल का केंद्र पर निशाना, कहा- देश की आर्थिक स्थिति का सच देशवासियों के सामने रखे मोदी सरकार
Image Credit: x/@AamAadmiParty
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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश की आर्थिक स्थिति का सच देशवासियों के सामने रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने लोगों से विदेश न जाओ, विदेशी उत्पाद न खरीदो, सोना न खरीदो, पेट्रोल-डीलज की गाड़ी इस्तेमाल न करो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करो और वर्क फ्रॉम होम करो, जैसे 7 कठोर कदम उठाने की अपील की है. इससे साफ है कि देश की अर्थ व्यवस्था का बहुत बुरा हाल है और आने वाले दिनों में और भी बुरा हाल होने वाला है. 

'सिर्फ मिडिल क्लास को किया जा रहा टारगेट' 

केजरीवाल ने कहा कि इन सभी कदमों से सिर्फ मिडिल क्लास ही प्रभावित हो रहा है. आखिर सारी कुर्बानी मिडिल क्लास ही क्यों दे. उन्होंने पूछा कि सरकार, पीएम, मंत्री, उद्योगपति और अफसर अपने खर्चों में कटौती क्यों नहीं कर सकते? हम देश के खातिर कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं, लेकिन चुन कर सिर्फ मिडिल क्लास को टारगेट नहीं किया जाए और देश के साथ सारी जानकारी साझा की जाए.

मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पर दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के साथ प्रेसवार्ता कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश बहुत आर्थिक संकट से गुजर रहा है. इस वजह से उन्होंने देश के लोगों से सात कठोर कदम उठाने की अपील की है. पहला, वर्क फ्रॉम होम. दूसरा सोना खरीदना बंद करो, कम से कम सोना खरीदो. तीसरा, पेट्रोल डीजल की बचत करो, ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करो. चौथा, उर्वरक का कम से कम इस्तेमाल करो, प्राकृतिक कृषि करो. पांचवां विदेश उत्पाद कम से कम उत्पाद करो और विदेशी मुद्रा बचाओ. छठां, खाने के तेल का भी कम से कम इस्तेमाल करो. सातवां, विदेश यात्रा बंद करो. 

'पूरा देश सदमे में'

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अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 1950 से अभी तक ऐसे कई समय आए, जब हमारा देश अलग-अलग संकटों से गुजरा. चीन, पाकिस्तान से युद्ध हुआ. हमारा देश आर्थिक मंदी से भी गुजरा. लेकिन इतने कठोर कदम आज तक कभी किसी प्रधानमंत्री ने देशवासियों को उठाने के लिए नहीं कहे. लाल बहादुर शास्त्री जी ने भी देश के लोगों से अपील की थी और एक समय इंदिरा गांधी जी ने भी लोगों से सोना न खरीदने की अपील की थी. लेकिन आज तक कभी किसी प्रधानमंत्री ने सात बड़े कदम नहीं उठाए. इस वक्त पूरा देश सदमे में हैं.

केजरीवाल की पीएम मोदी से 3 गुजारिश

अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री ने तीन गुजारिश करते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री ने इतने कठोर कदम उठाने के लिए कहा है तो इसका मतलब देश की अर्थ व्यवस्था का काफी बुरा हाल है. साथ ही आने वाले समय में अर्थ व्यवस्था का और भी बुरा हाल होने का अंदेशा है. लिहाजा, प्रधानमंत्री से देश यह जानना चाहता है कि अर्थ व्यवस्था के मामले में हम कहां खड़े हैं? सभी देशवासी देश भक्त हैं. कठोर से कठोर कदम भी उठाएंगे, अगर हमें देश के लिए कठिनाईयां बर्दाश्त करनी पड़ी, कुर्बानियां देनी पड़ी तो वह भी करेंगे, लेकिन देश को यह बात का पता तो चले कि यह कदम क्यों उठाए जा रहे हैं? देश को पता तो चले कि देश की अर्थ व्यवस्था आज कहां खड़ी है? केवल आदेश दे देने भर से तो काम नहीं चलेगा. यह देश हम सब 140 करोड़ लोगों का है. 

अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से निवेदन करते हुए कहा कि देश की अर्थ व्यवस्था की वर्तमान स्थिति और आने वाले कुछ महीनों या एक साल में अर्थ व्यवस्था की क्या स्थिति होने का अंदेशा है, इसकी सारी जानकारी देश के लोगों के साथ साझा करें. अन्यथा देश के लोगों में शंका पैदा होती है. देश में अलग-अलग किस्म की अफवाहें फैल रही हैं. आज अफवाहों का बाजार गर्म है. यह अर्थ व्यवस्था के विश्वास के लिए अच्छा नहीं है. 

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अर्थव्यवस्था की स्थिति पर केजरीवाल ने उठाए सवाल

अरविंद केजरीवाल ने दूसरी अपील करते हुए कहा कि हम सभी जानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे युद्ध की वजह से यह हो रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की वजह से तो पूरी दुनिया प्रभावित है. लेकिन किसी भी देश की सरकार ने अपने नागरिकों से इस तरह से सात कठोर कदम उठाने की अपील नहीं की है. इससे देश के लोगों के मन में शंका पैदा होती है कि कहीं अमेरिका-ईरान युद्ध के अलावा अर्थ व्यवस्था की स्थिति कहीं और भी ज्यादा खराब तो नहीं है. हमारा देश किन परिस्थितियों से गुजर रहा है? इसलिए प्रधानमंत्री मोदी देश को बताएं कि जो कदम किसी भी देश ने नहीं उठाए, जबकि सभी देश प्रभावित हैं. ऐसे में इस तरह के कठोर कदम सिर्फ भारत को उठाने की क्या जरूरत पड़ गई? आखिर इतनी ज्यादा क्या खराब स्थिति हो गई है? 

अरविंद केजरीवाल ने तीसरी अपील करते हुए कहा कि इसका सारा बोझ मिडिल क्लास पर क्यों डाला जा रहा है. विदेश न जाओ, विदेशी उत्पाद न खरीदो, सोना न खरीदो, पेट्रोल-डीलज की गाड़ी इस्तेमाल न करो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करो और वर्क फ्रॉम होम करो, इन सारे कदमों से सिर्फ मिडिल क्लास प्रभावित हो रहा है. मिडिल क्लास बहुत देशभक्त है. जरूरत पड़ने पर मिडिल क्लास किसी भी हद तक जाकर देश के लिए कुछ भी करेगा, लेकिन केवल मिडिल क्लास ही क्यों? सबसे पहले अगर किसी को कुर्बानी देनी चाहिए थी तो वह सरकार को देनी चाहिए थी. देश की सरकार को अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए. लेकिन देश की सरकार ने अपने खर्चों में कोई कटौती नहीं की.

'सरकार और पीएम को अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए'

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार को अपने खर्चे में कटौती करने के बाद प्रधानमंत्री और सारे मंत्रियों को अपने-अपने खर्चों और खपत पर कटौती करनी चाहिए. उन्होंने भी अपने खर्चे में कोई कटौती नहीं की. सभी खुले घूम रहे हैं, विदेशों में भी जा रहे हैं, गाड़ियां भी खूब इस्तेमाल कर रहे हैं, सोना भी खूब खरीद रहे होंगे. सब कुछ हो रहा है. इसके बाद अफसरों से उम्मीद की जाती है कि अफसरशाही कुछ कुर्बानी करे. इसके बाद देश के अति अमीर लोगों से उम्मीद थी. इनमें मोदी जी के कुछ दोस्त भी शामिल हैं. मोदी जी को इनसे भी एक अपील करनी चाहिए थी कि अडानी जी भी अपने खर्चें में कुछ कटौती करें और देश अन्य खरबपति लोगों भी कटौती करें, लेकिन इनसे कोई अपील नहीं की गई. यह अपील सिर्फ देश के मिडिल क्लास से अपील की गई है. इस बात का दुख होता है.

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अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मिडिल क्लास कह रहा है कि वह देश के लिए कुर्बानी करेगा, लेकिन केवल हम ही क्यों? मोदी जी, अडानी, मंत्री और अफसर कुर्बानी क्यों नहीं देंगे? देश तो सबका है. हम देश के लिए कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं, लेकिन चुन कर सिर्फ मिडिल क्लास को टारगेट नहीं किया जाए और देश के साथ सारी जानकारी साझा की जाए.

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