स्कूटर पर मंत्री, साइकिल पर जज...PM मोदी की अपील के बाद बदली VIP संस्कृति, पेट्रोल बचाने की मुहिम में दिखा नया भारत
VIP Culture: PM की इस अपील का असर अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा हैं. कई राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री, जज और अधिकारी खुद उदाहरण पेश करते नजर आ रहे हैं. कोई सरकारी काफिला छोटा कर रहा हैं, तो कोई स्कूटर और साइकिल से ऑफिस पहुंच रहा हैं.
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Changing VIP Culture: दुनियाभर में बढ़ते तनाव और ईरान -अमेरिका के बीच हालिया संघर्ष का असर अब भारत पर भी साफ़ दिखाई देने लगा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा हैं पेट्रोल -डीज़ल की बढ़ती कीमतों और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे असर को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की हैं. उन्होंने लोगों से कहा कि जरूरत होने पर ही वाहन इस्तेमाल करें, सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं और जहां संभव हो कारपूलिंग का सहारा लें. PM की इस अपील का असर अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा हैं. कई राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री, जज और अधिकारी खुद उदाहरण पेश करते नजर आ रहे हैं. कोई सरकारी काफिला छोटा कर रहा हैं, तो कोई स्कूटर और साइकिल से ऑफिस पहुंच रहा हैं. सरकार का मकसद साफ़ हैं - जब देश मुश्किल दौर से गुजर रहा हो, तब बचत सिर्फ आम जनता ही नहीं बल्कि नेताओं और अधिकारियों को भी करनी चाहिए...
स्कूटर से सचिवालय पहुंचे मंत्री, साइकिल से कोर्ट पहुंचे जज
सबसे ज्यादा चर्चा उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री Ganesh Joshi की हो रही है. उन्होंने अपने बड़े सरकारी काफिले को छोड़कर स्कूटर से सचिवालय जाना शुरू कर दिया है. मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ कैमरे के लिए नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान करने और लोगों को संदेश देने की कोशिश है कि ईंधन बचाना आज समय की जरूरत बन चुका है.
गजब ही चल रहा है... पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष की गाड़ी तोड़ सफलता के बाद अब ऊर्जा मंत्री EV स्कूटर पर निकले हैं कह रहे हैं इसी से दफ्तर जाएंगे वैसे अगर ऐसा करते हैं रोज बगैर कैमरे के तो वाकई अच्छी पहल होगी pic.twitter.com/tAth5sMUQu
— Anurag Dwary (@Anurag_Dwary) May 12, 2026
वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज Justice Dwarkadhish Bansal भी साइकिल चलाकर कोर्ट पहुंचे. उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई. लोगों ने इसे एक सकारात्मक संदेश बताया कि जब बड़े पदों पर बैठे लोग खुद बदलाव अपनाते हैं, तब आम जनता भी उससे प्रेरित होती है.
THIS IS JUDICIAL SACRIFICE IN 4K 🔥
— Mr Sharma (@sharma_views) May 12, 2026
MP High Court judge rides a bicycle to court after Modi’s fuel-saving appeal.
Absolutely not ordinary.
One judge on cycle, one petrol bike and one police van behind him.
Worth applauding. 👏 pic.twitter.com/8BPCryE0LV
दिल्ली सरकार ने घटाईं सरकारी गाड़ियां
दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने भी बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने घोषणा की कि अब मंत्रियों, विधायकों और सरकारी अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली गाड़ियों की संख्या कम की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता देगी. उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ भाषण देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि नेताओं को खुद उदाहरण बनना होगा. दिल्ली सरकार का मानना है कि अगर सरकारी स्तर पर ही हजारों लीटर ईंधन बचाया जाए, तो उसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
मध्य प्रदेश में छोटा हुआ मुख्यमंत्री का काफिला
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटा दी है. पहले उनके काफिले में करीब 13 गाड़ियां चलती थीं, लेकिन अब इसे घटाकर 8 कर दिया गया है. साथ ही मंत्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे कम से कम गाड़ियों का इस्तेमाल करें और बेवजह की कार रैलियों से बचें.
सरकार ने साफ कहा है कि यह सिर्फ ईंधन बचाने का कदम नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित से जुड़ा फैसला है. जब वैश्विक हालात मुश्किल हों, तब हर छोटी बचत भी देश के लिए बड़ी मदद बन सकती है.
यूपी में CM योगी का सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी अधिकारियों और मंत्रियों को साफ निर्देश दिए हैं कि उनके काफिलों में 50 प्रतिशत तक कटौती की जाए. उन्होंने कहा कि गैरजरूरी वाहनों को तुरंत हटाया जाए और जहां संभव हो, ‘वर्क फ्रॉम होम’ को बढ़ावा दिया जाए.
सीएम योगी ने मेट्रो, बस और पीएनजी जैसे विकल्पों के इस्तेमाल पर जोर दिया. उनका कहना है कि अगर सरकार खुद बचत की आदत डालेगी, तभी आम लोग भी इसे गंभीरता से लेंगें.
महाराष्ट्र में सरकारी विमानों पर रोक जैसी सख्ती
महाराष्ट्र सरकार ने भी बड़ा फैसला लेते हुए सरकारी विमानों और हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल को बेहद सीमित कर दिया है. अब इनका उपयोग सिर्फ आपात स्थिति या सुरक्षा कारणों में ही किया जाएगा. मंत्रियों और अधिकारियों को जिला स्तर की यात्राओं के लिए ट्रेन या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल करने को कहा गया है.
सरकार का मानना है कि इससे करोड़ों रुपये का ईंधन बचाया जा सकेगा. साथ ही यह भी संदेश जाएगा कि देश के संसाधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर करना जरूरी है.
सरकारी दफ्तरों में भी बचत अभियान
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सिर्फ यात्रा ही नहीं... बल्कि सरकारी दफ्तरों में भी बचत अभियान शुरू हो चुका है. कई मंत्रालयों ने फिर से ‘वर्क फ्रॉम होम’ मॉडल लागू करना शुरू कर दिया है ताकि रोजाना होने वाली यात्रा कम हो सके. इसके अलावा दफ्तरों में बिजली बचाने के लिए AC के इस्तेमाल को सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं.
सरकार की कोशिश है कि लोग यह समझें कि ईंधन और ऊर्जा की बचत सिर्फ पैसों की बचत नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा मामला है। दुनिया में जब तेल संकट गहराता है, तब उसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है. ऐसे में छोटी-छोटी सावधानियां भी बड़े बदलाव ला सकती हैं.
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