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'नीला गमछा' डालने से नहीं बदलेगी सोच... मायावती का सपा-कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोलीं- पहले दिल-दिमाग साफ करें
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीले कपड़े या गमछे अपनाने से उनकी जातिवादी और पूंजीवादी सोच नहीं बदल सकती. मायावती ने पीडीए की राजनीति, निष्कासित नेताओं और अशोक सिद्धार्थ के संन्यास को लेकर भी सवाल उठाए.
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उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में सूबे की सियासत में अभी से उबाल देखने को मिल रहा है. सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तो चल ही रहा है. इस बीच अब बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी एक्टिव मोड में नज़र आने लगी हैं. शुक्रवार को ने समाजवादी पार्टी (SP), कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए उनके नीले रंग अपनाने को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि नीले कपड़े, गमछे और मंचों पर नीले रंग का इस्तेमाल करने भर से इन दलों की वर्षों पुरानी जातिवादी, संकीर्ण, सामंती और पूंजीवादी सोच नहीं बदल सकती. मायावती ने कहा कि बहुजन समाज के वास्तविक हित और कल्याण की बात करने से पहले इन दलों को अपना दिल और दिमाग पाक-साफ करना चाहिए.
सपा के PDA और कांग्रेस पर मायावती का हमला
मायावती ने सपा के पीडीए और कांग्रेस की राजनीति पर भी निशाना साधा. उन्होंने बसपा से निष्कासित नेताओं के दूसरी पार्टियों में जाने और अलग संगठन बनाने को लेकर भी विपक्षी दलों को घेरा. साथ ही अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के मामले पर भी उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि सही समय आने पर पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ बताया जाएगा.
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1. सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बी.एस.पी. का शुरु से ही चला आ रहा नीला रंग अब यह इनके गले का गमछा व कपड़े पहनने से तथा स्टेज आदि में भी नीला कपड़ा इस्तेमाल करने से इनकी सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े व अन्य…
— Mayawati (@Mayawati) ?ref_src=twsrc%5Etfw">September 11, 2026Advertisement
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नीले रंग को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना
बसपा मुखिया मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट के माध्यम से लिखा कि सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बी.एस.पी. का शुरु से ही चला आ रहा नीला रंग अब यह इनके गले का गमछा व कपड़े पहनने से तथा स्टेज आदि में भी नीला कपडा इस्तेमाल करने से इनकी सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े व अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही इनकी जातिवादी, संकीर्ण, सामन्तवादी एवं पूँजीवादी सोच नहीं बदल सकती है तथा ना ही ये लोग दिल से अम्बेडकरवादी होने एवं कहलाने वाले हैं. इसीलिये 'बहुजन समाज' के वास्तविक हित व कल्याण के प्रति पहले वे अपना दिल व दिमाग़ तो पाक-साफ करें.
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गिरगिट की तरह बदलते हैं रंग
उन्होंने आगे लिखा कि वैसे भी ये लोग इन वर्गों के मामले में आए दिन गिरगिट की तरह ही रंग बदलते रहते हैं अर्थात् ये कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं. खासकर इनके सपा के पीडीए के मामले में तो इनकी सोच, चाल, चरित्र व चेहरा आदि हमेशा दोगला व बईमान ही रहा है, जिसके अनेकों उदाहरण हैं, ये सभी जानते हैं. इसलिए इन वर्गों की एकमात्र हितैषी व अम्बेडकरवादी पार्टी केवल बी.एस.पी. ही है, जो सर्वविदित है.
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निष्कासित नेताओं और छोटे संगठनों पर भी बोला हमला
मायावती ने आगे कहा कि यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अन्य पार्टियों की तरह बीएसपी के जो भी लोग पार्टी में अनुशासनहीनता आदि के कारण समय-समय पर निष्कासित कर दिये जाते हैं तो वे अधिकतर इन्हीं सब कारणों से अब तक कई पार्टी बदल चुके हैं, जो किसी से छिपा नहीं है. इसी से ही अन्दाज़ा लगा लेना चाहिये कि ये लोग पूरे स्वार्थी व अवसरवादी हैं और वे किसी भी पार्टी के हित में नहीं हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि जिनको पार्टी से निकाल दिया जाता है तो उनमें से कुछ लोग दूसरी पार्टियों के हाथों में खेलकर छोटी-छोटी पार्टियां व संगठन आदि भी बना लेते हैं, जिनसे 'बहुजन समाज' का सामूहिक हित नहीं हो सकता है. मायावती ने कहा कि ऐसी पार्टियाँ बिना किसी गठबन्धन के भी चुनाव नहीं लड़ सकती हैं तथा किसी भी पार्टी की सरकार बनने पर सरकार में शामिल हुये बिना भी नहीं रह सकती हैं, जो पार्टी से निकाले हुये लोगों को अक्सर अपनी पार्टी में लेने की बात करते हैं या उन्हें पार्टी बनाने की भी सलाह देते हैं, तो वे पहले अपने गिरेबान में भी झांककर ज़रूर देख लें.
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कांग्रेस पर भी मायावती का सीधा निशाना
उन्होंने कहा कि ख़ासकर कांग्रेस पार्टी, जिन निकाले हुये लोगों को अपनी पार्टी में लेने की बात कर रही है, तो ऐसी पार्टी में जो डूबते जहाज़ की तरह है, उसमें भला कौन शामिल होकर अपने भविष्य को अन्धकार में डालेगा, जबकि ख़ासकर इस पार्टी से दूरी बनाने के लिये बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर जी ने अपने जीते-जी बहुजन समाज के लोगों को अगाह (चेताया) भी किया था. इसलिये यह सब वर्तमान हालात में, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में बी.एस.पी. के लोगों को जानना व समझना भी बहुत जरूरी है तो यह उचित होगा.
अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर लगाए गंभीर आरोप
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मायावती ने कहा कि यहां यह भी बताना बहुत जरूरी है कि जिस दिन बीएसपी ने श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी तो उस दिन इन्होंने इनके उपर काफी दबाव पड़ने के बावजूद भी अपने संन्यास लेने की घोषणा तब तत्काल नहीं की थी क्योंकि उस दिन यह पूरी रातभर इसे रुकवाने के लिए किस्म-किस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करते रहे जिसमें कामयाबी नहीं मिलने पर, फिर मजबूरी में, अगले दिन यह सोच कर इनको लगभग प्रातः 6:30 बजे अपने संन्यास की काफी किन्तु-परन्तु वाली घोषणा करनी पड़ी है, कि कहीं ज्यादा देरी होने पर और भी बड़ा नुकसान ना हो जाये, जिसके बारे में सही समय आने पर पार्टी के लोगों को और भी बहुत कुछ जरूर बताया जायेगा.
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बताते चलें कि मायावती के इस ताजा बयान के बाद यूपी की सियासत में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं. उन्होंने एक साथ सपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए बसपा की विचारधारा और संगठन को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है.