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कमरे में छापे जा रहे थे नकली नोट, 5वीं पास शेर सिंह निकला मास्टरमाइंड, कानपुर पुलिस ने गिरोह को ऐसे दबोचा
यूपी के कानपुर में पुलिस ने नकली नोट गिरोह का भंडाफोड़ कर कथित मास्टरमाइंड शेर सिंह समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. रेल बाजार स्थित किराए के कमरे से 2.04 लाख रुपये की नकली करेंसी और नोट बनाने का सामान बरामद हुआ है.
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में नकली नोटों के एक ऐसे गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है, जिसने किराए के एक कमरे को कथित तौर पर नकली करेंसी तैयार करने की फैक्ट्री बना रखा था. बाहर से यह कमरा किसी आम किराएदार का ठिकाना लगता था, लेकिन अंदर प्रिंटर और नकली नोट तैयार करने से जुड़ा पूरा सामान मौजूद था. पुलिस ने इस मामले में गिरोह के कथित मास्टरमाइंड 52 वर्षीय शेर सिंह समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के कब्जे से कुल 2 लाख 4 हजार 650 रुपये की नकली करेंसी बरामद होने की बात सामने आई है.
पुलिस के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क कानपुर के रेल बाजार इलाके में रामलीला मैदान के पास एक किराए के कमरे से चलाया जा रहा था. जांच के दौरान पुलिस को वहां से बड़ी संख्या में नकली नोटों के साथ उन्हें तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला सामान भी मिला. बरामदगी ने पुलिस को यह समझने में मदद की कि गिरोह सिर्फ नकली नोटों को जमा नहीं कर रहा था, बल्कि उन्हें तैयार करने का काम भी इसी ठिकाने पर किया जा रहा था.
फेक करेंसी के साथ 03 अभियुक्त गिरफ्तार
मुखबिर की सूचना पर SOG/क्राइम ब्रांच एवं थाना रेलबाजार पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए 03 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। अभियुक्तों के कब्जे से लगभग ₹2 लाख की फेक करेंसी बरामद हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में अभियुक्तों… pic.twitter.com/OAQ1P9xK9q— POLICE COMMISSIONERATE KANPUR NAGAR (@kanpurnagarpol) ?ref_src=twsrc%5Etfw">September 10, 2026Advertisement
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कमरे के अंदर मिला नकली नोट तैयार करने का पूरा सामान
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पुलिस की छापेमारी में कमरे से प्रिंटर, कैंची, पेपर कटर, तराजू, स्याही के कंटेनर, कागज की शीट, बैग और दूसरे उपकरण बरामद किए गए हैं. यानी कमरे में नकली नोटों को तैयार करने से लेकर उन्हें अलग करने और संभालकर रखने तक का सामान मौजूद था. पुलिस के अनुसार, शेर सिंह इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड है. बताया जा रहा है कि वह सिर्फ पांचवीं कक्षा तक पढ़ा है और प्रिंटर की मदद से नकली नोट तैयार करता था. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसने नकली करेंसी बनाने का तरीका कहां से सीखा और इस काम में उसके साथ कोई अन्य तकनीकी व्यक्ति भी शामिल था या नहीं.
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100 रुपये के नकली नोटों का सबसे बड़ा स्टॉक
पुलिस की कार्रवाई में सबसे ज्यादा संख्या 100 रुपये के नकली नोटों की मिली है. अधिकारियों के मुताबिक, 100 रुपये के कुल 1,991 नकली नोट बरामद किए गए हैं. इसके अलावा 50 रुपये के 71 और 500 रुपये के चार नकली नोट भी मिले हैं. इस तरह बरामद नकली करेंसी की कुल कीमत 2 लाख 4 हजार 650 रुपये बताई गई है. बड़ी संख्या में छोटे मूल्य के नोटों की बरामदगी ने पुलिस का ध्यान इस बात पर भी खींचा है कि गिरोह इन्हें बाजार में छोटे-छोटे लेनदेन के जरिए खपाने की कोशिश कर रहा था. दरअसल, नकली नोटों को सीधे किसी बड़े कारोबारी या बैंकिंग चैनल के जरिए चलाना जोखिम भरा हो सकता है. इसके मुकाबले छोटी दुकानों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में कम मूल्य के नोटों को असली करेंसी के बीच खपाना आसान समझा जाता है. पुलिस के मुताबिक, इसी वजह से रेलवे स्टेशन के आसपास की छोटी दुकानों और भीड़ वाले बाजारों को निशाना बनाया जाता था.
तीन गुना रकम के हिसाब से बदलते थे नकली नोट
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इस मामले में पुलिस को गिरोह के काम करने के कथित तरीके की भी जानकारी मिली है. पुलिस के अनुसार, आरोपी नकली करेंसी को उसकी रकम के मुकाबले तीन गुना रकम के हिसाब से बदलते थे. यानी नकली नोटों को सीधे बड़े स्तर पर चलाने के बजाय उन्हें छोटे नेटवर्क के जरिए बाजार में पहुंचाने की कोशिश की जाती थी. यह तरीका गिरोह के लिए इसलिए भी सुविधाजनक हो सकता था क्योंकि छोटी दुकानों पर दिनभर बड़ी संख्या में ग्राहक आते हैं. ऐसे में नकली नोटों को असली नोटों के साथ मिलाने की कोशिश की जा सकती है. हालांकि, पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरीके से अब तक कितनी नकली करेंसी बाजार में पहुंचाई जा चुकी है.
पांचवीं पास शेर सिंह कैसे बना कथित मास्टरमाइंड
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गिरफ्तार आरोपियों में शेर सिंह पुलिस की जांच के केंद्र में है. उसकी उम्र 52 साल है और पुलिस के मुताबिक उसने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की है. इसके बावजूद वह प्रिंटर और दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल कर नकली नोट तैयार करने का काम कर रहा था. अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि उसे इस काम की जानकारी कहां से मिली. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या वह खुद नकली नोट तैयार करता था या गिरोह में कोई दूसरा व्यक्ति तकनीकी काम संभालता था. गिरफ्तार तीनों आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं इनके तार पहले से सक्रिय किसी बड़े नकली करेंसी नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं.
पुलिस के सामने कई बड़े सवाल?
तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और नकली नोटों की बरामदगी के बाद पुलिस की जांच अब अगले चरण में पहुंच गई है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी नकली करेंसी तैयार की और उसमें से कितने नोट बाजार तक पहुंच चुके हैं. पुलिस कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन के अलावा आसपास के इलाकों और दूसरे जिलों के रेलवे स्टेशनों के बाजारों में भी इस नेटवर्क के संपर्क तलाश रही है. अगर जांच में गिरोह के और सदस्यों या खरीदारों के नाम सामने आते हैं, तो मामले का दायरा और बड़ा हो सकता है.
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बहरहाल, पुलिस की कार्रवाई ने यह जरूर दिखा दिया है कि नकली नोटों का कारोबार हमेशा किसी बड़े कारखाने या सुनसान जगह से ही नहीं चलता. कभी-कभी आम नजर आने वाला किराए का एक कमरा भी ऐसे गैरकानूनी धंधे का ठिकाना बन सकता है. कानपुर के इस मामले में पुलिस अब सिर्फ बरामद नकली नोटों का हिसाब नहीं लगा रही, बल्कि यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क की जड़ें आखिर कितनी गहरी हैं.