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चौधरी चरण सिंह को CM योगी ने दी श्रद्धांजलि, बताया किसानों का मसीहा

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार चौधरी चरण सिंह की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए किसानों के हित से जुड़े अनेक कार्यक्रम चला रही है. इसमें लखनऊ में चौधरी चरण सिंह सीड पार्क का निर्माण भी महत्वपूर्ण है.

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29 May 2026
( Updated: 29 May 2026
12:07 PM )
चौधरी चरण सिंह को CM योगी ने दी श्रद्धांजलि, बताया किसानों का मसीहा
Image Credits: X/@myogiadityanath
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री 'भारत रत्न’ चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. सीएम योगी ने विधान भवन स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पार्चन किया. 

सीएम योगी ने पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह को दी श्रद्धांजलि 

सीएम योगी ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत मां का महान सपूत और किसानों का मसीहा बताया. 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश में हुआ था. वह देश के स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े थे. देश में कृषि, राजस्व के क्षेत्र में तमाम रिफॉर्म का श्रेय उन्हें जाता है. उनका स्पष्ट मत था कि देश के विकास का रास्ता गांव, खेत व खलिहालों से होकर जाता है. किसान विकास के एजेंडे और सरकार की प्राथमिकता का हिस्सा होना चाहिए. शासन की योजनाएं किसानों को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए. चौधरी चरण सिंह द्वारा देशहित में किए गए कार्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें भारत रत्न की उपाधि से भी सम्मानित किया गया. 

महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित थे चौधरी चरण सिंह

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सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार चौधरी चरण सिंह की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए किसानों के हित से जुड़े अनेक कार्यक्रम चला रही है. इसमें लखनऊ में चौधरी चरण सिंह सीड पार्क का निर्माण भी महत्वपूर्ण है. देश के प्रमुख राजनेता होने के साथ ही उन्होंने देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था. किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था. उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए. वह महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित थे और अंग्रेजों के खिलाफ कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई. स्वतंत्रता के बाद उन्होंने किसानों, भूमिहीनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए. 29 मई 1987 को उनका देहावसान हुआ.

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