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बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, चुनावी इतिहास में पहली बार उम्मीदवार के सामने होगी EVM की जांच

भारत में पहली बार चुनाव के बाद EVM की जांच का आदेश दिया गया है. बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस सोमशेखर सुंदरेसन के निर्देश पर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, कांग्रेस नेता आरिफ नसीम खान की मौजूदगी में जांच करेगा. खान ने चांदीवली सीट पर हार के बाद नतीजों को चुनौती दी थी.

बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, चुनावी इतिहास में पहली बार उम्मीदवार के सामने होगी EVM की जांच
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देश की चुनावी प्रक्रिया में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है. भारत में पहली बार चुनाव के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जांच होने जा रही है. यह फैसला चुनावी पारदर्शिता और भरोसे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

दरअसल, बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस सोमशेखर सुंदरेसन ने EVM की जांच का आदेश दिया है. यह जांच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा की जाएगी. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सीनियर कांग्रेस नेता आरिफ नसीम खान भी मौजूद रहेंगे.

चांदीवली सीट का क्या है पूरा मामला?

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यह मामला मुंबई की चांदीवली विधानसभा सीट से जुड़ा है, जहां आरिफ नसीम खान चुनाव हार गए थे. उन्होंने शिवसेना के विधायक दिलीप भाऊसाहेब लांडे के खिलाफ चुनाव परिणाम को चुनौती दी थी. इस सीट पर लांडे को 1,24,641 वोट मिले थे, जबकि खान को 1,04,016 वोट हासिल हुए थे.

हाई कोर्ट के निर्देश 

12 फरवरी को हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि EVM की जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि जब भी इस तरह की अनुमति दी जाए, तो दो महीने के भीतर चुनाव आयोग को मशीनों की जांच पूरी करनी होगी. मुंबई उपनगर की डिप्टी रिटर्निंग ऑफिसर अर्चना कदम के मुताबिक, 16 और 17 अप्रैल को EVM का डायग्नोस्टिक चेक किया जाएगा.

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इतिहास में पहली बार ऐसा कदम

इस फैसले की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि भारत में अब तक इस तरह से उम्मीदवारों और अधिकारियों की मौजूदगी में EVM की जांच नहीं हुई है. यह पहला मौका है जब कोर्ट के आदेश पर इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा. गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी EVM में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप लगाए थे। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2024 के एक फैसले का हवाला देते हुए खान ने कहा था कि हर निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 5 फीसदी EVM और VVPAT यूनिट्स की तकनीकी जांच होनी चाहिए।

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बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने देश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है. जहां एक तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र की जीत बता रहा है, वहीं दूसरी ओर यह कदम भविष्य के चुनावों में पारदर्शिता और विश्वास को और मजबूत कर सकता है. अब सभी की नजर 16 और 17 अप्रैल को होने वाली इस जांच पर टिकी है. यह देखना दिलचस्प होगा कि इस ऐतिहासिक प्रक्रिया से क्या निष्कर्ष निकलते हैं और इसका आने वाले चुनावों पर क्या असर पड़ता है.

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