भरत तिवारी एनकाउंटर केस: SDM समेत 11 अधिकारियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट, 12 अगस्त तक गिरफ्तारी के आदेश
बिहार के आरा कोर्ट में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने SP को निर्देश दिए हैं कि सभी 11 आरोपियों को 12 अगस्त तक अरेस्ट किया जाए.
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बिहार के बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है. इस मामले में तत्कालीन SDM और SDPO समेत 11 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं.
भोजपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 अगस्त तक न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया है. अदालत की यह कार्रवाई शाहपुर थाना कांड संख्या 178/2026 से जुड़ी बताई जा रही है.
भरत तिवारी के वकील ने क्या कहा?
इस मामले में अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 73 के तहत गैर-जमानती वारंट जारी करने सहित जांच की प्रगति से संबंधित कई बिंदुओं पर अदालत से निर्देश देने की मांग की थी. जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी होने की बात कही जा रही है.
इनकी गिरफ्तारी के आदेश
- जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार
- तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा
- शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार
- दारोगा अंकित आर्यन, हरिचंद्र कुमार
- एएसआई रामाशंकर यादव
- एसटीएफ के विकास कुमार, अक्षय कुमार और अन्य पुलिसकर्मी
STF के जवान अक्षय कुमार को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. वकील संजीव कुमार सिंह के मुताबिक, अदालत के सामने जांच की स्थिति और अब तक की पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई सवाल उठाए गए थे.
इनमें जांच शुरू होने की तारीख, अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उठाए गए कदम, आरोपियों को जारी नोटिसों का विवरण और जिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, उसके कारणों की जानकारी मांगी गई थी. याचिका में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का पूरा विवरण भी मांगा गया है. इसमें मृतक भरत भूषण तिवारी के मोबाइल फोन से संबंधित जानकारी, CCTV फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और जांच के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयान शामिल हैं.
भरत तिवारी के फोन से ही सबूत मिलने का दावा
वकील संजीव कुमार सिंह का दावा है कि भरत तिवारी के मोबाइल में कथित तौर पर महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद थे. पुलिस ने जब उसका फोन अपने कब्जे में लिया था उस समय जानकारी मांगी गई है.
वकील ने अदालत के सामने यह सवाल उठाया कि क्या किसी आरोपी ने जानबूझकर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की है. क्या किसी को फरार घोषित किया गया है और मामले की जांच फिलहाल किस स्थिति में है? गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के कई मामलों का हवाला दिए जाने की बात भी कही गई है.
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अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने दावा किया कि अदालत ने उनकी सभी प्रमुख प्रार्थनाओं को स्वीकार कर लिया है. इसके बाद कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि 12 अगस्त तक आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाए. उन्होंने कहा कि अगर निर्धारित समय तक गिरफ्तारी नहीं होती है तो एसपी को खुद 12 अगस्त को अदालत में आकर जवाब देना होगा.
क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर केस?
यह मामला 17 जून की सुबह शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई पुलिस मुठभेड़ से जुड़ा है. जब काशीनाथ तिवारी के बेटे भरत तिवारी ने पुलिस पर बंदूक तान ली थी. इस दौरान भरत लगातार फेसबुक पर लाइव था. पुलिस ने भरत को गन फेंकने के लिए कहा. दावा है कि उसने बंदूक नीचे रख दी थी और फेसबुक लाइव भी बंद हो गया था. तभी पुलिस की गोली चली और भरत तिवारी को जा लगी. आरोप है कि पुलिस ने उसे पांच गोलियां मारी थीं.
सरेंडर के बाद क्यों की फायरिंग? उठे थे पुलिस
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परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि भरत भूषण ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई, बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था. मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए राज्य सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन किया था.